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पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर जारी बहस के बीच बड़ी बात कही है. उन्होंने बताया कि भारत को पाकिस्तान के साथ कैसे डील करना चाहिए.
भारत पाकिस्तान रिश्ते पर पूर्व विदेश सचिव का एनालिसिस.
भारत का पाकिस्तान के साथ रिश्ता कैसा होना चाहिए? क्या हमें कभी बात नहीं करनी चाहिए? या कोई रास्ता बचा है? इन सवालों का जवाब भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने दिया है. उन्होंने कहा, केवल गुस्से या मिटा देने वाली सोच ही समाधान नहीं है. निरुपमा राव का मानना है कि विदेश नीति में ‘गुस्सा’ एक मूड तो हो सकता है, लेकिन वह कभी एक ठोस नीति का रूप नहीं ले सकता. उनके अनुसार, भारत का असली ‘एंड गेम’ पाकिस्तान को मलबे में तब्दील करना नहीं, बल्कि उसे इतना मजबूर और डराकर रखना होना चाहिए कि वह भारत की प्रगति के रास्ते में रोड़ा न अटका सके. उन्होंने इसके लिए 4 तरीके बताए हैं.
पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि पाकिस्तान को ‘मलबे’ में मिला देना एक ऐसी कल्पना है, जिसकी खूब वकालत की जाती है. लेकिन हकीकत में ऐसा करना पूरे क्षेत्र और खुद भारत के लिए तबाही का सबब बन सकता है. दोनों देशों के पास परमाणु क्षमता है और यही न्यूक्लियर ज्योग्राफी हमें बताता है कि हमें हर पल गुस्सा नहीं दिखाना चाहिए. भारत की रणनीति का मुख्य आधार पाकिस्तान को उसकी औकात में रखना और भारत की आंतरिक मजबूती को बढ़ाना होना चाहिए.
दुश्मनों को मैनेज करना चाहिए
पाकिस्तान से डील के 4 तरीके
- सबसे पहले, आतंकवाद की कीमत को इतना बढ़ा दिया जाए कि पाकिस्तान के लिए इसे पालना नामुमकिन हो जाए. इसके लिए बॉर्डर मैनेजमेंट, खुफिया तंत्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक घेराबंदी जैसे रास्तों का इस्तेमाल जरूरी है.
- दूसरा, भारत के भविष्य पर पाकिस्तान को वीटो शक्ति से वंचित करना. भारत को कभी भी पाकिस्तान को यह ताकत नहीं देनी चाहिए कि वह हमारे भविष्य या विकास की रफ्तार को रोक सके. पाकिस्तान का सबसे बड़ा रणनीतिक जवाब एक मजबूत, अधिक एकजुट और अधिक समृद्ध भारत है.
- तीसरा, संघर्ष को मैनेज करें, उसे महिमामंडित या बढ़ा चढ़ाकर पेशन न करें. ऐसा करने से भविष्य में बड़ी सुलह करने का रास्ता मिल सकता है. हर बातचीत को क्रोध में परिणत नहीं किया जा सकता. सीजफायर मैकेनिज्म, बैक चैनल बातचीत, वॉटर सेफगार्ड, इमरजेंसी हेल्पलाइन और लिमिटेड बातचीत नरमी का संकेत नहीं होते. असल में ये हालात को कंट्रोल करने के हथियार हैं.
- और चौथा… बातचीत का मतलब भरोसा करना नहीं है, बल्कि यह सामने वाले को चेतावनी देने, संकेत समझने और बड़े संकट को टालने का एक जरिया है. कुल मिलाकर, निरुपमा राव का तर्क है कि भारत का अंतिम लक्ष्य एक ऐसा पाकिस्तान होना चाहिए जो इतना दबाव में हो कि वह भारत के भविष्य को पटरी से उतारने का साहस न कर सके.
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