लोकसभा में नक्सल समस्या पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने इतिहास, भूगोल और आंकड़ों के जरिए नक्सली विचारधारा की जड़ों पर करारा प्रहार किया. उन्होंने एक ऐसी ‘गढ़ी गई कहानी’ को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया जाता है कि नक्सलवाद का उदय विकास की कमी या गरीबी के कारण हुआ. शाह ने साफ शब्दों में कहा कि यह केवल एक वामपंथी विचारधारा का विस्तार था, जिसका विकास से कोई लेना-देना नहीं है.
बस्तर ही क्यों? भूगोल बनाम विकास का तर्क
अमित शाह ने 1960 के दशक के आंकड़ों का हवाला देते हुए पूछा कि आखिर नक्सलियों ने बस्तर को ही अपना गढ़ क्यों बनाया? उन्होंने चार क्षेत्रों की तुलना की:
· नक्सलबाड़ी: शिक्षा 23%, प्रति व्यक्ति आय ₹500
· बस्तर: शिक्षा 23%, प्रति व्यक्ति आय ₹190
· सहरसा (बिहार): शिक्षा 33%, प्रति व्यक्ति आय ₹299
· बलिया (यूपी): शिक्षा 31%, प्रति व्यक्ति आय ₹374
गृह मंत्री ने तर्क दिया कि सहरसा और बलिया में भी गरीबी और शिक्षा का स्तर बस्तर जैसा ही था, लेकिन वहां नक्सलवाद नहीं पनपा. इसका कारण कठिन भूगोल था. बस्तर के घने जंगलों ने नक्सलियों को छिपने की जगह दी जबकि मैदानी इलाकों में उनके लिए टिक पाना संभव नहीं था. उन्होंने कहा, “अगर प्रति व्यक्ति आय ही पैमाना होता तो देश के कई अन्य हिस्सों में भी नक्सलवाद होता. यह केवल भूगोल का फायदा उठाकर अपनी विचारधारा थोपने का खेल था.”
देश में समानांतर सरकार
शाह ने भावुक होकर पूछा कि जो आदिवासी बिरसा मुंडा को अपना भगवान मानते थे, वे 1970 आते-आते माओ को अपना हीरो कैसे मानने लगे? उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथियों ने आदिवासियों को गुलाम बनाए रखने के लिए उनके स्कूल और बैंक जला दिए. छत्तीसगढ़ के जंगलों में नक्सलियों ने अपनी समानांतर सरकार बना ली थी, जहां उनके ‘गृह मंत्री’ और ‘आपूर्ति मंत्री’ लूटे गए अनाज को बांटते थे. उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक वैक्यूम पैदा किया ताकि चुनाव न हो सकें और उनका अवैध शासन चलता रहे.
रूस और चीन से प्रेरित दल, देश का भला कैसे करेंगे?
संसद में जब विपक्षी दलों ने उन्हें टोकने की कोशिश की, तो शाह ने कड़े लहजे में कहा, “मुझे उकसाओ मत, मैं आज तय करके आया हूं और पूरी बात बताऊंगा.” उन्होंने इतिहास की कड़ियां जोड़ते हुए कहा कि 1921 में चीन और रूस में कम्युनिस्ट सरकारों का गठन हुआ और उसी साल भारत में भी कम्युनिस्ट पार्टी बनी. शाह ने आरोप लगाया कि जो पार्टी विदेशी प्रेरणा और स्पॉन्सरशिप से बनी हो वह भारत का भला कभी नहीं कर सकती.
हथियार उठाने वालों के लिए मोदी सरकार की दोटूक नीति
अमित शाह ने सदन को बताया कि नक्सलियों के पास मौजूद 92% हथियार और गोलियां पुलिस से लूटी हुई थीं. उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार की नीति बहुत साफ है—”चर्चा केवल उन्हीं से होगी जो हथियार डालेंगे, वरना गोली का जवाब गोली से ही दिया जाएगा.” उन्होंने आंकड़ों का खुलासा करते हुए कहा कि एक नक्सली सचिव के कंप्यूटर से पता चला है कि इन लोगों ने ₹240 करोड़ की अवैध वसूली की है. शाह ने अंत में कहा कि अब बस्तर से लाल आतंक की परछाई हट चुकी है और वहां मोदी सरकार के नेतृत्व में स्कूल, राशन की दुकानें, अस्पताल और आधार कार्ड जैसी बुनियादी सुविधाएं घर-घर पहुंच रही हैं.
सवाल-जवाब
अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए क्या संदेश दिया?
उन्होंने साफ किया कि लोकतंत्र में हथियार उठाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी. जो हथियार डालेगा उससे बात होगी, जो नहीं डालेगा उसका हिसाब होगा. बस्तर अब नक्सल-मुक्त और विकास की राह पर है.
क्या विकास की कमी ही नक्सलवाद का असली कारण है?
नहीं, अमित शाह ने आंकड़ों से सिद्ध किया कि गरीबी और कम शिक्षा के बावजूद सहरसा और बलिया जैसे क्षेत्रों में उग्रवाद नहीं पनपा. यह केवल वामपंथी विचारधारा और कठिन भूगोल का मिश्रण था.





