‘आपके हाथ में सबका समय है…फांसी चढ़ा दीजिए’, राज्‍यसभा में क्‍यों भड़कीं जया बच्‍चन – faansi per chadha dijiye bachche baith jao jaya bachchan

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‘आप लोगों के हाथ में सबका समय है…फांसी चढ़ा दीजिए’, क्‍यों भड़कीं जया बच्‍चन

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Jaya Bachchan News: सपा सांसद जया बच्‍चन अक्‍सर ही नाराज हो जाती हैं. संसद के ऊपरी सदन राज्‍यसभा में वैसा ही कुछ देखने को मिला, जब ट्रांसजेंडर बिल पर चर्चा चल रही थी. जया बच्‍चन जब बोलने के लिए उठीं तो टोका-टाकी शुरू हो गई. इससे वह बेहद नाराज हो गईं.

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जया बच्‍चन राज्‍यसभा में बहस के दौरान अचानक से भड़क गईं. (फाइल फोटो/PTI)

Jaya Bachchan News: राज्यसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्‍चन (Jaya Bachchan) का भाषण बीच-बीच में व्यवधान और तीखी नोकझोंक के कारण सुर्खियों में रहा. उन्होंने अपनी बात की शुरुआत विपक्ष के अन्य सदस्यों के साथ एकजुटता जताते हुए की और आगामी रामनवमी की शुभकामनाएं दीं. उन्‍होंने जैसे ही अपनी बात आगे बढ़ाई, तो सदन में हो रहे शोर-शराबे के कारण वह कुछ पल के लिए रुक गईं. इस पर पीठासीन अधिकारी दिनेश शर्मा (Dinesh Sharma) ने उन्हें अपनी ओर देखकर बोलने का आग्रह किया. जया बच्चन ने जवाब दिया कि जब दूसरे सदस्य बोल रहे होते हैं तो ध्यान भटकता है, लेकिन जब वह बोलेंगी तो सभी का ध्यान उनकी ओर होना चाहिए. इसपर चेयर से दिनेश शर्मा ने कहा कि बहुत सारे लोग बोलते हैं. उन्होंने सदस्यों से बैठने के लिए कहा. जया बच्चन ने भी कहा- बच्चे, बैठ जाओ. चेयर से दिनेश शर्मा ने कहा कि समय आपका किल हो रहा है. इस पर जया बच्चन ने कहा कि कोई बात नहीं सर. आप लोगों के हाथ में सबका समय है. जितना मर्जी दीजिए, फांसी चढ़ा दीजिए.

राज्‍यसभा में लगातार हो रही टोका-टाकी पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए ट्रेजरी बेंच की ओर इशारा किया और कहा कि उन्हें बीच में रोका जा रहा है, जबकि अन्य सदस्यों को नहीं टोका जा रहा. उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है तो चेयर को कार्रवाई करनी चाहिए. इस दौरान समय को लेकर भी चर्चा हुई, जिस पर उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि समय का नियंत्रण पूरी तरह से पीठासीन अधिकारी के हाथ में है. अपने संबोधन में जया बच्चन ने ट्रांसजेंडर समुदाय की सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं में इस समुदाय को विशेष सम्मान दिया गया है और शुभ अवसरों पर उनकी उपस्थिति को मंगलकारी माना जाता है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ऐतिहासिक रूप से राजघरानों में उन्हें सुरक्षा से जुड़े दायित्व दिए जाते थे, जिससे महिलाओं को संरक्षण मिलता था.

सरकार पर सवाल

मसरकार पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आज अचानक इस समुदाय की उपस्थिति को लेकर असुरक्षा की भावना जताई जा रही है, जो आश्चर्यजनक है. उन्होंने यह भी पूछा कि बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण समय में इस विधेयक को लाने की इतनी जल्दबाजी क्यों है. जया बच्चन ने सुझाव दिया कि इस विषय पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए और ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रतिनिधियों को संसद में नामित सदस्य के रूप में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि उनकी वास्तविक समस्याओं और अनुभवों को सीधे सुना जा सके. उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास विधेयक भेजने की परंपरा का भी हवाला दिया और कहा कि पहले अधिक संख्या में विधेयक गहन जांच के लिए भेजे जाते थे, लेकिन अब ऐसा कम हो रहा है.



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