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Rajasthan Board 12th result : धौलपुर के दिव्यांशु ने 12वीं कला वर्ग में 99.40% अंक हासिल कर शानदार सफलता पाई है. उनकी मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग ने इस मुकाम तक पहुंचाया. रात में घंटों पढ़ाई और सोशल मीडिया से दूरी ने उनकी तैयारी को मजबूत किया, जिससे वे आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं.
धौलपुर : राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं कक्षा के परिणाम में धौलपुर जिले के वनस्थली शिक्षा निकेतन विद्यालय के छात्र दिव्यांशु ने कला वर्ग में 99.40 प्रतिशत अंक हासिल कर शानदार सफलता प्राप्त की है. उनकी इस उपलब्धि से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है. दिव्यांशु की यह सफलता आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है. दिव्यांशु के पिता एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं. बेटे की इस कामयाबी पर उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि दिव्यांशु ने अपनी मेहनत, लगन और अनुशासन से परिवार का नाम रोशन किया है. दिव्यांशु का सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाकर समाज और गरीब लोगों की सेवा करना है.
दिव्यांशु अपनी सफलता का श्रेय नियमित पढ़ाई, माता-पिता के सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को देते हैं. उन्होंने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया जैसे इंस्टाग्राम और फेसबुक से पूरी तरह दूरी बना ली थी, ताकि उनका पूरा ध्यान पढ़ाई पर बना रहे. उन्होंने बताया कि स्कूल के शिक्षक रणनीति के तहत पढ़ाते थे और बार-बार रिवीजन कराते थे. विद्यालय में सीकर पैटर्न की तर्ज पर पढ़ाई होती थी, जिससे तैयारी मजबूत हुई. खासतौर पर राजकुमार तोमर सर के मोटिवेशन ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.
रात में करी पढ़ाई और मां के साथ से मिली सफलता
दिव्यांशु रोजाना 7 से 8 घंटे पढ़ाई करते थे और उन्होंने एक भी दिन पढ़ाई नहीं छोड़ी. दिन में शोर-शराबे के कारण वे रात में पढ़ाई करना पसंद करते थे. कई बार वे रात 2 बजे तक पढ़ते थे. नींद आने पर ठंडे पानी से मुंह धोकर फिर से पढ़ाई में जुट जाते थे. उनकी सफलता में उनकी मां का बहुत बड़ा योगदान रहा. जब तक दिव्यांशु रात में जागकर पढ़ते थे, उनकी मां भी जागती रहती थीं और उन्हें चाय बनाकर देती थीं.
100 में 100 अंक, मेहनत से चमके दिव्यांशु
पढ़ाई के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा उनके अंकों से लगाया जा सकता है. इतिहास, राजनीति विज्ञान और अंग्रेजी में उन्होंने 100 में से 100 अंक प्राप्त किए. इसके अलावा हिंदी अनिवार्य में 98 और भूगोल में 99 अंक हासिल किए. दिव्यांशु बताते हैं कि जब भी वे निराश होते थे, उनके दादाजी उन्हें IAS और IPS अधिकारियों की प्रेरणादायक कहानियां सुनाते थे, जिससे उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत मिलती थी. अन्य छात्रों को संदेश देते हुए दिव्यांशु ने कहा कि नियमित पढ़ाई, बार-बार रिवीजन और सोशल मीडिया से दूरी ही सफलता की कुंजी है. उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि मेहनत और अनुशासन से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
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A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at News18 India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें





