Iran War News: ईरान जंग को एक महीने से अधिक बीत गए. युद्ध की तपिश अब भी बरकरार है. या यूं कहें कि जंग की आग और भड़कती जा रही है. ईरान अब भी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ मैदान-ए-जंग में डटा है. युद्ध खत्म करने की कवायद जारी है, मगर रिजल्ट अब भी सिफर है. ईरान में अभी कैसे हालात हैं, यह दुनिया न्यूज के जरिए देख रही है. इस बीच न्यूज18 ने एक ऐसे शख्स से बातचीत की है, जिसने ईरान जंग में 12 दिन तक किसी तरह अपने आप को सुरक्षित रखा. जी हां, जंग के बीच ईरान में 12 दिन बिताने वाले जम्मू-कश्मीर के उमर इकबाल ने हालात को बहुत करीब से देखा. उमर इकबाल पुलवामा के व्लॉगर हैं. वह अफगानिस्तान से लेकर ईरान तक को एक्सप्लोर किया. चलिए जानते हैं उनकी जुबानी, ईरान जंग में 12 दिन की कहानी.
अफगानिस्तान के हेरात में News18 इंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में उमर इकबाल ने बताया कि एक वक्त ऐसा आया जब, उन्हें लगा कि यह आखिरी समय है, और उन्होंने आखरी कलमा भी पढ़ा. उस समय वो सफर कर रहे थे और मिसाइल्स से लगातार हमले हो रहे थे. उन्होंने बताया कि कैसे एक हिंदुस्तानी होने के चलते ईरान में लोगों ने और वहां के सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ पूरा सहयोग किया.
उमर इकबाल ईरान कब पहुंचे, कैसे थे हालात
उमर इकबाल ने News18 इंडिया से कहा कि हालात जल्द होने की कामना करते हैं, ताकि वो फिर ईरान को एक्सप्लोर कर सकें. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के 27 साल के ट्रैवल व्लॉगर उमर इकबाल फरवरी के आखिरी हफ्ते में ईरान पहुंचे थे. तब हालात तेजी से युद्ध की ओर बढ़ रहे थे. 21 फरवरी को ईरान में प्रवेश करने के समय तक युद्ध शुरू नहीं हुआ था, लेकिन तनाव साफ महसूस किया जा सकता था. लोग उनसे मिलते तो थे, लेकिन साथ ही जल्द देश छोड़ने की सलाह भी देते थे.
उमर इकबाल के 12 दिन ईरान जंग के बीच कैसे कटे, उसकी पूरी कहानी.
12 दिन का वीजा और देश छोड़ने की वार्निंग
उमर इकबाल के मुताबिक, इराक में ईरानी दूतावास ने शुरुआत में वीजा देने से इनकार किया, लेकिन बाद में कड़ी जांच के बाद 12 दिन का वीजा जारी किया, साथ ही जल्द देश छोड़ने की चेतावनी भी दी. खोर्रमाबाद और कोम में कुछ दिन बिताने के बाद 28 फरवरी को युद्ध शुरू हो गया. 1 मार्च को वह तेहरान की ओर बढ़े, लेकिन हमलों की तीव्रता के कारण शहर में प्रवेश नहीं किया.
ईरान अब भी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ मैदान-ए-जंग में डटा है.
कितना भयावह था मंजर
बकौल उमर इकबाल, आगे दमगन के पास उन्होंने एक रात खुले आसमान के नीचे बिताई, जहां उन्होंने मिसाइलों को गुजरते देखा. 2 मार्च को दमगन पहुंचने के बाद एक नजदीकी विस्फोट में एक इमारत क्षतिग्रस्त हुई, जहां राहत कार्य में शामिल होते हुए वह खुद भी घायल हो गए. बढ़ते खतरे और वीजा समाप्त होने के कारण उन्होंने 6 मार्च को तायबाद की ओर लगभग 750 किलोमीटर का सफर तय किया. रास्ते में डर और अनिश्चितता बनी रही. 7 मार्च को अफगानिस्तान सीमा पार करने के बाद उन्हें राहत मिली और उन्होंने हेरात पहुंचकर अपने परिवार से संपर्क किया. अब वह अफगानिस्तान में एक महीने रुकने के बाद मध्य एशिया की ओर आगे बढ़ने की योजना बना रहे हैं.
ईरान पर कब हुआ था अटैक
गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को ईरान पर अटैक हुआ था. अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर मिसाइलों की बरसात कर दी थी. उस 28 फरवरी वाले अटैक में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. इतना ही नहीं, ईरान के टॉप लीडर्स की भी हत्याएं हो गईं. इसके बाद ईरान ने भी बदला लेना शुरू कर दिया. उसने होर्मुज को बंद कर दिया. इसके बाद तब से युद्ध जारी है. हालांकि, अमेरिका अब ईरान के साथ सीजफायर पर बातचीत का दावा कर रहा है. मगर ईरान ने इसे खारिज किया है.





