Aviation Security Policy: वीआईपी और चुनावी दौरों के दौरान होने वाली हवाई यात्राओं को सुरक्षित बनाने के लिए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने नई गाइडलाइन जारी की है. 27 मार्च 2026 को जारी इस गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ऐसा करने पर पायलट का लाइसेंस सस्पेंड करने से लेकर ऑपरेशन बंद करने तक की कार्रवाई हो सकती है.
डीजीसीए के अनुसार, पहले कई हादसों और घटनाओं में यह सामने आया कि अस्थायी हेलीपैड, छोटे एयरस्ट्रिप और चुनावी उड़ानों के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन ठीक से नहीं हुआ, जिससे वीवीआईपी पैसेंजर्स की जान खतरे में पड़ गई. भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए डीजीसीए ने सभी निजी एयरलाइंस के लिए यह गाइडलाइन जारी की है. इस आदेश में निजी एयरलाइन, प्राइवेट चार्टर ऑपरेट के साथ पायलट की भी भूमिका तय की गई है.
किन वीवीआईपी पैसेंजर्स की फ्लाइट पर लागू होंगे ये नियम
डीजीसीए की यह गाइडलाइन देश के कुछ प्रमुख वीआईपी पैसेंजर्स की फ्लाइट पर लागू होगी. इसमें लोकसभा स्पीकर, राज्यसभा के उपसभापति, कैबिनेट मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य के कैबिनेट मंत्री और Z+ सुरक्षा वाले लोग शामिल हैं. डीजीसीए ने अपने आदेश में साफ कहा है कि अब किसी भी पायलट या क्रू पर उड़ान भरने के लिए दबाव भी नहीं बनाया जा सकेगा.
डीजीसीए के नई गाइडलाइन में क्या है खास बातें
- कई बार वीआईपी कार्यक्रमों के कारण आखिरी समय में बदलाव किए जाते हैं, लेकिन अब ऐसे बदलाव सीधे क्रू से नहीं, बल्कि मैनेजमेंट के जरिए ही होंगे.
- साथ ही, हर उड़ान से पहले वीआईपी पैसेंजर्स की पूरी जानकारी, लोड और बैलेंस शीट तैयार करना जरूरी होगा और सामान की सुरक्षा जांच भी अनिवार्य होगी.
- नई गाइडलाइंस के मुताबिक वीआईपी फ्लाइट्स के लिए बेहतर और भरोसेमंद ट्विन-इंजन प्लेन या हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करना होगा.
- वीवीआईपी मूवमेंट में जाने वाले प्लेन के पास वैध एयरवर्थीनेस सर्टिफिकेट और सभी जरूरी तकनीकी उपकरण होना जरूरी है.
- उड़ान से पहले और बाद में प्लेन की जांच अनिवार्य होगी. अगर कोई खराबी पाई जाती है तो उसे ठीक किए बिना अगली उड़ान की अनुमति नहीं होगी.
पायलट के अनुभव पर डीजीसीए का खास जोर
डीजीसीए ने पायलट और को-पायलट के अनुभव को लेकर भी स्पष्ट मानक तय किए हैं. उदाहरण के तौर पर फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट के पायलट के पास कम से कम 3000 घंटे का अनुभव और 2000 घंटे का कमांड अनुभव होना चाहिए. वहीं हेलीकॉप्टर पायलट के लिए कम से कम 2000 घंटे का अनुभव जरूरी किया गया है. इसके अलावा हालिया उड़ान अनुभव और नाइट फ्लाइंग का अनुभव भी अनिवार्य किया गया है.
हेलीपैड और एयरस्ट्रिप की पहले से मंजूरी जरूरी
किसी भी वीआईपी फ्लाइट से पहले संबंधित जिले के प्रशासन से कम से कम 24 घंटे पहले हेलीपैड या एयरस्ट्रिप की मंजूरी लेना जरूरी होगा. इसके साथ ही वहां की लोकेशन, सुरक्षा व्यवस्था, फायर और रेस्क्यू सुविधा की जानकारी भी अनिवार्य होगी. अगर यह व्यवस्था पूरी नहीं है तो लैंडिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी.
मौसम से रूट प्लानिंग तक सब पर रखनी होगी नजर
- डीजीसीए ने कहा है कि खराब मौसम में उड़ान नहीं भरी जाएगी. पायलट को उड़ान से पहले पूरी मौसम जानकारी लेना जरूरी होगा.
- अगर उड़ान के दौरान मौसम खराब होता है तो पायलट को तुरंत डायवर्ट या एहतियाती लैंडिंग करनी होगी.
- साथ ही, फ्लाइट रूट ऐसा होना चाहिए जिससे किसी भी खतरे वाले या संवेदनशील इलाके से बचा जा सके.
- हर फ्लाइट से पहले यात्रियों को सीट बेल्ट, इमरजेंसी एग्जिट और सुरक्षा नियमों की जानकारी देना जरूरी होगा.
- हेलीकॉप्टर या प्लेन के पंखे पूरी तरह बंद होने के बाद ही यात्रियों को चढ़ने या उतरने की अनुमति दी जाएगी.
चुनावी उड़ानों के लिए खास नियम
डीजीसीए ने चुनावी उड़ानों को सबसे चुनौतीपूर्ण बताया है. इसमें लगातार उड़ानें, मौसम में बदलाव, भीड़, सुरक्षा दबाव और समय की कमी जैसी समस्याएं होती हैं. इसलिए हर ऑपरेटर को एक जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो डीजीसीए, चुनाव आयोग और अन्य एजेंसियों के सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा. इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्लेन में कोई अवैध सामान, नकदी, हथियार या नशीले पदार्थ न ले जाए जाएं.
नियम तोड़ने पर क्या हो सकती है कार्रवाई?
डीजीसीए ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का उल्लंघन बहुत गंभीर माना जाएगा. इसके तहत चेतावनी, लाइसेंस सस्पेंशन, ऑपरेशन बंद करना या एयर ऑपरेटर परमिट (AOP) रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है.





