असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) एक बड़े विवाद में घिरती नजर आ रही है. पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जामई पर आरोप है कि उन्होंने मृतकों के नाम पर सोशल मीडिया के जरिये चंदा इकट्ठा किया, लेकिन पीड़ित परिवारों तक कोई मदद नहीं पहुंची. यह मामला अब पुलिस तक पहुंच चुका है और दो अलग-अलग परिवारों ने गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं.
पूरा विवाद 7 मार्च को चांदनी चौक के स्क्रैप कारोबारी मोहम्मद अरीब की हत्या के बाद शुरू हुआ. इस दर्दनाक घटना के बाद शोएब जामई अपने सहयोगियों के साथ पीड़ित परिवार के घर पहुंचे, संवेदना जताई और एक वीडियो रिकॉर्ड किया. आरोप है कि घर से लौटने के बाद उसी वीडियो को उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट किया गया, जिसके साथ एक QR कोड भी जोड़ा गया था. परिवार का दावा है कि यह QR कोड ‘सादिया फातिमा’ नाम की किसी महिला के नाम पर था, जिसे वे नहीं जानते और न ही इस बारे में उन्हें कोई जानकारी दी गई थी.
क्या हैं आरोप?
मृतक अरीब के भाई मोहम्मद अदीब ने 19 मार्च को सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि उनके परिवार की जानकारी और अनुमति के बिना उनके भाई के नाम पर चंदा इकट्ठा किया गया. शिकायत के मुताबिक इस QR कोड के जरिए करीब 7 से 8 लाख रुपये तक की राशि जुटाई गई. उन्होंने इसे न सिर्फ भ्रामक बल्कि एक पीड़ित परिवार की स्थिति का अनुचित फायदा उठाने की कोशिश बताया और पूरे मामले की जांच की मांग की.
परिवार के दूसरे सदस्य ने भी साफ कहा कि उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं मिली. उनके मुताबिक 15 मार्च को शोएब जामई उनसे मिलने आए थे और आर्थिक सहायता की बात कही थी, लेकिन बाद में सोशल मीडिया पर QR कोड लगाकर चंदा जुटाया गया. जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई और QR कोड पर दिख रहे नाम को लेकर सवाल उठाए, तो उन्हें बताया गया कि यह आईटी टीम की गलती थी और बाद में वीडियो हटा दिया गया. परिवार का कहना है कि उन्हें यह भी बताया गया कि केवल 300-400 रुपये ही आए हैं, जबकि उन्हें शक है कि इससे कहीं ज्यादा रकम जुटाई गई.
मानसरोवर पार्क में भी वही कहानी
इसी तरह का एक और मामला सामने आया है, जिसमें सिराजुद्दीन अंसारी ने भी 19 मार्च को शिकायत दर्ज कराई. उनका आरोप है कि नवंबर 2025 में मानसरोवर पार्क में उनके नाबालिग बेटे की गोली मारकर हत्या के बाद शोएब जामई उनके घर आए, मदद का भरोसा दिया और बाद में उनके बेटे के नाम पर सोशल मीडिया पर चंदा अभियान चलाया. इस मामले में भी वही पैटर्न सामने आया. वीडियो के साथ एक QR कोड था, जिस पर ‘सादिया फातिमा’ का नाम था. अंसारी का कहना है कि उन्हें कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई और उनके नाम का इस्तेमाल कर चंदा जुटाया गया. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे किसी तरह का चंदा नहीं चाहते और उनके नाम पर कोई गैरकानूनी फंड इकट्ठा न किया जाए.
क्या कह रहे शोएब जामई?
इन आरोपों ने AIMIM और उसके शीर्ष नेतृत्व के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है, क्योंकि शोएब जामई को पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का करीबी माना जाता है. ऐसे में मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित न रहकर राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो गया है.
हालांकि शोएब जामई ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि यह सब एक साजिश के तहत किया जा रहा है. उनके मुताबिक कुछ पूर्व पार्टी सदस्य और कांग्रेस से जुड़े लोग AIMIM के बढ़ते प्रभाव से परेशान हैं और उन्होंने पीड़ित परिवारों को गुमराह कर यह दुष्प्रचार कराया है. जामई का दावा है कि उन्होंने सभी जरूरी सबूत और बैंक स्टेटमेंट संबंधित एजेंसियों को सौंप दिए हैं और वे खुद इस मामले में साजिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं.
अब यह मामला जांच के दायरे में है और पुलिस से उम्मीद की जा रही है कि वह QR कोड, उससे जुड़े बैंक खातों और चंदा जुटाने की पूरी प्रक्रिया की गहराई से जांच करेगी. अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न सिर्फ एक गंभीर आपराधिक मामला बन सकता है, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए चलने वाले चंदा अभियानों की पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े करेगा.





