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अमित शाह ने राहुल गांधी पर बहुत गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कई बार नक्सलवादियों का खुला सपोर्ट किया है. ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में कई नक्सल संगठनों ने सीधे तौर पर हिस्सा लिया. 2010 में ओडिशा में लाडो शिकोका के साथ राहुल गांधी ने मंच साझा किया. शिकोका ने उसी मंच से भड़काऊ भाषण दिया और राहुल को माला पहनाई.
अमित शाह ने नक्सलवाद को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला.
नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयासों पर चल रही चर्चा के दौरान सदन को संबोधित किया. लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई बार नक्सलवादियों के हमदर्दों के साथ देखे गए हैं. भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंट संगठनों ने हिस्सा लिया; इसका मेरे पास रिकॉर्ड है.
गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने (राहुल गांधी) 2010 में ओडिशा में लाडो शिकोका के साथ मंच साझा किया, शिकोका ने उसी मंच से भड़काऊ भाषण दिया और राहुल गांधी को माला भी पहनाई. 2018 में हैदराबाद में गुमड़ी विट्ठल राव उर्फ गद्दार से मुलाकात की, जो विचारधारा के करीब रहे. मई 2025 को-ऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ पीस… इसके साथ मुलाकात की. और जब 172 जवानों को मारने वाला हिडमा मारा गया तो इंडिया गेट पर नारे लगे… कितने हिडमा मारोगे, हर घर से हिडमा निकलेगा, और इस वीडियो को राहुल गांधी ने स्वयं ट्वीट किया. इन्होंने 1970 से लेकर मार्च 2026 तक नक्सलवाद का समर्थन किया है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “मैं उन ‘अर्बन नक्सलियों’ से एक सवाल पूछना चाहता हूं जो इन व्यक्तियों के समर्थन में आगे आए हैं. पिछले छह दिनों में मैंने लगभग दो हजार लेखों की समीक्षा की है, और इन सभी लेखों का मुख्य विषय यही है कि सरकार को उन माओवादियों से बातचीत करनी चाहिए जो हथियार लेकर घूमते हैं, कि वे न्याय के लिए लड़ रहे हैं और उन्हें मारा नहीं जाना चाहिए, कि हमें उनके प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए और सरकार को विकास पहलों में तेजी लानी चाहिए… ऐसा लगता है कि आपकी मानवता की भावना केवल उन लोगों तक ही सीमित है जो संविधान का उल्लंघन करते हैं और हथियार रखते हैं. यह उन आम नागरिकों तक नहीं पहुंचती जो इन्हीं हथियारों से मारे जा रहे हैं.”
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “रूस में कम्युनिस्ट सरकार बनते ही 1925 में यहां सीपीआई (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी) की स्थापना हुई. रूसी सरकार ने अपने संरक्षण के माध्यम से पूरी दुनिया में कम्युनिस्ट पार्टियों के गठन को बढ़ावा दिया. इसकी एक शाखा हमारे देश में स्थापित हुई. अब, एक ऐसी पार्टी, जिसकी नींव ही एक विदेशी राष्ट्र की प्रेरणा से रखी गई हो, हमारे अपने देश के हितों के बारे में कैसे सोच सकती है? सीपीआई (एम) का गठन 1964 में हुआ… 1969 में, विशेष रूप से संसदीय राजनीति का विरोध करने के लिए, सीपीआई (एमएल) की स्थापना हुई. इसका उद्देश्य न तो विकास में शून्य पैदा करना था और न ही अधिकारों की रक्षा करना. इसके संविधान में निहित उद्देश्य संसदीय राजनीति का विरोध करते हुए सशस्त्र क्रांति करना था.”
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें





