अब भारत के पास होंगे एआई वाले शिकारी ड्रोन! आर्मी ने कर ली डील, स्वदेशी तकनीक से दहलेगा दुश्मन का कलेजा

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अब भारत के पास होंगे AI वाले किलर ड्रोन! देसी तकनीक से दहलेगा दुश्मन का कलेजा

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Indian Army Drone Deal: बेंगलुरु स्थित 515 आर्मी बेस वर्कशॉप (515 ABW) ने भारत को ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने के लिए तीन बड़े समझौते किए हैं. सेना ने स्टार्टअप्स और नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी के साथ हाथ मिलाया है. सेना के इस कदम से विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी और एआई आधारित घातक ड्रोन भारत में ही तैयार होंगे.

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अब भारत के पास होंगे एआई वाले शिकारी ड्रोन! (AI Photo)

बेंगलुरु: 515 आर्मी बेस वर्कशॉप (515 ABW) ने बुधवार को एक अहम समझौता किया. सेना ने स्वदेशी ड्रोन निर्माण को बढ़ावा देने और इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए तीन महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं. यह कदम प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत विजन को सीधे तौर पर जमीन पर उतारने जैसा है. इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य मानवरहित विमान प्रणालियों यानी ड्रोन के क्षेत्र में भारत को आधुनिक बनाना है.

स्टार्टअप्स के साथ मिलकर कैसे मजबूत होगी सेना की आसमानी ताकत?

स्वदेशी ड्रोन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 515 ABW ने ‘नॉटिकल विंग्स एयरोस्पेस’ नाम के स्टार्टअप के साथ हाथ मिलाया है. यह बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप एडवांस इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम और वर्टिकल लिफ्ट सॉल्यूशंस में एक्सपर्ट है. इस साझेदारी के तहत यह स्टार्टअप सेना के टेक्नीशियनों को बीएलडीसी मोटर और कंपोजिट फैब्रिकेशन जैसी बारीकियां सिखाएगा. इससे सेना खुद के प्रोपल्शन सिस्टम और मोटर्स तैयार कर सकेगी.

इसके अलावा ‘यानेंद्रिया प्राइवेट लिमिटेड’ के साथ भी एक समझौता हुआ है. यह स्टार्टअप एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम और नेविगेशन सिस्टम विकसित करने में मदद करेगा. इससे ड्रोन्स की विदेशी तकनीक पर निर्भरता लगभग खत्म हो जाएगी.

फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी के साथ सुरक्षा के मोर्चे पर क्या है बड़ी तैयारी?

ड्रोन तकनीक जितनी जरूरी है, उसकी सुरक्षा उतनी ही चुनौतीपूर्ण है. इसी को ध्यान में रखते हुए तीसरा समझौता गांधीनगर की नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के साथ किया गया है. यह साझेदारी ड्रोन फॉरेंसिक और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी.

एनएफएसयू सेना को साइबर हमलों और हार्डवेयर सुरक्षा जोखिमों से निपटने के लिए मजबूत फ्रेमवर्क तैयार करने में मदद करेगी. इसके जरिए दुश्मन के ड्रोन्स के खतरों का विश्लेषण करना भी आसान हो जाएगा. यह सिविल-मिलिट्री इंटीग्रेशन का एक बेहतरीन उदाहरण है.

क्या इस कदम से भारतीय सेना की ऑपरेशनल क्षमता में बड़ा बदलाव आएगा?

इन समझौतों के बाद 515 ABW अब एक टेक्निकल इनक्यूबेटर के रूप में काम करेगी. यहां नए-नए इनोवेशन होंगे जो सीधे तौर पर सेना की युद्धक क्षमता को बढ़ाएंगे. तेजी से बदलती तकनीक के साथ तालमेल बिठाने के लिए यह प्रोजेक्ट बहुत जरूरी था. इससे न केवल सेना की ऑपरेशनल तैयारी मजबूत होगी, बल्कि डिफेंस इनोवेशन इकोसिस्टम को भी नई ऊर्जा मिलेगी. अब भारतीय सेना के पास ऐसे ड्रोन होंगे जो स्वदेशी एआई और सुरक्षित हार्डवेयर से लैस होंगे.

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Deepak Verma

दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्‍य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें



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