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Shilparamam Hyderabad: शिल्पारामम, हैदराबाद में स्थित एक अनोखा सांस्कृतिक स्थल है, जहां शहरी भागदौड़ के बीच ग्रामीण जीवन का सुकून महसूस किया जा सकता है. यहां मात्र 40 रुपये के टिकट में पर्यटक पंचायत, देसी बाजार, पारंपरिक झोपड़ियां और हस्तशिल्प की दुनिया का अनुभव ले सकते हैं. शिल्पारामम में देशभर के कारीगर अपने हस्तनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित करते हैं, जिससे यह जगह खरीदारी और संस्कृति दोनों के लिए खास बन जाती है. आईटी हब के बीच स्थित यह स्थल न केवल पर्यटकों को आकर्षित करता है.
आधुनिक शहर में ग्रामीण सुकूनहैदराबाद अपनी ऊँची इमारतों और भागदौड़ भरी हाई-टेक जीवनशैली के लिए जाना जाता है. लेकिन इसी आधुनिकता के बीच हाई-टेक सिटी में एक ऐसी जगह मौजूद है जो आपको सीधे गाँव की सादगी से जोड़ देती है. शिल्पारमम (Shilparamam) एक ऐसा पर्यटन स्थल है जहाँ शहर के शोर-शराबे से दूर मिट्टी की सोंधी खुशबू और ग्रामीण परिवेश का अनुभव किया जा सकता है. यह उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो अपनी जड़ों और पुरानी परंपराओं को याद करना चाहते हैं.

शिल्पारमम विलेज का अनूठा सेटअपशिल्पारमम के अंदर एक सजीव गाँव म्यूजियम तैयार किया गया है. इसका मुख्य द्वार बिल्कुल वैसा ही है जैसा किसी पारंपरिक भारतीय गाँव का होता है. अंदर कदम रखते ही आपको मिट्टी के घर, चूल्हे पर बनती रोटियाँ और कुएँ के पानी जैसा प्राकृतिक वातावरण देखने को मिलता है. यहाँ की बनावट इतनी वास्तविक है कि पर्यटकों को ऐसा महसूस होता है जैसे वे किसी असली गाँव की गलियों में टहल रहे हों.

ग्रामीण जीवन का चित्रणइस म्यूजियम की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रदर्शित की गई ग्रामीण जीवन की झांकियां हैं. यहां मिट्टी से बनी आदमकद मूर्तियों के माध्यम से दिखाया गया है कि गांव के लोग अपने घरों में कैसे रहते हैं और दैनिक कार्य कैसे करते हैं. गांव की पंचायत से लेकर खेत-खलिहानों के दृश्यों को इतनी बारीकी से उकेरा गया है कि वे बेहद सजीव प्रतीत होते हैं. यह कला प्रेमियों के लिए एक अद्भुत अनुभव है.
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पारंपरिक बाज़ार गांव के आर्थिक जीवन को दर्शाने के लिए यहां एक शानदार गांव का बाज़ार बनाया गया है. इसमें लोहारों को काम करते हुए, टोकरी बुनते हुए और व्यापारियों को सामान बेचते हुए दिखाया गया है. साथ ही राजस्थान के ग्रामीण अंचलों की तरह बैलगाड़ी और मेलों की प्रदर्शनी भी यहां का मुख्य आकर्षण है. यह बाज़ार न केवल मनोरंजन करता है बल्कि देश की विविध सांस्कृतिक विरासतों से भी रूबरू कराता है.

शिल्पारमम का इतिहास और उद्देश्यलगभग 65 एकड़ में फैले इस शिल्प ग्राम की कल्पना वर्ष 1992 में की गई थी. राज्य सरकार द्वारा इसे स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य भारतीय कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है. यह मंच देश भर के कारीगरों और शिल्पकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रेरित करता है. आधुनिक युग में लुप्त होती पारंपरिक कलाओं को बचाने के लिए यह एक सराहनीय पहल है.

यात्रा संबंधी जानकारी और शुल्कशिल्पारमम पहुंचना बेहद आसान है. सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन राय दुर्ग और हाई टेक सिटी हैं. जहां से आप मात्र 5 मिनट में पहुंच सकते हैं. ऑटो और बस की सुविधा भी यहाँ के लिए उपलब्ध है. प्रवेश शुल्क बड़ों के लिए 40 रुपये और बच्चों के लिए मात्र 20 रुपए है. पार्किंग के लिए दोपहिया वाहनों का 20 और कारों का 60 रुपए का टिकट निर्धारित है.





