चीन ने ढूंढ़ लिया राफेल-तेजस का काल, 500 KM दूर से ही करेगा काम तमाम – china j10c 4 plus generation fighter jet kj500 flying radar system rafale tejas

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चीन ने ढूंढ़ लिया राफेल-तेजस जेट का काल, 500 KM दूर से ही कर देगा काम तमाम

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Rafale vs China J-10C Jet: पहले रूस-यूक्रेन और अब ईरान जंग ने पूरी दुनिया की शक्‍ल-सूरत को बदलकर रख दिया है. अब हर बड़ा और छोटा देश अपनी हैसियत के अनुसार डिफेंस स्‍ट्रक्‍चर को अपग्रेड करने में जुटा है. इसके लिए हजारों-लाखों करोड़ रुपये झोंके जा रहे हैं. इसी क्रम में भारत ने फ्रांस के साथ 3.25 लाख करोड़ रुपये का करार किया है. इसके तहत 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने की प्‍लानिंग है. भारत के इस कदम से इस्‍लामाबाद से लेकर बीजिंग तक में खलबली मची हुई है. खासकर चीन इस डील के ऐलान के बाद से पैनिक मोड में है. उसका असर अब स्‍पष्‍ट तौर पर दिखने लगा है.

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चीन ने अपने J-10C फाइटर जेट में KJ-500 रडार सिस्‍टम को इंटीग्रेट किया है. दावा किया जा रहा है कि यह पांचवीं पीढ़ी के F-35 स्‍टील्‍थ फाइटर जेट जैसे लड़ाकू विमान को भी इंटरसेप्‍ट कर सकता है. इसका मतलब यह हुआ कि इसके जरिये राफेल फाइटर जेट को भी ट्रैक और इंटरसेप्‍ट किया जा सकता है. (फाइल फोटो/Reuters)

Rafale vs China J-10C Jet: भारत की सीमा पर एक तरफ चीन तो दूसरी तरफ पाकिस्‍तान जैसा खतरनाक और अशांति फैलाने वाला देश स्थित है. ऐसे में नई दिल्‍ली के लिए जरूरी है कि वह अपनी सैन्‍य क्षमता को 21वीं सदी के खतरों के अनुरूप डेवलप करे. भारत के नीति-निर्माता भी इस बात को बखूबी समझते हैं. यही वजह है कि डिफेंस सेक्‍टर पर काफी फोकस किया जा रहा है. आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को ताकतवर और सुपरपावर बनाने के लिए लगातार कई प्रोजेक्‍ट को जमीन पर उतारा जा रहा है. अटैकिंग के साथ ही डिफेंसिव सेगमेंट में भी हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है. नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करने और नेशनल व इंटरनेशनल एयरस्‍पेस को अभेद्य किला बनाने के लिए ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम इसका अ‍हम हिस्‍सा है. इस प्रोजेक्‍ट को साल 2035 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रख गया है. दूसरी तरफ, एयर फायर-पावर को और मारक बनाने के लिए भारत सरकार ने फ्रांस से 114 राफेल F-4 फाइटर जेट खरीदने के प्रस्‍ताव को हरी झंडी दे दी है. अब पड़ोसी देश चीन से एक बड़ी और बेहद महत्‍वपूर्ण खबर सामने आई है. चीन ने अपने J-10C फाइटर जेट में ऐसा रडार सिस्‍टम इंटीग्रेट किया है, जिससे 5th जेनरेशन फाइटर जेट को भी ट्रैक कर उसे इंटरसेप्‍ट किया जा सकता है. यदि चीन के दावे पर यकीन किया जाए तो 4th जेन फाइटर जेट राफेल और तेजस जैसे लड़ाकू विमान को सैकड़ों किलोमीटर पहले ही ट्रैक करना संभव हो जाएगा. इसके साथ ही युद्ध जैसे हालात में राफेल को इंटरसेप्‍ट कर उसे आसमान में ही धुआं-धुआं किया जा सकता है.

दरअसल, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLA Air Force) ने अपने लाइट मल्‍टीरोल फाइटर जेट Chengdu J-10C को हाई-इंटेंसिटी कॉम्बैट ड्रिल्स में एडवांस नेटवर्क सेंट्रिक वॉर कैपेबिलिटी के साथ परखते हुए एक अहम सैन्य अभ्यास किया है. इन अभ्यासों में J-10C को अत्याधुनिक एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्लेटफॉर्म KJ-500 के साथ इंटीग्रेट कर ऑपरेट किया गया. KJ-500 को ‘फ्लाइंग रडार भी कहा जाता है. इन मिलिट्री एक्‍सरसाइज का उद्देश्य जटिल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक माहौल में लड़ाकू विमानों की समन्वित क्षमता को जांचना था, जहां हवा, जमीन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एक साथ काम करती हैं. चीनी सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, यह अभ्यास पारंपरिक प्लेटफॉर्म बेस्‍ड युद्ध से हटकर ‘सिस्टम-ऑफ-सिस्टम्स’ युद्ध की दिशा में PLA की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है. डिफेंस एक्‍सपर्ट झांग जुंशे (Zhang Junshe) ने चीनी सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले दो दशकों में J-10C प्लेटफॉर्म का विकास एक स्वतंत्र लड़ाकू विमान से एक पूर्ण नेटवर्क सेंट्रिक युद्ध प्रणाली के हिस्से के रूप में हुआ है.

राफेल के F-4 वर्जन में भी अल्‍ट्रा मॉडर्न रडार सिस्‍टम इंटीग्रेट किया गया है. हालांकि, चीन के KJ-500 को बेहद शक्तिशाली रडार माना जाता है. (फाइल फोटो/Reuters)

इस वजह से खास है J-10C जेट

जे-10सी, जो 2018 से सेवा में है, एक सिंगल-इंजन ‘4+ जनरेशन’ फाइटर है. इसका रडार आकार और क्षमता भारी लड़ाकू विमानों जैसे Shenyang J-16 और Chengdu J-20 की तुलना में सीमित है. ऐसे में AEW&C प्लेटफॉर्म और ग्राउंड-बेस्ड रडार से मिलने वाला डेटा इसकी लड़ाकू क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है. KJ-500 जैसे विमान उच्च ऊंचाई (High Altitude) पर उड़ते हुए सैकड़ों किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमान और मिसाइलों का पता लगा सकते हैं. ये रीयल टाइम डेटा लिंक के जरिए फाइटर पायलट को टार्गेट की स्थिति, स्‍पीड और ऊंचाई की जानकारी देते हैं, जिससे J-10C अपने रडार को बंद या कम उत्सर्जन मोड में रखकर भी इंटरसेप्शन कर सकता है.

J-10C फाइटर जेट इस वजह से बेहद खास

  • 4+ जेनरेशन का एडवांस्ड फाइटर: J-10C चीन का उन्नत ‘4+ जेनरेशन’ मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे पुराने J-10 प्लेटफॉर्म का अपग्रेडेड वर्जन माना जाता है. यह 2018 से सेवा में है और आधुनिक युद्ध की जरूरतों के मुताबिक डिजाइन किया गया है.
  • लाइटवेट लेकिन हाई-परफॉर्मेंस प्लेटफॉर्म: यह एक सिंगल इंजन, हल्का लड़ाकू विमान है, जो कम लागत और आसान मेंटेनेंस के साथ बेहतर कॉम्बैट क्षमता प्रदान करता है.
  • नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर की क्षमता: J-10C अब अकेले नहीं बल्कि सिस्टम-ऑफ-सिस्टम्स वॉरफेयर का हिस्सा बन चुका है, यानी यह अन्य एयरक्राफ्ट, रडार और डिफेंस सिस्टम्स के साथ मिलकर काम करता है.
  • KJ-500 फ्लाइंग रडार के साथ इंटीग्रेशन: यह फाइटर KJ-500 AEW&C (Airborne Early Warning & Control) विमान के साथ मिलकर ऑपरेशन करता है, जिससे इसे सैकड़ों किलोमीटर दूर तक दुश्मन की जानकारी मिलती है.
  • लो-इमिशन ऑपरेशन (स्‍टील्‍थ टैक्टिक्स): KJ-500 से डेटा मिलने के कारण J-10C अपने रडार को बंद या लो-इमिशन मोड में रख सकता है, जिससे दुश्मन के लिए इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है.
  • एडवांस्ड एयर-टू-एयर कॉम्बैट क्षमता: यह जेट लंबी दूरी (BVR), मिड-रेंज और क्लोज-रेंज तीनों तरह की हवाई लड़ाई में सक्षम है और जरूरत के अनुसार तुरंत मोड बदल सकता है.
  • हाई-G मैन्युवरिंग और डॉगफाइटिंग स्किल: J-10C तेजी से दिशा बदलने और हाई-G मैन्युवर करने में सक्षम है, जो डॉगफाइट में इसे मजबूत बनाता है.
  • स्टील्थ टारगेट के खिलाफ बढ़ी क्षमता: KJ-500 के साथ मिलकर यह स्टील्थ फाइटर्स जैसे J-20 या F-35 जैसे टार्गेट को भी ट्रैक और एंगेज करने की क्षमता हासिल करता है.
  • ग्राउंड डिफेंस सिस्टम्स के साथ डेटा शेयरिंग: यह जेट ग्राउंड-बेस्ड रडार और एयर डिफेंस सिस्टम्स के साथ रियल टाइम डेटा शेयर कर सकता है, जिससे इंटरसेप्शन और डिफेंस दोनों मजबूत होते हैं.
  • कॉस्ट इफेक्टिव और एक्सपोर्ट फ्रेंडली फाइटर: J-10C को भारी और महंगे फाइटर्स (जैसे J-16, J-20) के मुकाबले सस्ता और कम मेंटेनेंस वाला विकल्प माना जाता है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में आकर्षक बनता है.

स्टील्थ टारगेट के खिलाफ भी कारगर

‘मिलिट्री वॉच’ की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 में एक अभ्यास के दौरान J-10C फाइटर जेट ने KJ-500 की मदद से स्टील्थ क्षमताओं वाले टार्गेट को ट्रैक और एंगेज करने की क्षमता दिखाई. एक पायलट को सिमुलेटेड एयर-टू-एयर कॉम्बैट में J-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर को मार गिराने का श्रेय दिया गया. इस तरह KJ-500 रडार से लैस J-10C फाइटर जेट अमेरिका के 5th जेनरेशन जेट F-35 को भी इंटरसेप्‍ट कर उसे तबाह कर सकता है. बताया गया है कि पायलट ने पहले मिसाइल लॉन्च का सिमुलेशन किया, लेकिन लक्ष्य के रडार से गायब हो जाने पर KJ-500 रडार सिस्‍टम से सहायता मांगी, जिसके बाद लक्ष्य पर सफलतापूर्वक प्रहार संभव हुआ. हालांकि, इस दावे की वास्तविकता पर सवाल भी उठ रहे हैं. रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि KJ-500 जैसे बड़े और कम गतिशील विमान वास्तविक युद्ध में खुद ही टार्गेट बन सकते हैं.

मार्च 2026 के ताजा अभ्यास

मार्च 2026 के मध्य में हुए ताजा अभ्यासों में J-10C विमानों ने मल्टी-लेयर कॉम्बैट प्रोफाइल का प्रदर्शन किया. इसमें बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) से लेकर मिड-रेंज और क्लोज-रेंज डॉगफाइट तक के सभी चरण शामिल थे. पायलट्स ने लगातार आक्रामक और रक्षात्मक मोड के बीच बदलाव करते हुए हाई-G मैन्यूवरिंग का प्रदर्शन किया. इसके साथ ही ग्राउंड-बेस्ड एयर डिफेंस सिस्टम्स के साथ भी डेटा शेयरिंग और कोऑर्डिनेशन का परीक्षण किया गया. विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की इंटीग्रेशन से न केवल फाइटर विमानों की क्षमता बढ़ती है, बल्कि जमीन आधारित एयर डिफेंस नेटवर्क भी अधिक प्रभावी हो जाता है. झांग जुंशे की मानें तो जमीन पर तैनात रडार कम ऊंचाई पर उड़ रहे लक्ष्यों का पता लगाकर फाइटर जेट्स को इंटरसेप्शन के लिए निर्देशित कर सकते हैं. वहीं J-10C भी अपने सेंसर डेटा को ग्राउंड सिस्टम्स के साथ साझा कर सकता है. यह दो तरफा डेटा प्रवाह एक कॉम्बैट नेटवर्क तैयार करता है, जिससे दुश्मन के खिलाफ रिएक्‍शन टाइम कम होता है और सटीकता बढ़ती है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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