नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर दस्ताने पहनकर स्टंप्स के पीछे 90 ओवर तक झुकना और फिर भारी भरकम पैड पहनकर क्रीज पर रन बरसाना, किसी भी खिलाड़ी के लिए शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति की चरम परीक्षा होती है. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में कुछ ऐसे विकेटकीपर बल्लेबाज हुए हैं जिन्होंने न केवल विकेट के पीछे कमाल किया, बल्कि जब उनके हाथ में बल्ला आया, तो उन्होंने विपक्षी टीम के गेंदबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. दुनिया के इन पांच दिग्गज विकेटकीपरों की उन ऐतिहासिक पारियों के सफर पर चलते हैं, जिन्होंने रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया.
कहानी की शुरुआत होती है साल 2000 के नवंबर महीने से. जब जिम्बाब्वे की टीम भारत के दौरे पर थी. नागपुर के मैदान पर बाएं हाथ के दिग्गज बल्लेबाज एंडी फ्लावर (Andy Flower) ने एक ऐसी पारी खेली जो आज भी रिकॉर्ड बुक के पेज पर टॉप पर है. फ्लावर ने नाबाद 232 रन बनाए. इस मैराथन पारी की सबसे खास बात उनका धैर्य था.उन्होंने 544 मिनट तक क्रीज पर खूंटा गाड़ दिया और 444 गेंदों का सामना किया. भारतीय स्पिनरों के सामने उनका फुटवर्क और स्वीप शॉट खेलने की कला बेमिसाल थी. उन्होंने अपनी पारी में 30 चौके लगाए, जो यह बताता है कि उन्होंने बाउंड्री से ज्यादा दौड़कर रन बनाने और क्रीज पर टिकने को प्राथमिकता दी.
टेस्ट मैच की एक पारी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दुनिया के 5 बल्लेबाज.
Turning Point: पांचवीं गेंद पर पलट गया मैच… गेंदबाज नहीं, विकेटकीपर ने किया चमत्कार, फूट-फूटकर रोने लगा बल्लेबाज
लाहौर में संगाकारा ने मनवाया अपना लोहा
एंडी फ्लावर के रिकॉर्ड के ठीक दो साल बाद, 2002 में श्रीलंका के कुमार संगकारा ने पाकिस्तान के खिलाफ लाहौर में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया. हालांकि फ्लावर और संगकारा के रनों में सिर्फ 2 रन का फासला (230 रन) था, लेकिन दोनों के खेलने के अंदाज में जमीन-आसमान का अंतर था. जहां फ्लावर ने संयम दिखाया, वहीं संगकारा ने केवल 327 गेंदों में 230 रन ठोक दिए. उनका स्ट्राइक रेट 70.33 का था, जो उस दौर के टेस्ट क्रिकेट के हिसाब से काफी आक्रामक माना जाता था.33 चौकों से सजी यह पारी एक विकेटकीपर की क्लासिक बल्लेबाजी का बेहतरीन नमूना थी.
चेन्नई की चिलचिलाती धूप और ‘कैप्टन कूल’ का कहर
भारतीय फैंस के लिए 22 फरवरी 2013 की तारीख कभी न भूलने वाली है। चेन्नई की गर्मी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ महेंद्र सिंह धोनी ने जो किया, वह किसी बवंडर से कम नहीं था. धोनी ने मात्र 265 गेंदों पर 224 रन बनाए. तुलनात्मक रूप से देखें तो धोनी की यह पारी इस सूची में सबसे तेज थी (स्ट्राइक रेट 84.52). जहां मुशफिकुर रहीम या एंडी फ्लावर ने 500 से ज्यादा मिनट लिए, वहीं धोनी ने मात्र 365 मिनट (लगभग 6 घंटे) में कंगारू गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं। 24 चौके और 6 गगनचुंबी छक्कों के साथ धोनी ने यह साबित कर दिया कि मॉडर्न क्रिकेट में विकेटकीपर मैच का रुख पलक झपकते ही बदल सकता है.
मीरपुर का मैराथन मैन मुशफिकुर रहीम
बांग्लादेश के मुशफिकुर रहीम ने 2018 में जिम्बाब्वे के खिलाफ मीरपुर में अपनी एकाग्रता का परिचय दिया. रहीम ने नाबाद 219 रन बनाने के लिए रिकॉर्ड 589 मिनट तक बल्लेबाजी की. यह इस लिस्ट में किसी भी खिलाड़ी द्वारा क्रीज पर बिताया गया सबसे लंबा समय है. रहीम की पारी एक ‘एंकर’ की भूमिका वाली थी, जहां उन्होंने 421 गेंदों का सामना किया. धोनी की आक्रामकता के विपरीत, रहीम ने जोखिम कम लिया और केवल 18 चौके लगाए, जिससे उनकी पारी की गहराई और जिम्मेदारी का पता चलता है.
वो दौर जब संयम ही हथियार था
इन मॉर्डन सितारों से बहुत पहले, 1980 में पाकिस्तान के तस्लीम आरिफ ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फैसलाबाद में नाबाद 210 रन बनाकर दुनिया को चौंका दिया था. उस दौर में जब हेलमेट और आधुनिक सुरक्षा उपकरण कम थे. तस्लीम ने 435 मिनट तक बल्लेबाजी की. उनकी पारी में एक भी छक्के नहीं थे, जो दर्शाता है कि वह पूरी तरह से जमीनी शॉट्स और तकनीकी मजबूती पर निर्भर थे.
रनों के मामले में बेताज बादशाह हैं फ्लावर
अगर हम इन पांचों पारियों की तुलना करें, तो एंडी फ्लावर आज भी रनों के मामले में बेताज बादशाह हैं. कुमार संगकारा ने जहां तकनीक और गति का संतुलन दिखाया, वहीं एमएस धोनी ने सबसे कम समय में सबसे ज्यादा तबाही मचाई. मुशफिकुर रहीम ने धैर्य की नई परिभाषा लिखी, तो तस्लीम आरिफ ने उस दौर में रास्ता दिखाया जब विकेटकीपरों को मुख्य रूप से केवल दस्ताने पहनने वाला खिलाड़ी माना जाता था. इन पांचों खिलाड़ियों ने कुल मिलाकर 1,115 रन अपनी इन पांच पारियों में जोड़े हैं. यह पारियां सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह उस जज्बे की कहानी हैं जो एक विकेटकीपर को 100 ओवर की कीपिंग के बाद भी घंटों तक बल्लेबाजी करने की शक्ति देती है.


