Last Updated:
Noida International Airport Security: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भव्य उद्घाटन 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगा. जेवर में बना यह एयरपोर्ट सिर्फ अपनी भव्यता के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा इंतजामों के लिए भी दुनिया भर में चर्चा बटोर रहा है. यहां केवल आधुनिक हथियार ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स का भी तगड़ा कॉम्बिनेशन देखने को मिलेगा. नोएडा एयरपोर्ट की सुरक्षा रणनीति को कई लेयर्स में बांटा गया है, ताकि जमीन से लेकर आसमान तक हर इंच की निगरानी हो सके. आइए जानते हैं कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का सिक्योरिटी प्लान क्या है. (Photos : PTI)
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खूबी इसका 5-स्तरीय सुरक्षा घेरा (Five-Tier Security Ring) है. एयरपोर्ट की बाहरी सीमा पर ‘स्मार्ट पेरिमीटर सिक्योरिटी’ सिस्टम लगाया गया है. इसमें हाई-टेक फेंसिंग के साथ ग्राउंड सेंसर और मोशन डिटेक्टर्स का इस्तेमाल किया गया है.

अगर कोई दीवार फांदने या बाउंड्री के पास संदिग्ध हरकत करने की कोशिश करता है, तो कंट्रोल रूम में तुरंत अलार्म बज जाएगा. इसके साथ ही एयरपोर्ट के अंदर और बाहर हजारों एआई पावर्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. ये कैमरे न सिर्फ चेहरे की पहचान (Facial Recognition) कर सकते हैं, बल्कि लोगों के व्यवहार का एनालिसिस भी करेंगे. अगर कोई व्यक्ति संदिग्ध तरीके से घूमता पाया जाता है, तो सिस्टम खुद ही सुरक्षाकर्मियों को अलर्ट भेज देगा.

आज के दौर में ड्रोन एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बनकर उभरे हैं. जेवर एयरपोर्ट को इस खतरे से बचाने के लिए एडवांस एंटी-ड्रोन सिस्टम से लैस किया गया है. यह सिस्टम आसपास के एयरस्पेस की 24 घंटे मॉनिटरिंग करेगा. अगर कोई अनधिकृत ड्रोन एयरपोर्ट के दायरे में आता है, तो यह तकनीक उसे हवा में ही जाम (Jam) या न्यूट्रलाइज कर देगी.
Add News18 as
Preferred Source on Google

उद्घाटन के मौके पर पूरे क्षेत्र को ‘नो फ्लाई जोन’ घोषित किया गया है. सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के 5000 से ज्यादा जवान तैनात किए गए हैं. इसके अलावा सीआईएसएफ (CISF) के 1047 जवानों की टुकड़ी एयरपोर्ट की आंतरिक सुरक्षा की कमान संभालेगी. इसमें एटीएस (ATS) और क्विक रिएक्शन टीम (QRT) के कमांडो भी शामिल रहेंगे, जो किसी भी इमरजेंसी में चंद मिनटों में एक्शन लेने के लिए तैयार हैं.

सुरक्षा सख्त होने का मतलब यह नहीं है कि यात्रियों को परेशानी होगी. नोएडा एयरपोर्ट पर ऐसी मशीनें लगाई जा रही हैं, जो चेक-इन प्रोसेस को तेज और सुरक्षित बनाएंगी. यहां 3डी एक्स-रे बैगेज स्कैनर और एक्सप्लोसिव डिटेक्शन सिस्टम (EDS) का इस्तेमाल होगा. इससे बैग बिना खोले ही उसके अंदर रखी संदिग्ध चीजों की पहचान हो जाएगी.

बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम से यात्रियों की पहचान की जाएगी, जिससे कागजी कार्रवाई और लंबी लाइनों से छुटकारा मिलेगा. जमीन पर सुरक्षा के लिए स्निफर डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ता लगातार पेट्रोलिंग कर रहा है. यमुना नदी के पास होने के कारण जलमार्ग पर रिवर पेट्रोलिंग की व्यवस्था भी की गई है, ताकि सुरक्षा में कोई कसर न रहे.

फिजिकल सुरक्षा के साथ-साथ एयरपोर्ट के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी फौलादी बनाया गया है. एयरपोर्ट के पूरे नेटवर्क को सुरक्षित करने के लिए एक मजबूत साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क तैयार किया गया है. यह सिस्टम डेटा चोरी, हैकिंग या किसी भी तरह के डिजिटल ब्रीच को रोकने में सक्षम है.

इमरजेंसी से निपटने के लिए फायर फाइटिंग यूनिट्स और मेडिकल रिस्पांस टीमें हर समय अलर्ट मोड पर रहेंगी. कुल मिलाकर, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को तकनीकी रूप से इतना एडवांस बनाया गया है कि यह भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है.




