पिता चराते हैं भैंस, बेटा ने कर दिया ऐसा काम कि अब गांव भर में हो रही चर्चा, खानदान के पहले टॉपर बने यश

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यश कुमार ने अपनी मेहनत और परिवार के सहयोग से इंटर में जिला टॉप कर इतिहास रच दिया. पूर्णिया के महीनाथपुर गांव के रहने वाले यश ने साबित कर दिया कि सच्ची मेहनत और लगन से कुछ भी असंभव नहीं है. उनके गुरुजन सतीश कुमार सिंह के मार्गदर्शन में यश ने यह उपलब्धि हासिल की. परिवार में खुशियों की लहर है.

विक्रम कुमार झा/पूर्णिया. आपने एक कहावत सुनी होगी कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती. अगर इंसान चाहे तो किसी भी चीज को करना आसान हो जाता है. बशर्ते उसकी सच्ची मेहनत और लगन पक्की होनी चाहिए. ऐसी ही कहानी पूर्णिया जिला के बॉर्डर समीप महीनाथपुर गांव के पिपराटोल के रहने वाले निवासी पिता राजेश कुमार यादव के पुत्र यश कुमार की है. जिन्होंने अपनी मेहनत और परिवार वालों के सहयोग और अपने गुरुजनों सतीश कुमार सिंह के मार्गदर्शन से इंटर में जिला टॉप कर अपने जिले के साथ खानदान का नाम रोशन किया. जिसके बाद उनके परिवार में खुशियों की लहर है.

दरअसल, बीते दिन इंटरमीडिएट साइंस रिजल्ट परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद छात्र और अभिभावक में भी काफी उत्साह देखने को मिला तो वही टॉपर रहे छात्र के घर में खुशियों की झड़ी लगी रही. लेकिन इसमें कई छात्र अमीर घर से ताल्लुक रखते हैं जबकि कई गरीब मजदूर परिवार से भी आते हैं. जिन्होंने गरीबों को कभी बाधा नहीं बनने दिया और अपने पिता की कड़ी मेहनत को देखा और सफलता पाई.

किसान है पिता
उनके घर वालों ने न्यूज 18 लोकल से बातचीत करते हुए बताया कि उनके पिता अनपढ़ होने के साथ मामूली से किसान के साथ भैंस पालते हैं और भैंस चराने खुद ही जाते हैं, जबकि उनकी मां सुनैना देवी हाउसवाइफ है. हालांकि, परिवार वालों ने बताया कि वह अपने बेटों की पढ़ाई के खातिर जी जान लगा देते हैं और किसी भी तरह खेती-बाड़ी कर जीवन यापन कर अपने बेटे को उच्च शिक्षा देने का प्रयास करते हैं.

स्टेट टॉप की थी उम्मीद
टॉपर यश कुमार ने न्यूज 18 लोकल से बातचीत करते हुए बताया कि वह पूर्णिया के लॉज में छात्रों के साथ पढ़ाई करते थे लेकिन सभी छात्र अपने तौर तरीके से पढ़ाई करते थे लेकिन उनका तरीका बिल्कुल और उनसे लग रहा है. हालांकि, उन्होंने कहा उनका पढ़ने का तरीका अलग था जिस कारण उन्हें परीक्षा देकर आने के बाद ही ऐसा लग रहा था कि उसे स्टेट टॉपर की रैंक मिलेगी, लेकिन उनकी थोड़ी छोटी सी भूल के कारण वह सिर्फ जिला टॉप कर पाए. वह कहते हैं वह पूरी तरह संतुष्ट है और आगे पढ़ाई कर रेलवे की नौकरी का सपना देख रहे हैं.

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Mohd Majid

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