Prasanta phukan On Dibrugarh: डिब्रूगढ़ असम में हमेशा से एक अहम सीट रही है, कांग्रेस के लिए यह सीट लंबे समय तक एक तरह से गढ़ रही है, लेकिन इस बार यहां जो कांग्रेस ने किया है, उसने सब हैरान हो गए. कांग्रेस ने अपने ही पुराने गढ़ में अपना उम्मीदवार उतारने के बजाय असम जातीय परिषद (AJP) को समर्थन देने का फैसला किया है. इससे बीजेपी के उम्मीदवार और मौजूदा मंत्री प्रशांत फुकन की राह और आसान होती दिख रही है, जो लगातार पांचवीं जीत की ओर बढ़ रहे हैं. सवाल उठ रहा है. क्या कांग्रेस सच में अपना गढ़ बचाने की लड़ाई छोड़ चुकी है? समझते हैं पूरी बात.
डिब्रूगढ़ कभी था कांग्रेस का किला, अब बीजेपी ने लिया हथिया
डिब्रूगढ़ अब सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर में बदलते राजनीतिक समीकरणों का बड़ा प्रतीक बन चुका है. यह वही डिब्रूगढ़ है, जहां कभी कांग्रेस की पकड़ इतनी मजबूत थी कि बीजेपी का नाम तक मुश्किल से लिया जाता था. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. बीजेपी नेता और मौजूदा मंत्री प्रशांत फुकन यहां लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं. इस बार कांग्रेस ने तो उनके लिए खुद ही मैदान खुला छोड़ दिया है. कांग्रेस के इस कदम को कई तरह से देखा जा रहा है कुछ लोग इसे कांग्रेस की रणनीति मान रहे हैं, बल्कि कुछ लोग इसे मजबूरी मान रहे हैं.
डिब्रूगढ़ सीट पर कैंडिडेट घोषित करना ही भूल गई कांग्रेस?
नहीं, डिब्रूगढ़ सीट पर कांग्रेस कैंडिडेट घोषित करना नहीं भूली, बल्कि उतारा ही नहीं है. पार्टी ने AJP के उम्मीदवार मैनाक पात्रा को समर्थन दिया है, लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं में इस फैसले को लेकर असमंजस साफ दिख रहा है. उधर बीजेपी उम्मीदवार प्रशांत फुकन ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के पास अब उम्मीदवार तक नहीं बचे हैं, इसलिए उसे सीट “सरेंडर” करनी पड़ी. उनका कहना है कि कांग्रेस आज के समय में एक ऐसी पार्टी बन चुकी है, जो दिशा खो चुकी है.
कभी कांग्रेस की गढ़ थी डिब्रूगढ़ सीट, 2006 से बदली पूरी कहानी
डिब्रूगढ़ सीट पर कभी कांग्रेस की पकड़ बहुत मजबूत थी. डिब्रूगढ़ की राजनीति का टर्निंग पॉइंट 2006 रहा, जब बीजेपी के प्रशांत फुकन ने कांग्रेस के दिग्गज नेता को बेहद मामूली अंतर से हराया. इसके बाद हर चुनाव में बीजेपी की पकड़ मजबूत होती गई. 2011 में जीत का अंतर बढ़ा, 2016 में और ज्यादा हुआ और 2021 में तो बीजेपी ने बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की. अब 2026 में फुकन पांचवीं जीत के मिशन पर हैं और हालात उनके पक्ष में नजर आ रहे हैं.
बीजेपी बनाम AJP, असली मुकाबला यही
बीजेपी के प्रशांत फुकन, AJP के मैनाक पात्रा और विकास इंडिया पार्टी के कमल हजारिका इस सीट पर मैदान में हैं. लेकिन असली मुकाबला बीजेपी और AJP के बीच ही माना जा रहा है. कांग्रेस के मैदान से हटने के बाद AJP को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है, लेकिन बीजेपी का मजबूत संगठन और वोट बैंक मुकाबले को एकतरफा भी बना सकता है.’
कॉर्पोरेट हाउस बनाम ‘मालकिन’ की लड़ाई’
उधर मीडिया से बातचीत में बीजेपी के उम्मीदवार प्रशांत फुकन ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी का सिस्टम एक कॉर्पोरेट हाउस की तरह चलता है, जहां हर चीज प्लानिंग के साथ होती है. इसके उलट उन्होंने कांग्रेस को “मालकिन सिस्टम” वाली पार्टी बताया, जहां फैसले कुछ लोगों के हाथ में सीमित रहते हैं. उनका कहना है कि यही वजह है कि बीजेपी लगातार मजबूत हो रही है और कांग्रेस लगातार कमजोर.





