ईरान जंग और होर्मुज के फेर में उलझी रही दुनिया, उधर भारत ने मार ली बाजी – tejas mk2 fighter jet 160 km Astra Mk1 240 km Astra Mk2 Missile integration

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Tejas Mk2 Fighter Jet: बीसवीं सदी में आर्मी यानी पैदल सेना की काफी अहमियत थी. 21वीं सदी में वॉर सिनेरियो यानी युद्ध की तस्‍वीर और रणनीति पूरी तरह से बदल चुकी है. अब मॉडर्न वेपन ने हालात को पूरी तरह से बदल दिया है. ड्रोन और AI ड्रिवन डिफेंस इक्विपमेंट ने बड़ी से बड़ी शक्तियों को भी अपनी स्‍ट्रैटजी बदलने पर मजबूर कर दिया है. रूस-यूक्रेन और ईरान जंग इसका ताजा उदाहरण हैं. इन दोनों युद्ध में पहले यूक्रेन और अब ईरान ने साबित कर दिया है कि सस्‍ता ड्रोन कितना प्रभावकारी साबित हो सकता है. ईरान के शाहेद ड्रोन ने तो अमेरिका और इजरायल को नाकों चने चबवा दिए हैं. दूसरा पक्ष यह भी है कि जिस देश के पास जितनी ताकतवर वायुसेना है, वह उतना ही पावरफुल है. यही वजह है कि अमेरिका से लेकर चीन तक लगातार ऐसे फाइटर जेट डेवलप कर रहे हैं, जो स्‍टील्‍थ यानी रडार की पकड़ से बाहर होने के साथ ही कटिंग एज वेपन सिस्‍टम से लैस हैं. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. पांचवीं पीढ़ी का देसी लड़ाकू विमान डेवलप करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. साथ ही 6th जेनरेशन डिफेंस टेक्‍नोलॉजी हासिल करने की भी कोशिश की जा रही है. इस बीच एक बड़ा डेवलपमेंट सामने आ रहा है. इंडियन एयरफोर्स स्‍वदेशी तेजस Mk2 फाइटर जेट में अस्‍त्र सीरीज की दो मिसाइलों को इंटीग्रेट करने की योजना बना रहा है. अस्‍त्र Mk1 और अस्‍त्र Mk2 मिसाइल के तेजस Mk2 जेट से जुड़ने से इसकी ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. बता दें कि अस्‍त्र Mk1 की रेंज 160 किलोमीटर तो अस्‍त्र Mk2 की रेंज 220 से 240 किलोमीटर के बीच है. तेजस Mk2 में इन दोनों एयर-टू-एयर मिसाइल के इंटीग्रेट होने से चीन और पाकिस्‍तान बॉर्डर की सुरक्षा और ज्‍यादा मजबूत हो जाएगी. इन मिसाइलों के जरिये सीमाई इलाकों से पाकिस्‍तान के महत्‍वपूर्ण शहरों जैसे लाहौर, कराची आदि को सीधे टारगेट किया जा सकता है.

दरअसल, भारतीय वायुसेना (IAF) की हवाई लड़ाकू क्षमता में बड़ा बदलाव आने वाला है. स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk2 और अस्त्र मिसाइलों के उन्नत संस्करण मिलकर BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज) यानी दृश्य सीमा से परे हवाई युद्ध की रणनीति को नई दिशा देने जा रहे हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा विकसित यह संयोजन न सिर्फ तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. तेजस Mk2 को खासतौर पर लंबी दूरी की हवाई लड़ाई को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है. यह मीडियम वेट फाइटर अपने पूर्ववर्ती तेजस Mk1 की तुलना में अधिक शक्तिशाली और सक्षम है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी भारी BVR मिसाइल क्षमता है. यह विमान एयर-टू-एयर कॉन्फिगरेशन में 8 से 10 BVR मिसाइलें ले जाने में सक्षम है, जो इसे अपनी कैटेगरी के अन्य सिंगल इंजन लड़ाकू विमानों से आगे रखता है. इस विमान में कुल 11 हार्डपॉइंट्स दिए गए हैं, जबकि पहले के संस्करण में यह संख्या 8 थी. इसके साथ ही लगभग 6.5 टन का पेलोड और 3400 किलोग्राम से अधिक इंटरनल फ्यूल कैपेसिटी (आंतरिक ईंधन क्षमता) इसे लंबी अवधि तक मिशन पर बनाए रखती है. मिशन प्रोफाइल के अनुसार तेजस Mk2 लगभग 120 मिनट तक कॉम्बैट एरिया में तैनात रह सकता है, जो तेजस Mk1 के मुकाबले लगभग दोगुना है.

अस्‍त्र मिसाइल से IAF की ताकत को मिलेगी धार

  1. सैचुरेशन अटैक: 8–10 मिसाइलों के साथ दुश्मन पर एक साथ कई हमले कर सकता है.
  2. लंबी मौजूदगी: 2 घंटे तक हवा में रहकर लगातार निगरानी कर सकता है.
  3. फर्स्ट-शॉट एडवांटेज: लंबी दूरी की मिसाइलों से पहले हमला करने का मौका मिलता है.
  4. नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर: AWACS और ग्राउंड सिस्टम से जुड़कर बेहतर टारगेटिंग करता है.
  5. कम लागत में ज्यादा तैनाती: स्वदेशी होने के कारण बड़े पैमाने पर तैनात किया जा सकता है.

पावरफुल तेजस Mk2 फाइटर जेट

‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस बढ़ी हुई क्षमता के पीछे GE F414 इंजन का अहम योगदान है, जो बेहतर थ्रस्ट और ईंधन दक्षता प्रदान करता है. साथ ही, जरूरत पड़ने पर बाहरी फ्यूल टैंक का इस्तेमाल करते हुए भी विमान अपनी BVR क्षमता को बनाए रख सकता है. तेजस Mk2 की ताकत को और बढ़ाती है अस्त्र सीरीज की मिसाइलें. अस्त्र Mk1 (जो पहले लगभग 110 किमी की रेंज तक सीमित थी) अब अपग्रेड के बाद करीब 160 किमी तक मार करने में सक्षम हो रही है. इसमें प्रोपेलेंट और ट्रैजेक्टरी ऑप्टिमाइजेशन के जरिए यह सुधार किया गया है. वहीं, अस्त्र Mk2 को 220 किमी तक की रेंज के लिए विकसित किया जा रहा है, जबकि कुछ ट्रायल में इसकी क्षमता 240 किमी तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. इसमें ड्यूल पल्स प्रोपल्शन और एडवांए एनर्जी मैनेजमेंट टेक्‍नोलॉजी का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी ‘नो-एस्केप ज़ोन’ यानी लक्ष्य के बच निकलने की संभावना बेहद कम हो जाती है.

तेजस Mk2 फाइटर जेट में लंबी दूरी तक हवा से हवा में का करने वाली मिसाइलों को एड करने से चीन और पाकिस्‍तान की सीमा की सुरक्षा ज्‍यादा दुरुस्‍त हो जाएगी. (फाइल फोटो/Reuters)

प्रोएक्टिव एयर डॉमिनेंस

तेजस Mk2 और अस्त्र मिसाइलों का यह संयोजन भारतीय वायुसेना की BVR रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है. अब तक जहां वायुसेना अधिकतर रिएक्टिव इंटरसेप्शन पर निर्भर रही है, वहीं यह नई प्रणाली प्रोएक्टिव स्टैंड-ऑफ डॉमिनेंस की ओर बढ़ने का रास्ता खोलती है. विशेषज्ञों के अनुसार, एक साथ 8-10 BVR मिसाइलों से लैस तेजस Mk2 दुश्मन पर ‘सैचुरेशन अटैक’ कर सकता है. यानी एक ही समय में कई मिसाइलें दागकर दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड किया जा सकता है, जिससे हिट की संभावना काफी बढ़ जाती है. इसके अलावा लंबी अवधि तक हवा में बने रहने की क्षमता (लोइटर टाइम) इसे संवेदनशील इलाकों जैसे LAC या समुद्री सीमाओं पर लगातार निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए सक्षम बनाती है. इससे भारी और महंगे प्लेटफॉर्म जैसे सुखोई-30MKI पर निर्भरता भी कम हो सकती है. अस्त्र Mk2 की लंबी रेंज तेजस Mk2 को ‘फर्स्ट-शॉट एडवांटेज’ भी देती है. यानी पायलट दुश्मन के रडार या हथियारों की पहुंच से बाहर रहते हुए पहले हमला कर सकता है और फिर सुरक्षित दूरी बना सकता है. यह आधुनिक हवाई युद्ध में बेहद अहम रणनीतिक बढ़त मानी जाती है.

इन्‍फ्रारेड सर्च एंड ट्रैक सिस्‍टम

तेजस Mk2 में AESA रडार, IRST (इन्फ्रारेड सर्च एंड ट्रैक), मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम और नेटवर्क सेंट्रिक डेटा लिंक जैसी अत्याधुनिक तकनीकें भी शामिल हैं. इससे यह न केवल खुद लक्ष्य साध सकता है, बल्कि AWACS और ग्राउंड बेस्ड सिस्टम से मिले डेटा के आधार पर भी सटीक हमला कर सकता है. रणनीतिक तौर पर यह प्लेटफॉर्म भारतीय वायुसेना को बड़े पैमाने पर तैनाती का विकल्प भी देता है. स्वदेशी होने के कारण इसकी लागत अपेक्षाकृत कम है, जिससे अधिक स्क्वाड्रन तैयार किए जा सकते हैं और व्यापक हवाई क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन जैसे देशों के PL-15 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस विमानों के मुकाबले में तेजस Mk2 और अस्त्र Mk2 का इंटीग्रेशन एक मजबूत जवाब साबित हो सकता है. यह न केवल मौजूदा मिराज-2000 जैसे पुराने विमानों की जगह लेगा, बल्कि भारतीय वायुसेना को आधुनिक नेटवर्क-केंद्रित युद्ध के लिए भी तैयार करेगा. तेजस Mk2 और अस्त्र मिसाइलों का यह मेल भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता, रणनीतिक लचीलापन और आत्मनिर्भरता तीनों को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

Tejas Mk2 क्या है और इसे किसने विकसित किया है?
तेजस Mk2 भारत का मीडियम वेट फाइटर (MWF) है, जिसे Aeronautical Development Agency (ADA) ने Defence Research and Development Organisation (DRDO) के तहत विकसित किया है. इसे खासतौर पर आधुनिक हवाई युद्ध की जरूरतों, खासकर लंबी दूरी की लड़ाई (BVR) को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है.

BVR (Beyond Visual Range) कॉम्बैट क्या होता है और इसमें Mk2 क्यों खास है?
BVR कॉम्बैट का मतलब है ऐसी हवाई लड़ाई जिसमें दुश्मन विमान नजर से बाहर होता है और मिसाइलों के जरिए हमला किया जाता है. तेजस Mk2 को शुरुआत से ही BVR मिशनों के लिए तैयार किया गया है, जिससे यह दुश्मन को दूर से ही निशाना बना सकता है और खुद सुरक्षित रह सकता है.

Mk2 में मिसाइल क्षमता कितनी है?
तेजस Mk2 एक साथ 8 से 10 BVR मिसाइलें ले जा सकता है, जो इसे अपनी श्रेणी के सिंगल-इंजन फाइटर विमानों में बेहद ताकतवर बनाता है. इसके 11 हार्डपॉइंट्स और लगभग 6.5 टन पेलोड क्षमता इसे भारी हथियार ले जाने में सक्षम बनाते हैं.

Astra Mk1 और Astra Mk2 की रेंज क्या है?
Astra Mk1 की मौजूदा रेंज लगभग 110 किमी है, जिसे अपग्रेड कर करीब 160 किमी तक ले जाया जा रहा है. Astra Mk2 की रेंज 220 किमी तक मानी जा रही है, जबकि कुछ परीक्षणों में इसे 240 किमी तक बढ़ाने की संभावना जताई गई है.

Mk2 की सबसे बड़ी तकनीकी खासियतें क्या हैं?
तेजस Mk2 में कई आधुनिक सिस्टम शामिल हैं. जैसे AESA रडार, IRST (इन्फ्रारेड सर्च एंड ट्रैक), मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम और डेटा लिंक आधारित नेटवर्किंग. इसके अलावा इसमें 3400 किलोग्राम से ज्यादा इंटरनल फ्यूल है, जिससे इसकी उड़ान क्षमता और समय बढ़ता है.

इसकी कॉम्बैट एंड्योरेंस (उड़ान समय) कितनी है?
तेजस Mk2 लगभग 120 मिनट (2 घंटे) तक मिशन पर बना रह सकता है, जो कि तेजस Mk1 के लगभग 57 मिनट के मुकाबले दोगुना है. यह लंबी निगरानी और गश्त (CAP) के लिए बेहद अहम है.

आधुनिक युद्ध में इसकी क्या अहमियत है?
आज के युद्ध में लंबी दूरी की मिसाइलें और नेटवर्क आधारित ऑपरेशन बेहद अहम हैं. तेजस Mk2, Astra मिसाइलों के साथ, दुश्मन को दूर से ही चुनौती देने और हवाई क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.



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