Last Updated:
Indian Railway News: भारतीय रेल अपने हजारों-लाखों यात्रियों की सुविधाओं का हमेशा ख्याल रखता है. खासकर पैसेंजर्स को निर्धारित समय पर डेस्टिनेशन तक पहुंचाना हमेशा से एक चुनौती रही है. इस समस्या से निदान के लिए कई स्तर पर काम किए जा रहे हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण रेल पटरियों को दुरुस्त करना और नई रेल लाइन बिछाना है.
गाजियाबाद से दिल्ली के विभिन्न स्टेशनों की ओर जाने वाली ट्रेनें आमतौर पर रेंगने लगती हैं. आने वाले समय में यह समस्या दूर होने वाली है. (फाइल फोटो)
Indian Railway News: गाजियाबाद से नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन की ओर रोजाना ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. लंबे समय से साहिबाबाद और आनंद विहार रेलवे स्टेशन के आसपास ट्रेनों के आउटर पर लंबे समय तक खड़े रहने की समस्या से जूझ रहे लोगों को जल्द छुटकारा मिल सकता है. आनंद विहार से तिलक ब्रिज रेलवे स्टेशन के बीच चल रहा तीसरी और चौथी लाइन प्रोजेक्ट अब रफ्तार पकड़ चुका है. इसपर अब तेजी से काम चल रहा है. बता दें कि अन्य जगहों से ट्रेनें तूफान की रफ्तार से गाजियाबाद पहुंच जाती हैं, लेकिन उसके बाद ट्रेनों के अत्यधिक दबाव के चलते आमतौर पर रेंगने लगते हैं. कई बार तो आउटर सिग्नल पर ट्रेनें काफी देर तक रुकी रह जाती हैं. अब इस समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है.
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 9.77 किलोमीटर लंबे सेक्शन में दो नई रेलवे लाइनें बिछाई जा रही हैं. अभी तक लगभग 1.32 किलोमीटर हिस्से में काम पूरा कर लिया गया है और दावा किया जा रहा है कि शेष कार्य भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा. प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इस व्यस्त रूट पर ट्रेनों की आवाजाही काफी सुगम हो जाएगी और यात्रियों को बार-बार होने वाली देरी से राहत मिलेगी. दरअसल, मौजूदा समय में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से तिलक ब्रिज तक छह ट्रैक उपलब्ध हैं, जबकि आनंद विहार के आगे चार ट्रैक मौजूद हैं. लेकिन इन दोनों के बीच पड़ने वाले 9.77 किलोमीटर के इस अहम हिस्से में केवल दो ट्रैक होने के कारण भारी ट्रैफिक का दबाव बन जाता है. स्थिति तब और जटिल हो जाती है जब निजामुद्दीन की ओर से आने वाली लाइनें भी इसी सेक्शन में मिल जाती हैं.
ट्रेनें ज्यादा, पर ट्रैक कम
‘नवभारत टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस रूट पर रोजाना करीब 180 पैसेंजर ट्रेनें और 42 मालगाड़ियां ऑपरेट होती हैं. सीमित ट्रैक क्षमता के कारण ट्रेनों को अक्सर गाजियाबाद और दिल्ली के बीच आउटर पर रोकना पड़ता है, जिससे यात्रियों को अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता है. खासकर पीक आवर्स में यह समस्या और गंभीर हो जाती है. ‘थर्ड और फोर्थ लाइन’ प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इस रूट की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा. ट्रेनों के लिए अलग-अलग ट्रैक उपलब्ध होने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा और संचालन अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा. इससे न केवल ट्रेनों की समयबद्धता सुधरेगी, बल्कि मालगाड़ियों की आवाजाही भी अधिक सुचारु हो पाएगी.
राहत की उम्मीद
रेलवे का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद गाजियाबाद-नई दिल्ली कॉरिडोर पर यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और आउटर पर रुकने की समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी. यह प्रोजेक्ट दिल्ली-एनसीआर के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक पर यातायात को बेहतर बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. भारतीय रेल पिछले कुछ सालों से पुरानी पटरियों को दुरुस्त करने के साथ ही नई लाइन बिछाने का काम तेज कर दिया है.
About the Author

बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें





