भारत की समृद्ध जैव विविधता यानी बायो-डाइवर्सिटी में एक और अध्याय जुड़ गया है. देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने देश की सीमाओं के भीतर सांपों की दो ऐसी प्रजातियों की खोज की है जिन्हें पहले कभी भारत में नहीं देखा गया था. किलबैक परिवार के ये दुर्लभ सांप अब तक केवल पड़ोसी देश म्यांमार तक ही सीमित माने जाते थे. वैज्ञानिकों ने मिजोरम के न्गेंगपुई वन्यजीव अभयारण्य में रखाइन किलबैक और अरुणाचल प्रदेश के नमदाफा नेशनल पार्क व कमलांग टाइगर रिजर्व में कचिन हिल्स किलबैक की उपस्थिति दर्ज की है. यह खोज भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच इकोलॉजिकल निरंतरता को दर्शाती है.
क्या है किलबैक सांप की खासियत?
किलबैक सांप आमतौर पर जहरीले नहीं होते हैं और अक्सर जल निकायों जैसे कि धाराओं और वेटलैंड्स के पास पाए जाते हैं. इन्हें स्वस्थ इकोसिस्टम का सूचक माना जाता है.
· खुरदरी त्वचा: इनकी सबसे बड़ी पहचान इनकी कील्ड स्केल यानी परतें हैं. हर स्केल के बीच में एक उभरी हुई लकीर होती है जिससे इनकी त्वचा छूने में खुरदरी और बनावट वाली महसूस होती है.
· बेहतरीन छलावा: चिकनी खाल वाले सांपों के विपरीत किलबैक की खुरदरी त्वचा रौशनी के रिफ्लेक्शन को कम करती है. इससे वे मिट्टी, पत्तों के ढेर और गीली वनस्पतियों में आसानी से घुल-मिल जाते हैं.
खोज का महत्व और संरक्षण
अरुणाचल का नमदाफा नेशनल पार्क अपनी ऊंचाई और जलवायु विविधता के कारण भारत के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज पूर्वोत्तर भारत के दुर्गम इलाकों में और अधिक शोध की आवश्यकता को रेखांकित करती है जिसे बायोलॉजिकल ट्रेजर ट्रोव (जैविक खजाने का भंडार) कहा जाता है. इन प्रजातियों की पहचान से भविष्य में लुप्तप्राय पारिस्थितिक तंत्र को बचाने के लिए बेहतर रणनीति बनाने में मदद मिलेगी.
सवाल-जवाब
भारत में कौन सी दो नई सांप प्रजातियों की खोज की गई है?
वैज्ञानिकों ने रखाइन किलबैक और कचिन हिल्स किलबैक की खोज की है जो पहले केवल म्यांमार में पाए जाते थे.
किलबैक सांपों की त्वचा अन्य सांपों से अलग क्यों होती है?
किलबैक सांपों के स्केल (परतों) के बीच में एक उभरी हुई लकीर (Ridge) होती है जो उन्हें खुरदरी बनावट देती है. यह उन्हें छलावरण में मदद करती है.
यह खोज किन क्षेत्रों में की गई है?
ये प्रजातियां मिजोरम के न्ेंगपुई वन्यजीव अभयारण्य और अरुणाचल प्रदेश के नमदाफा नेशनल पार्क व कमलांग टाइगर रिजर्व में पाई गई हैं.





