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Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती का पर्व आज देशभर में मनाया जा रहा है. आज व्रत रखकर विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और ग्रहों का अशुभ प्रभाव भी दूर होता है. आप हनुमानजी के पंचमुखी अवतार के बारे में तो जानते ही होंगे लेकिन क्या आपको जानकारी है आखिर हनुमानजी ने यह अवतार क्यों लिया था. आइए हनुमान जंयती पर जानते हैं इसके पीछे की कथा….
Hanuman Jayanti 2026: आज देशभर में हनुमान जयंती का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है, हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन अंजनी पुत्र हनुमान का जन्म हुआ था. हनुमानजी को भगवान शिव का अंश माना जाता है इसलिए वे शिवजी के रुद्रवतार भी कहे जाते हैं. पौराणिक कथाओं में हनुमानजी को शक्ति, भक्ति और साहस का प्रतीक माना गया है. लेकिन उनका पंचमुखी स्वरूप इन सब से भी अधिक चमत्कारी और दिव्य है. यह अवतार उस समय प्रकट हुआ, जब भगवान राम के जीवन पर एक घातक संकट आ गया था. आइए हनुमान जयंती के मौके पर जानते हैं आखिर हनुमानजी ने क्यों लिया था पंचमुखी अवतार…

पौराणिक कथा के अनुसार, राम-रावण युद्ध के बीच जब रावण की हार सुनिश्चित दिखने लगी, तब उसने अपने मायावी भाई अहिरावण को बुलाया. अहिरावण तंत्र-मंत्र और मायावी शक्तियों का महान साधक था और माता भवानी का कट्टर भक्त माना जाता था. वह पाताल लोक का स्वामी और छल-कपट में माहिर था. उसने मौका देखकर पूरी वानर सेना को गहरी नींद में सुला दिया और राम-लक्ष्मण का अपहरण कर पाताल लोक ले गया.

जब हनुमान जी को यह पता चला, तो वे क्रोध और चिंता से भर उठे. लेकिन अहिरावण को एक खास वरदान प्राप्त था कि उसे मारने के लिए पांच अलग-अलग दिशाओं में जल रहे पांच दीपकों को एक साथ बुझाना पड़ेगा. अब समस्या यह थी कि एक साथ पांच अलग दिशाओं में जलते दीपकों को कैसे बुझाया जाए? यही वह क्षण था, जब हनुमान जी ने अपना चमत्कारी और बेहद दुर्लभ पंचमुखी रूप धारण किया.
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इस पंचमुखी अवतार में हनुमानजी के पांच मुख थे: पूर्व दिशा में स्वयं हनुमान का मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, उत्तर में वराह मुख, दक्षिण में नृसिंह मुख और ऊपर की ओर हयग्रीव मुख. हर एक मुख में अलग शक्ति, अलग ऊर्जा और अलग उद्देश्य समाहित था. इस दिव्य रूप में प्रकट होकर हनुमान जी ने एक ही क्षण में पांचों दिशाओं में स्थित पांचों दीपकों को बुझा दिया और अहिरावण का वध कर दिया. इस तरह वे राम और लक्ष्मण को मुक्त कराकर सुरक्षित बाहर ले आए.

इस घटना का महत्व सिर्फ इतना नहीं कि हनुमान जी ने एक राक्षस का संहार किया, बल्कि इससे यह भी सिद्ध हो गया कि जब धर्म, सुरक्षा और भक्ति पर संकट आता है, तो हनुमान जी का हर स्वरूप अपने भक्तों के लिए सक्रिय हो जाता है.

पंचमुखी हनुमान का अर्थ है सभी दिशाओं से सुरक्षा. यह रूप इस बात का प्रतीक है कि चाहे मुसीबत कहीं से भी क्यों न आए, हनुमान जी अपनी अनंत शक्तियों से उसे नष्ट कर सकते हैं. गरुड़ मुख भय और विष से रक्षा करता है, वराह मुख धन और आयु प्रदान करता है, नृसिंह मुख संकटों को खा जाता है और हयग्रीव मुख ज्ञान का मार्ग खोल देता है.

भक्त मानते हैं कि पंचमुखी हनुमान का ध्यान या पूजा करने से घर में नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं, भय और चिंताएं समाप्त होती हैं और जीवन में आत्मविश्वास व साहस बढ़ता है. यही कारण है कि इस स्वरूप की पूजा को अत्यंत शक्तिशाली माना गया है.





