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असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भारतीय जनता पार्टी के घोषणापत्र और मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के बयानों ने सियासी माहौल गरमा दिया है. सरमा ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करने की बात कही है, साथ ही पांच साल में इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने का दावा किया है.
असम की राजनीति में बीजेपी के घोषणापत्र से बढ़ी हलचल.
असम में चुनावी सरगर्मियां अपने चरम पर हैं और राजनीतिक बयानबाजी लगातार तीखी होती जा रही है. इसी बीच मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के बयान और बीजेपी का चुनावी घोषणापत्र सुर्खियों में है. सरमा ने साफ कहा है कि अगर भारतीय जनता पार्टी को फिर से जनादेश मिलता है, तो अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कानून लाया जाएगा, जिससे 24 घंटे के भीतर कार्रवाई संभव होगी. तो चलिए समझते हैं, क्या है 24 घंटे में ‘मियां मुसलमानों’ को बाहर करने की कहानी.
24 घंटे में कार्रवाई वाला कानून, क्या है पूरा प्लान?
मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने कहा कि सत्ता में वापसी के बाद “अवैध प्रवासी निष्कासन अधिनियम, 1950” के तहत जिला आयुक्तों को विशेष अधिकार दिए जाएंगे. इस कानून के जरिए कथित अवैध प्रवासियों की पहचान कर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज की जाएगी. बीजेपी का कहना है कि इससे राज्य की जमीन और संसाधनों की रक्षा होगी.
घोषणापत्र में 31 वादे, विकास और पहचान दोनों पर जोर
बीजेपी के “संकल्प पत्र” में 31 बड़े वादे किए गए हैं. इसमें मूल निवासियों की जमीन, विरासत और सम्मान की रक्षा को प्राथमिकता दी गई है. साथ ही राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 5 लाख करोड़ रुपये निवेश का ऐलान किया गया है.
UCC लागू करने का ऐलान, तीन महीने की समयसीमा
घोषणापत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की बात कही गई है. सरमा ने दावा किया कि सत्ता में आने के तीन महीने के भीतर इसे लागू कर दिया जाएगा, हालांकि आदिवासी और अन्य समुदायों के अधिकार सुरक्षित रखे जाएंगे.
‘मियां मुसलमान’ शब्द पर तेज हुई सियासत
सरमा के बयान में इस्तेमाल किए गए “मियां मुसलमान” शब्द ने सियासी विवाद खड़ा कर दिया है. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे समाज को बांटने वाला बयान बताया है. वहीं कांग्रेस नेता Gaurav Gogoi ने कहा कि चुनाव में इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.
बाढ़ मुक्त असम का दोहराया गया वादा
बीजेपी ने एक बार फिर पांच साल में असम को बाढ़ मुक्त बनाने का दावा किया है. इसके लिए शुरुआती दो वर्षों में 18,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है.





