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फैमिली कोर्ट में धारा 125 के तहत मेंटेनेंस के लिए लड़ रही एक बुजुर्ग महिला की कहानी दिल दहला देने वाली है. पति की ₹22,000 पेंशन होने के बावजूद वह पिछले 26 साल से अदालत के चक्कर काट रही हैं. उनके लिए यह लड़ाई पैसों की नहीं बल्कि उस कानूनी जुड़ाव की है जो उन्हें आज भी ‘पत्नी’ का दर्जा देता है और उनके धोखेबाज पति को उनकी मौजूदगी का अहसास कराता रहता है.
बुजुर्ग महिला का जीवन बेहद कष्ट में बीता. (AI Image)
हनुमान चालीसा का पाठ करती वह महिला आज दर्द से ऊपर उठ चुकी हैं. उनके चेहरे पर कोई शिकवा नहीं बल्कि एक स्थिर मुस्कान थी. उनका मानना है कि जीवन में ‘दर्द’ ही एकमात्र सत्य है जो कभी माता-पिता, कभी भाई-बहन तो कभी पति के रूप में मिलता है. उनकी यह लड़ाई जीतने के लिए नहीं बल्कि उस धोखेबाज पति को उम्रभर उसकी गलती का अहसास दिलाने के लिए है. फैमिली कोर्ट की भीड़भाड़, फाइलों का बोझ और टूटते रिश्तों की कड़वाहट के बीच कभी-कभी ऐसी कहानियां सामने आती हैं जो कानून की किताबों से परे मानवीय संवेदनाओं की गहरी परतें खोल देती हैं. यह कहानी एक ऐसी बुजुर्ग महिला की है जो पिछले 26 सालों से जंग लड़ रही है. वर्तमान में उसे धाखेबाज पति से महज 1000 रुपये का मेंटेनेंस मिल रहा है. लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि उनकी लड़ाई पैसों के लिए नहीं बल्कि उस ‘अदृश्य धागे’ को बचाए रखने के लिए है जो उन्हें आज भी उनके पति से जोड़ता है.
₹500 से ₹1000 तक का सफर
इस महिला की दास्तां किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. शादी के समय उनसे यह सच छुपाया गया कि उनके पति पहले से शादीशुदा थे. बाद में उनके रहते हुए पति ने दूसरी शादी भी कर ली और उन्हें घर से निकाल दिया. विडंबना देखिए कि अब रिटायर्ड हो चुके जिस पति की पेंशन ₹22,000 है, वह अपनी पत्नी को 19 साल तक महज ₹500 महीना देता रहा. 2019 में कोर्ट ने इसे बढ़ाकर ₹1000 किया.
पति से लिंक नहीं खोना चाहती बुजुर्ग
आज के दौर में ₹1000 की क्या बिसात? लेकिन उस बुजुर्ग महिला के लिए यह रकम नहीं बल्कि एक सबूत है. जब उनसे पूछा गया कि इतने कम पैसों के लिए आप इतनी उम्र में कोर्ट क्यों आती हैं तो उनका जवाब कलेजा चीर देने वाला था. वकील राधिका खन्ना ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर महिला की कहानी को बताते हुए बताया महिला का कहना है कि बात रुपयों की नहीं है, बात उस लिंक की है जिससे मैं आज भी उनकी बीवी हूँ. कम से कम उन्हें हर महीने एक हजार रुपये देने के बहाने याद तो आता ही होगा कि मैं जिंदा हूं.”
सवाल-जवाब
क्या ₹22,000 की पेंशन पर ₹1000 का मेंटेनेंस तर्कसंगत है?
कानूनी तौर पर यह काफी कम है. आमतौर पर कोर्ट पति की आय का 25% तक मेंटेनेंस तय करता है. हालांकि, कई पुराने मामलों में महिलाएं केस को लंबा खींचने या कानूनी पेचीदगियों के कारण पुराने आदेशों पर ही टिकी रहती हैं.
इस मामले में महिला की मनोवैज्ञानिक स्थिति क्या दर्शाती है?
यह ‘रिवेंज’ (इंतकाम) और ‘अटैचमेंट’ (जुड़ाव) का एक जटिल मिश्रण है. उनके लिए कोर्ट जाना एक ‘रिचुअल’ बन गया है, जो उन्हें उनकी पहचान और हक की याद दिलाता रहता है.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें





