देशभर में 1 अप्रैल से जनगणना (Census 2027) शुरू होने जा रही है, जिसे लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. इस बार की जनगणना कई मायनों में पहले से अलग और ज्यादा व्यापक होने वाली है. रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और इसमें लोगों से जीवनशैली से जुड़े बेहद विस्तृत सवाल पूछे जाएंगे.
सबसे अहम बात यह है कि इस बार जनगणना के दौरान जुटाए गए व्यक्तिगत आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे. इन्हें न तो सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत साझा किया जाएगा, न ही अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा और न ही किसी अन्य संस्था को दिया जाएगा. यानी जो जानकारी नागरिक देंगे, वह पूरी तरह सुरक्षित रहेगी.
कब शुरू होगी जाति जनगणना?
इस बार जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी. पहले चरण में मकानों और उनकी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि दूसरे चरण में घर में रहने वाले लोगों की सामाजिक, आर्थिक और अन्य जानकारी दर्ज की जाएगी. खास बात यह है कि पहली बार ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ यानी स्वगणना की सुविधा दी गई है, जिसके तहत लोग खुद भी 15 दिन की निर्धारित अवधि में ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे.
मृत्युंजय कुमार ने बताया कि सेल्फ एन्यूमरेशन में लोगों को खुद ही जानकारी देनी होगी, लेकिन इसके बावजूद जो कर्मचारी-अधिकारी घर जाएंगे और जो आईडी होगी उसके आधार पर वह क्रॉस वेरीफाई करेंगे. इस वजह से इसमें गड़बड़ी की संभावना नहीं है. वहीं जाति जनगणना को लेकर उन्होंने बताया, ‘जाति का प्रश्न दूसरे चरण में शामिल होगा, जब वह सवाल आएंगे तब उनका जवाब आपके सामने रखा जाएगा. जब एक बार प्रश्न तैयार होंगे तो आपको जानकारी दे दी जाएगी.’
जनगणना में पूछे जाएंगे ये 33 सवाल
सरकार ने इस बार कुल 33 सवाल तय किए हैं, जो पहले चरण में पूछे जाएंगे. इन सवालों में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कई अहम बातें शामिल हैं. उदाहरण के तौर पर यह पूछा जाएगा कि घर की दीवार, छत और फर्श किस सामग्री से बने हैं, घर का इस्तेमाल किस लिए हो रहा है और उसकी स्थिति कैसी है. इसके अलावा परिवार से जुड़े सवालों में मुखिया का नाम, लिंग, सामाजिक वर्ग (SC/ST/अन्य), परिवार में रहने वाले लोगों की संख्या और वैवाहिक स्थिति जैसी जानकारी ली जाएगी.
यही नहीं, घर में उपलब्ध सुविधाओं पर भी बारीकी से सवाल होंगे-जैसे पीने के पानी का स्रोत क्या है, घर में बिजली कैसे आती है, शौचालय है या नहीं और अगर है तो उसका प्रकार क्या है, गंदे पानी की निकासी कैसे होती है, रसोई और गैस कनेक्शन है या नहीं.
जनगणना में परिवार की आर्थिक स्थिति और संसाधनों का भी आकलन किया जाएगा. इसके तहत पूछा जाएगा कि घर में टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप, मोबाइल, साइकिल, बाइक या कार जैसी सुविधाएं हैं या नहीं. यहां तक कि परिवार में मुख्य रूप से कौन सा अनाज खाया जाता है, यह भी दर्ज किया जाएगा.
लिव-इन वाले भी माने जाएंगे विवाहित जोड़े
तकनीकी स्तर पर भी इस बार जनगणना को पूरी तरह आधुनिक बनाया गया है. सी-डैक द्वारा विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए डेटा इकट्ठा किया जाएगा और 16 भाषाओं में मोबाइल ऐप उपलब्ध कराया गया है. साथ ही 19 भाषाओं में मैन्युअल तैयार कर कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है.
कब से तब तक चलेगी जनगणना
जनगणना की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से होगी, जबकि संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 रखी गई है. पहाड़ी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह प्रक्रिया 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी.
करीब 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट वाली इस विशाल प्रक्रिया में राज्यों की मशीनरी, जिला स्तर के अधिकारी और केंद्र सरकार मिलकर काम करेंगे. गृह मंत्रालय की निगरानी में यह पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी.
कुल मिलाकर, इस बार की जनगणना न सिर्फ डिजिटल और व्यापक होगी, बल्कि लोगों की जिंदगी के लगभग हर पहलू को कवर करेगी-घर की दीवार से लेकर खाने की थाली तक. और सबसे खास बात, यह सारी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी, जिसे RTI के जरिए भी हासिल नहीं किया जा सकेगा.




