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भारतीय सेना ने युद्ध के मैदान में अपनी ताकत कई गुना बढ़ाते हुए आर्मर्ड रेजीमेंटों में ‘शौर्य ड्रोन स्क्वाड्रन’ की तैनाती शुरू कर दी है. अब टैंक कमांडरों को हवाई हमले के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा; वे खुद अत्याधुनिक ड्रोन्स की मदद से चंद सेकंड में दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकेंगे.
भारत के आर्मड रेजिमेंट को ड्रोन से लैस किया गया.
भारतीय सेना ने युद्ध के मैदान में अपनी मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाते हुए एक बेहद आक्रामक और आधुनिक रणनीति का आगाज किया है. सेना ने अपने आर्मर्ड यानी टैंक रेजीमेंटों के भीतर ‘शौर्य ड्रोन स्क्वाड्रन’ को तैनात करना शुरू कर दिया है. इस घातक स्क्वाड्रन का मुख्य उद्देश्य टैंक कमांडरों को रियल-टाइम निगरानी और सटीक हवाई हमले की ताकत देना है. उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में हाल ही में हुए ‘अभ्यास अमोघ ज्वाला’ के दौरान सुदर्शन चक्र कोर के तहत व्हाइट टाइगर डिवीजन ने इस पहली स्क्वाड्रन का बेहद सफल और अचूक परीक्षण भी कर लिया है.
इस नई और अचूक शौर्य स्क्वाड्रन में 20 से 30 ऐसे चुनिंदा और खूंखार जवान शामिल हैं, जिन्हें खासतौर पर ड्रोन और एंटी-ड्रोन ऑपरेशंस में कड़ी ट्रेनिंग दी गई है. ये जांबाज मोर्चे पर सर्विलांस ड्रोन, अटैक ड्रोन, स्वार्म ड्रोन, फर्स्ट-पर्सन व्यू (एफपीवी) ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन का एक जानलेवा कॉम्बिनेशन संचालित करते हैं. ये एफपीवी ड्रोन इतने ताकतवर और सटीक हैं कि वे सीधे दुश्मन के मजबूत बख्तरबंद वाहनों और उनके लॉजिस्टिक ठिकानों को पल भर में भेदकर खाक कर सकते हैं.
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