अल्लाह ईरान के साथ! जंग खत्म होने भर से नहीं खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, हर एक पर पड़ेगी आफत की मार

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Strait of Hormuz: ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल की जंग में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की सबसे बड़ी चिंता बन गई है. इस संकरे जल मार्ग से दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल की ढुलाई होती है. ईरान ने अमेरिका-इजराइल हमलों के जवाब में इसे प्रभावी रूप से ब्लॉक कर दिया है. सैकड़ों ऑयल टैंकर दोनों तरफ खड़े हैं और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वादा किया है कि वह इस स्ट्रेट को किसी भी कीमत पर दोबारा खोल देंगे. लेकिन जानकारों का कहना है कि जंग थमने भर से ट्रैफिक सामान्य नहीं होगा. डिप्लोमैटिक डील या लंबे-खतरनाक सैन्य कब्जे के बिना पूरा रास्ता बहाल करना बेहद मुश्किल है. इसको लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र के भूगोल, छिपी हुई ताकतें और सैन्य जोखिम इसे जटिल बना रहे हैं.

भौगोलिक चुनौती

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद संकरा और उथला है. इसकी सबसे संकरी जगह पर चौड़ाई सिर्फ 21 मील (लगभग 34 किलोमीटर) है, जबकि टैंकरों के लिए इस्तेमाल होने वाली शिपिंग लेन और भी संकरी है. यह करीब दो मील चौड़ी है. जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के करीब से गुजरना पड़ता है. यह भौगोलिक स्थिति ईरान के पक्ष में है. ईरान ने दशकों से इस भूगोल का फायदा उठाने की तैयारी की है. उसके पास छोटे-छोटे हथियार जैसे- मिसाइलें, ड्रोन और माइन्स हैं. इन हथियारों को पहाड़ी चट्टानों, गुफाओं और सुरंगों में छिपाया जा सकता है. फिर इन्हें करीबी रेंज से जहाजों पर दागा जा सकता है.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) की प्रोफेसर कैटलिन तालमैज कहती हैं- ईरानियों ने भूगोल को अपने फायदे में इस्तेमाल करने के बारे में बहुत सोचा है. ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की जेनिफर पार्कर कहती हैं कि संकरी जगह और ईरान की निकटता ही सबसे बड़ी समस्या है. इस स्ट्रेट में हमला होने पर जहाज के पास बचाव के लिए समय बहुत कम होता है. उन्हें कुछ मिनटों में जवाब देना पड़ता है.

ईरान की सैन्य ताकत

अमेरिका-इजराइल के हजारों हमलों के बावजूद ईरान की हमले की क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. ईरान के पास मोबाइल मिसाइल बैटरियां हैं, जो आसानी से जगह बदल सकती हैं. छोटे हथियारों को कई जगहों पर छिपाया जा सकता है. इन्हें तट के किनारे, द्वीपों पर या अंदरूनी इलाकों में सुरक्षित रखा जा सकता है. जानकार बताते हैं कि इन मिसाइल बैटरियों को ढूंढना और नष्ट करना बेहद मुश्किल काम है क्योंकि ये आसानी से अपनी जगह बदल लेते हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने कमर्शियल टैंकरों के लिए नेवल एस्कॉर्ट का सुझाव दिया है, लेकिन यह कोई साधारण ऑपरेशन नहीं होगा. इसमें टैंकरों के साथ युद्धपोत, माइन्सवीपर्स, हवाई कवर और तटीय मिसाइल बैटरियों पर हमले जैसी क्षमताओं की जरूरत पड़ेगी.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की ढुलाई होती है. फोटो- रायटर

माइन्स सबसे बड़ा खतरा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सबसे बड़ी चुनौती नेवल माइन्स है. अगर पानी में माइन्स होने का खतरा होगा तो कोई भी नौसेना अपने बड़े युद्धपोतों को वहां भेजने का जोखिम नहीं लेगी. माइन्स क्लियर करने में हफ्तों लग सकते हैं और यह ऑपरेशन खुद जोखिम भरा है. जानकार बताते हैं कि डिस्ट्रॉयर जैसे जहाजों की डिफेंस सिस्टम स्ट्रेट जैसी संकरी जगहों के लिए नहीं बनी हैं. इस स्ट्रेट के हर हिस्सा बेहद संवेदनशील है.

जमीन पर जोखिम

अमेरिका अपने मरीन्स को इलाके में भेज रहा है. इनको द्वीपों पर रेड या एयर डिफेंस सिस्टम लगाने के लिए तैनात किया जा सकता है, लेकिन ईरान की बड़ी जमीनी सेना के कारण मुख्य भूमि पर घुसपैठ जोखिम भरी होगी. अगर अमेरिकी सैनिक मारे गए या पकड़े गए तो स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी. यहां तक कि बड़े सैन्य ऑपरेशन के बाद भी एक भी सफल हमला शिपिंग कंपनियों और इंश्योरेंस मार्केट का भरोसा तोड़ सकता है. फिलहाल सैकड़ों टैंकर पर्सियन गल्फ में खड़े हैं और आगे बढ़ने से हिचकिचा रहे हैं. पहले फरवरी में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से रोजाना 80 ऑयल और गैस टैंकर गुजरते थे, लेकिन अब ट्रैफिक लगभग ठप है. नेवल एस्कॉर्ट सिर्फ कुछ जहाजों को एक साथ सुरक्षा दे सकता है. पूरी क्षमता बहाल करने के लिए शिप ओनर्स और इंश्योरेंस कंपनियों को यकीन दिलाना होगा कि जोखिम काफी कम हो गया है.

अमेरिकी सेना पर भी बोझ बनेगा

यह एयर कैंपेन और दूसरे मोर्चों से संसाधन खींच सकता है. ईरान ने पर्सियन गल्फ और गल्फ ऑफ ओमान दोनों जगह हमले किए हैं, इसलिए स्ट्रेट पार करने के बाद भी सुरक्षा की जरूरत रहेगी.

अंतिम समाधान डिप्लोमेसी

एमआईटी की कैटलिन तालमैज कहती हैं कि जब तक ईरान की तरफ से धमकी बनी रहेगी, ट्रैफिक पर असर रहेगा. चीजें पूरी तरह सामान्य होने के लिए डिप्लोमैटिक और पॉलिटिकल समाधान जरूरी है. ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर के साथ संयुक्त नियंत्रण का भी जिक्र किया, लेकिन ज्यादातर विकल्प सैन्य ही दिख रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ईरान के साथ किसी समझौते के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखना लगभग नामुमकिन है. दुनिया को तेल की कीमतों, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता से निपटने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ एक जलडमरूमध्य नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का गला है और इसे खोलना जितना आसान लगता है, उतना है नहीं



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