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Agriculture Tips: वर्मी कंपोस्ट एक प्राकृतिक और पोषक तत्वों से भरपूर खाद है, जिसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है. किचन वेस्ट और केंचुओं की मदद से तैयार यह खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में बेहद उपयोगी होती है. यह प्रक्रिया कम खर्चीली और पर्यावरण के अनुकूल है. सही तरीके से वर्मी कंपोस्ट बनाने से पौधों की वृद्धि तेज होती है और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है. यह घरेलू बागवानी और खेती के लिए एक बेहतरीन विकल्प है.
घर बैठे बनाएं सोना जैसी खाद! इस आसान तरीके से तैयार करें वर्मी कंपोस्ट
भीलवाड़ा – भीलवाड़ा जिले में खेती-बाड़ी और बागवानी करने वाले किसानों के लिए वर्मी कम्पोस्ट यानी केंचुआ खाद अब बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि यह पूरी तरह जैविक होती है और फसल की उत्पादन क्षमता को बढ़ाती है. महंगे रासायनिक उर्वरकों के बीच यह किसानों के लिए सस्ता, आसान और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रही है. भीलवाड़ा के किसानों को घर पर ही यह खाद तैयार करने का सरल तरीका जिसे अपनाकर किसान बिना ज्यादा खर्च के बेहतरीन जैविक खाद बना सकते हैं.
भीलवाड़ा जिले में कई किसान इस जैविक खाद से अपनी फसलों की पैदावार बढ़ा रहे हैं. वर्मी कम्पोस्ट न सिर्फ मिट्टी की उर्वरता सुधारता है, बल्कि फसलों को अधिक हरा-भरा और रोगमुक्त बनाता है, जिससे किसानों का खर्च भी कम होता है और उत्पादन भी बढ़ता है.
हल्का-हल्का पानी डालकर नम रखा जाता
कृषि पर्यवेक्षक मजोड मल गुर्जर बताते हैं कि सबसे पहले किसानों को अपने खेत या घर के पास एक छायादार जगह का चुनाव करना चाहिए. यहां एक गड्ढा या बेड तैयार किया जाता है. गड्ढे में पानी निकासी की व्यवस्था जरूर हो, ताकि पानी जमा न हो. इसके बाद नीचे सूखी पत्तियों, भूसे या पुराने कागज की परत बिछाई जाती है. इसी परत के ऊपर गोबर और घर के रसोई कचरे जैसे सब्जियों के छिलके, खराब फल, चायपत्ती आदि डाले जाते हैं. इन परतों को हल्का-हल्का पानी डालकर नम रखा जाता है, लेकिन पानी इतना भी नहीं डालना चाहिए कि वह कीचड़ बन जाए.
उन्होंने बताया कि यदि किसान वर्मी कंपोस्ट को बेड में तैयार करना चाहें तो बेड का साइज 2 मीटर लंबा, 1 मीटर चौड़ा और 1 फुट गहरा होना चाहिए. बेड तैयार होने के बाद इसमें ताजा गोबर डाला जाता है और हल्का पानी छिड़ककर 24 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है, ताकि गोबर ठंडा हो जाए. गोबर सामान्य तापमान में आने के बाद इसमें 2 किलो लाल केंचुआ (Eisenia fetida) डाले जाते हैं. ये केंचुए जैविक कचरे को खाकर उसे उच्च गुणवत्ता की खाद में बदल देते हैं.
खुद का प्लांट लगाने में परेशानी नहीं आएगी
वर्मी कम्पोस्ट बनने में लगभग 60 से 65 दिन का समय लगता है. इस दौरान तापमान का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. केंचुए 5°C से कम और 40-45°C से ज्यादा तापमान में जीवित नहीं रह पाते. भीलवाड़ा की गर्मी को देखते हुए ग्रीन नेट, जूट की बोरी या घास से ढककर तापमान नियंत्रित करना जरूरी है. सुबह-शाम हल्का पानी छिड़काव करना भी फायदे मंद रहता है. वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने की ट्रेनिंग निःशुल्क दी जाती है. यहां किसानों को पूरा तरीका समझाया जाता है, हालांकि केंचुए वहां उपलब्ध नहीं कराए जाते. उनका कहना है कि जो किसान पहली बार वर्मी कम्पोस्ट बनाना चाहते हैं, उन्हें किसी पहले से चल रहे प्लांट को जरूर देखना चाहिए. इससे प्रक्रिया समझने में आसानी होगी और खुद का प्लांट लगाने में परेशानी नहीं आएगी.
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