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India Bangladesh News: होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से बांग्लादेश इन दिनों पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत से जूझ रहा है. इस बीच भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश की मदद का हाथ बढ़ाया है, जिससे बांग्लादेश के लोगों की मुसीबत कम होने की उम्मीद है.
बांग्लादेश इन दिनों पेट्रोल-डीजल के गहरे संकट से जूझ रहा है.
बांग्लादेश इन दिनों गहरी मुसीबत में घिरा है. ईरान की अमेरिका और इजरायल के खिलाफ चल रही जंग और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से वहां पेट्रोल-डीजल का संकट गहरा गया है. इस मुश्किल हालात में भारत ने भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश की मदद में हाथ बढ़ाया है. भारत ने बांग्लादेश को अतिरिक्त 5,000 टन डीजल की सप्लाई की है. इस तरह हाल के दिनों में भारत से बांग्लादेश को कुल 15,000 टन डीजल मिल चुका है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के जनरल मैनेजर (कमर्शियल) एमडी. मुर्शेद हुसैन आजाद ने फोन पर बताया, ‘भारत से अतिरिक्त 5,000 टन डीजल बांग्लादेश पहुंच गया है. इसके साथ ही हाल के समय में भारत से कुल 15,000 टन डीजल मिल चुका है.’
भारत से बांग्लादेश कैसे पहुंच रहा डीजल
उन्होंने आगे बताया कि 28 मार्च को पंपिंग के जरिये बांग्लादेश को और 6,000 टन डीजल भेजा जाएगा. वहीं भारत ने अप्रैल महीने में बांग्लादेश को 40,000 टन डीजल की सप्लाई का प्रस्ताव दिया है, जिसे बांग्लादेश सरकार ने औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है. यह डीजल भारत के असम स्थित नुमालीगढ़ रिफाइनरी से इंडिया-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश के परबतिपुर डिपो तक पहुंचाया जा रहा है.
पाइपलाइन पर राजनीतिक उतार-चढ़ाव
भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ जन आंदोलन के बाद बंद हो गई थी. फरवरी 2026 में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के सत्ता में आने के बाद इस पाइपलाइन को फिर से चालू कर दिया गया. इसके बाद अब तक 15,000 टन डीजल बांग्लादेश पहुंच चुका है.
ऊर्जा विशेषज्ञ एजाज अहमद ने ANI को बताया, ‘बांग्लादेश में डीजल की सालाना मांग लगभग 40 लाख टन है, जो पूरी तरह विदेश से आयात पर निर्भर है. विदेश से आयात किए गए कच्चे तेल को पूर्वी रिफाइनरी में रिफाइन किया जाता है, बाकी डीजल सीधे रिफाइंड रूप में आयात किया जाता है. ‘बांग्लादेश मुख्य रूप से भारत, सिंगापुर और मध्य पूर्व से डीजल आयात करता है.
भारत ने तुरंत बढ़ाया मदद का हाथ
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से बांग्लादेश में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई थी. ऐसे में भारत ने तुरंत सहायता पहुंचाकर पड़ोसी देश के साथ अपने अच्छे संबंधों को एक बार फिर मजबूत किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न सिर्फ बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा में मदद कर रहा है, बल्कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को नई दिशा भी दे रहा है. बांग्लादेश सरकार ने भारत के इस सहयोग का स्वागत किया है और कहा है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग और बढ़ेगा.





