ईरान-अमेरिका जंग से भारत की ये इंडस्ट्री गुलजार, कारोबारियों के चेहरे पर लौटी मुस्कान, खूब कूट रहे पैसे

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Iran America Israel war and India: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रही जंग ने मिडिल ईस्ट के एयरस्पेस को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. फ्लाइट रूट्स बाधित होने, ईंधन कीमतों में उछाल और यात्रा की अनिश्चितता के कारण भारतीय पर्यटक विदेशी गंतव्यों से मुंह मोड़ रहे हैं. लेकिन इस वैश्विक संकट ने भारत की घरेलू पर्यटन इंडस्ट्री को शानदार बूस्ट दिया है. होटल, ट्रैवल एजेंट, टूर ऑपरेटर्स और लोकल बिजनेसमैन के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है. जहां अंतरराष्ट्रीय यात्राएं महंगी और जोखिम भरी हो गईं. ऐसे में घरेलू गंतव्यों के लिए बुकिंग का सिलसिला तेज हो गया है. ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार लगभग 65 प्रतिशत भारतीय ट्रैवलर्स अब विदेश की जगह घरेलू डेस्टिनेशन्स को प्राथमिकता दे रहे हैं.

हमारी सहयोगी वेबसाइट मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक वांडरऑन के सीईओ गोविंद गौर ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में ट्रैवल सेंटिमेंट में बड़ा बदलाव आया है. हिमाचल, उत्तराखंड, लद्दाख और नॉर्थईस्ट में पूछताछ और बुकिंग्स में 20-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. लोग शॉर्ट ट्रिप्स, सुरक्षित पहुंच और ठंडी जगहों की तलाश में हैं, जहां कोई फ्लाइट कैंसिलेशन या बाधा का डर नहीं.

घरेलू बुकिंग में सबसे ज्यादा उछाल उदयपुर में देखा गया. यहां सालाना आधार पर 69 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. जोधपुर में 47 प्रतिशत, बागडोगरा 44 प्रतिशत, श्रीनगर 41 प्रतिशत और अगरतला में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. गोवा, जम्मू और देहरादून जैसे गंतव्य भी स्थिर ग्रोथ दिखा रहे हैं. लद्दाख, मेघालय, ऋषिकेश और हिमाचल-उत्तराखंड के हिल स्टेशन्स इस समर के टॉप चॉइस बन गए हैं.

स्पिरिचुअल टूरिज्म का जबरदस्त बूम

इस शिफ्ट में सबसे आकर्षक ट्रेंड स्पिरिचुअल और वेलनेस टूरिज्म का है. मिलेनियल्स में से करीब 23 प्रतिशत पूछताछ अब ऋषिकेश जैसे स्पिरिचुअल डेस्टिनेशन्स पर केंद्रित है. यहां यात्री योग, मेडिटेशन, गंगा किनारे वेलनेस और आउटडोर एडवेंचर को एक साथ एंजॉय कर रहे हैं. वांडरऑन जैसी कंपनियां अब नेचर, एडवेंचर और स्पिरिचुअलिटी को मिलाकर खास पैकेजेस बना रही हैं. चोपता, स्पिति वैली और कश्मीर भी तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं. कारोबारी बताते हैं कि युवा पीढ़ी अब सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि मानसिक शांति और रिचार्जिंग के लिए यात्रा कर रही है. ऋषिकेश में योग अश्रमों, रिवर राफ्टिंग और ट्रेकिंग का कॉम्बिनेशन मिलेनियल्स को खास तौर पर आकर्षित कर रहा है. इससे होटल, होमस्टे, योग सेंटर्स और लोकल गाइड्स का बिजनेस जोरों पर है.

साउथ ईस्ट एशिया भी बना अल्टरनेटिव

हालांकि अंतरराष्ट्रीय यात्रा पूरी तरह थमी नहीं है, लेकिन उसकी दिशा बदल गई है. ixigo के डेटा के मुताबिक वियतनाम अब टॉप इंटरनेशनल डेस्टिनेशन बन गया है. यहां बुकिंग डिमांड 130 प्रतिशत बढ़ी है. नेपाल में 88 प्रतिशत, श्रीलंका 68 प्रतिशत, इंडोनेशिया 33 प्रतिशत, सिंगापुर 32 प्रतिशत और थाईलैंड में 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई. ixigo के को-फाउंडर अलोक बाजपेयी ने कहा कि ट्रैवल पैटर्न तेजी से बदल रहे हैं. मिडिल ईस्ट परंपरागत रूप से पसंदीदा था, लेकिन अब साउथईस्ट एशिया और घरेलू विकल्पों की तरफ झुकाव बढ़ा है.

ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स इस स्थिति का फायदा उठा रहे हैं. वांडरऑन ने सेफ समर कैंपेन शुरू किया है, जिसमें भारत और साउथईस्ट एशिया पर फोकस किया गया है. स्काईस्कैनर जैसे प्लेटफॉर्म्स मिडिल ईस्ट में जंग से प्रभावित केंद्रों से बचने के उपाय बता रहे हैं.

घरेलू टूरिज्म को मिला सुनहरा मौका

ईरान-अमेरिका जंग की वजह से पश्चिम एशिया के एयर रूट बाधित है. इस कारण अंतरराष्ट्रीय टूर महंगे पड़ रहे हैं. लेकिन भारतीय पर्यटक प्लान रद्द नहीं कर रहे. बल्कि वे घर के करीब, सस्ते और सुरक्षित विकल्पों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं. इससे होटल इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट, लोकल हैंडीक्राफ्ट, रेस्टोरेंट्स और गाइड सर्विसेज को सीधा फायदा हो रहा है. पहाड़ी क्षेत्रों में होमस्टे बुकिंग्स फुल हो रही हैं, जबकि समुद्री किनारों और सांस्कृतिक शहरों में भी अच्छी भीड़ देखी जा रही है.



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