नई दिल्ली: भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने रक्षा गलियारों में हलचल मचा दी है. नौसेना अलंकरण समारोह के दौरान उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के वक्त भारतीय नौसेना पाकिस्तान पर समुद्र से भीषण हमला करने के बिल्कुल करीब थी. पन्नों में दर्ज होने वाली यह सैन्य कार्रवाई महज कुछ मिनटों की दूरी पर थी लेकिन ऐन वक्त पर पाकिस्तान की ओर से कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई गई जिसके बाद रणनीतिक स्तर पर युद्ध के कदम थाम लिए गए. यह खुलासा न केवल भारतीय नौसेना की आक्रामकता को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि संकट के समय पाकिस्तान का मनोबल किस कदर टूट चुका था.
जब थर्रा उठा था पाकिस्तान
पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. एडमिरल त्रिपाठी के अनुसार नौसेना के युद्धपोत पूरी तरह मुस्तैद थे और स्ट्राइक का आदेश मिलने ही वाला था.
· दबाव में पाकिस्तान: जैसे ही भारतीय नौसेना ने समुद्र में घेराबंदी बढ़ाई पाकिस्तान को अपनी तबाही साफ दिखने लगी.
· राजनयिक संयम: पाकिस्तान के सैन्य कार्रवाई रोकने के अनुरोध के बाद उच्च स्तरीय विचार-विमर्श के बाद भारत ने संयम बरतने का फैसला किया.
· सम्मान: इस साहसी ऑपरेशन में अनुकरणीय सेवा के लिए एडमिरल ने दो नौसेना अधिकारियों को युद्ध सेवा पदक से सम्मानित भी किया.
होर्मुज संकट
एडमिरल त्रिपाठी ने केवल पुरानी यादें ही साझा नहीं कीं बल्कि वर्तमान वैश्विक संकट पर भी गंभीर चेतावनी दी. मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने समुद्री व्यापार की कमर तोड़ दी है. उन्होंने बताया:
· स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: युद्ध से पहले यहां से रोजाना लगभग 130 जहाज गुजरते थे लेकिन अब यह संख्या घटकर महज 6 से 7 रह गई है.
· फंसे हुए जहाज: इस संघर्ष के कारण लगभग 1,900 व्यापारी जहाज क्षेत्र में फंसे हुए हैं.
· समुद्री हमले: युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 20 से अधिक जहाजों पर हमले हो चुके हैं जो वैश्विक सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा है.
भारत की बढ़ती समुद्री ताकत
एडमिरल त्रिपाठी का यह बयान एक कड़ा संदेश है. ऑपरेशन सिंदूर का खुलासा यह साबित करता है कि भारत अब केवल सीमा पर रक्षात्मक नहीं रहता, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन के घर में घुसकर (समुद्र के रास्ते) मारने की पूरी क्षमता रखता है. पाकिस्तान का अनुरोध करना उसकी कमजोरी और भारतीय नौसेना के खौफ की तस्दीक करता है. वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के हालातों पर एडमिरल की टिप्पणी बताती है कि भारतीय नौसेना न केवल अपने हितों की रक्षा कर रही है बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा पर भी पैनी नजर रखे हुए है. भारत अब नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर की भूमिका में है, जो युद्ध और शांति—दोनों स्थितियों को नियंत्रित करने का दम रखता है.





