केरल चुनाव: ‘गांव बसा नहीं लुटेरे पहले आ गए’, कांग्रेस सही साबित कर रही ये कहावत?

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‘गांव बसा नहीं लुटेरे पहले आ गए’, केरल में कांग्रेस सही साबित कर रही कहावत!

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Kerala Chunav: केरल चुनाव 9 अप्रैल को है. इस चुनाव में यूडीएफ को बढ़त मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. लेकिन, इससे पहले कांग्रेस में सीएम चेहरे पर सिरफुटव्वल तेज हो गया है. संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की भूमिका बढ़ती दिख रही है.

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केरल में केसी वेणुगोपाल के चेहरे की खूब चर्चा है.

Kerala Chunav: केरल विधानसभा के लिए नौ अप्रैल को मतदान होगा. राजनीति के जानकार इस चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को बढ़त मिलने की उम्मीद जता रहे हैं. बीते स्थानीय निकाय चुनाव में भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को अच्छी सफलता मिली थी. ऐसे राज्य कांग्रेस में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर मतभेद उभरकर सामने आ गया है. ऐसे में एक कहावत याद आ रही है. वो कहावत है- गांव बसा नहीं लुटेरे पहले आ गए. कहने का मतलब यह है कि कांग्रेस इस वक्त बेहद बुरे दौर से गुजर रही है. इतने बड़े देश में उसकी केवल तीन राज्यों में सरकारें हैं. केरल से थोड़ी उम्मीद जगी है तो वहां अभी से सिरफुटौव्वल शुरू हो गया है.

दरअसल, चुनाव प्रचार शुरू होते ही यूडीएफ कैंपेन फिल्म में राहुल गांधी के करीबी सहयोगी केसी वेणुगोपाल को प्रमुखता से दिखाया गया, जिससे राज्य इकाई में अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या हाईकमान उनका समर्थन कर रहा है. राहुल गांधी ने पहले स्पष्ट कहा था कि सीएम का फैसला चुनाव के बाद लिया जाएगा. लेकिन कैंपेन फिल्म में वेणुगोपाल की प्रमुख उपस्थिति को कई नेता डिलिबरेट मैसेजिंग मान रहे हैं. वेणुगोपाल कांग्रेस के संगठन महासचिव हैं. वह हाल के महीनों में केरल में सक्रिय रहे हैं. उन्होंने विद्रोही और नाराज नेताओं के घर जाकर उन्हें पार्टी में वापस लाने का प्रयास किया. यह प्रयास यूडीएफ को एकजुट दिखाने और 2021 की हार के बाद बेस को मजबूत करने का हिस्सा माना जा रहा है.

केरल कांग्रेस का सीएम चेहरा विवाद

केरल कांग्रेस में सीएम पद की दौड़ में कई दावेदार हैं. पूर्व लीडर ऑफ अपोजिशन रमेश चेन्निथला लंबे समय से मजबूत दावेदार माने जाते हैं. वर्तमान लीडर ऑफ अपोजिशन वीडी सतीसन भी दौड़ में हैं और वे वेणुगोपाल के करीबी माने जाते हैं. अगर कांग्रेस किसी एमएलए को सीएम बनाना चाहे तो सतीसन आगे हो सकते हैं. शशि थरूर का नाम भी एक समय चर्चा में था, लेकिन हाईकमान के साथ विश्वास की कमी के कारण वे दौड़ से बाहर हो गए हैं. अन्य नामों में केरल प्रदेश अध्यक्ष के सुधाकरन और वरिष्ठ नेता के मुरलीधरन भी शामिल हैं. कांग्रेस ने जानबूझकर सीएम फेस घोषित नहीं किया है. पंजाब 2022 का उदाहरण सामने है, जहां चरणजीत सिंह चन्नी को पहले प्रोजेक्ट करने से पार्टी में फूट पड़ी और नुकसान हुआ. केरल में भी यही रणनीति अपनाई जा रही है. दूसरी ओर सत्तारूढ़ एलडीएफ के पास पिनाराई विजयन जैसे साफ चेहरा है, जो तीसरे कार्यकाल की कोशिश कर रहे हैं. पिनाराई की प्रशासनिक छवि और राजनीतिक पकड़ अभी भी मजबूत है, हालांकि एंटी-इनकंबेंसी और कुछ विवाद (जैसे गोल्ड स्मगलिंग मामले) उनके खिलाफ हैं.

केरल कांग्रेस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?

केरल कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. दशकों तक राज्य में सत्ता यूडीएफ और एलडीएफ के बीच बारी-बारी से बदलती रही. लेकिन 2021 में एलडीएफ ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर परंपरा तोड़ी. यूडीएफ उस समय उम्मीद से कम सीटें जीत पाया, जिससे कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत पर सवाल उठे. देशभर में कांग्रेस की सत्ता सीमित होने के कारण केरल उन कुछ बड़े राज्यों में से एक है जहां पार्टी अपनी मौजूदगी बनाए रखना चाहती है. यहां जीत न सिर्फ संगठनात्मक मनोबल बढ़ाएगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को मजबूती देगी.

आंतरिक फूट और चुनौतियां

केरल कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी की शिकार रही है. अलग-अलग गुट अलग-अलग नेताओं के पीछे खड़े हैं, जो पार्टी की एकता को नुकसान पहुंचाता रहा है. अगर यूडीएफ जीत भी जाता है तो सत्ता संभालना आसान नहीं होगा. कर्नाटक का उदाहरण सामने है, जहां कांग्रेस सत्ता में आई लेकिन गुटों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती बना रहा. वेणुगोपाल का बढ़ती सक्रियता कई नेताओं को अखर रहा है. कुछ का मानना है कि राहुल गांधी का करीबी होने के कारण उन्हें बाहरी छवि दी जा रही है, जबकि स्थानीय नेताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है.

एलडीएफ की ताकत और यूडीएफ की रणनीति

एलडीएफ की ओर से पिनाराई विजयन विकास, कल्याण योजनाओं और संकट प्रबंधन (जैसे बाढ़) पर जोर दे रहे हैं. वे तीसरे कार्यकाल के लिए आत्मविश्वास दिखा रहे हैं. यूडीएफ अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, रोजगार और भविष्य की दिशा पर फोकस कर रहा है. वेणुगोपाल ने यूडीएफ के लिए 100+ सीटों की भविष्यवाणी की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर फूट और टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष भी दिख रहा है.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें



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