बलिया: सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद करने वालों की कमी नहीं है. बात अगर जनपद बलिया की करें, तो सागर पाली का एक फेमस चेहरा बहुत चर्चा में रहता है. कभी गोद में सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को जिला अस्पताल लेकर पहुंच जाता है, तो कभी ट्रेन दुर्घटना में घायल लोगों की मदद में जुट जाता है. अगर कहीं भी सड़क सुरक्षा की बात हो, तो मुन्ना बहादुर का नाम सबसे पहले लिया जाता है. लगभग 10 हजार से ऊपर लोगों का जान बचाने वाले मुन्ना बहादुर लगभग 24 साल की उम्र से ही इसमें लग गए हैं. अब तो यह सब मुन्ना बहादुर के जीवन का अहम हिस्सा बन गया है. आगे विस्तार से जानते हैं..
कौन हैं समाजसेवी मुन्ना बहादुर
सागरपाली निवासी समाजसेवी मुन्ना बहादुर ने कहा कि अगर इंसान हैं, तो मानवता और इंसानियत में काम न किया जाए, तो जीना बेकार है. जब मुन्ना बहादुर 24 साल के थे तब से वह सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की जान बचाते आ रहे हैं. मुन्ना बहादुर मौके पर 112 नंबर से पहले पहुंचते हैं. सड़क सुरक्षा में मुन्ना बहादुर लगभग 10 हजार से अधिक लोगों की जिंदगी को बचाई है. एक बार बलिया शहर के तरफ बस और फेफना की ओर से डीसीएम आ रहा था, वायना पानी टंकी के करीब दोनों में आमने-सामने टक्कर हो गई, जिसमें डीसीएम वाले का पूरा शरीर स्टेयरिंग से फंस गया था, सांसे चल रही थी और छटपटाहट थी. उस दौरान मुन्ना बहादुर ने अपनी पूरी ताकत लगाकर गाड़ी वाले को बाहर निकला, जिसमें इनके शरीर में भी के कई जगह शीशे धंस गए थे.
लोगों की मदद करके मिलती है खुशी
लोगों की जान बचाकर और उनकी मदद करके मुन्ना को खुशी मिलती है. सड़क दुर्घटना के अलावा, मुन्ना बहादुर ट्रेन दुर्घटना में घायलों की भी जान बचाते हैं. लगभग 15 साल पहले ट्रेन से एक युवक घायल हो गया था, जिसे डर के मारे कोई टच नहीं कर रहा था, तो मुन्ना ने आगे बढ़कर जिला अस्पताल ले जाकर इलाज कराया.
बुजुर्ग अनिल कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि एक बार वह मध्यप्रदेश से सारनाथ से बलिया आ रहे थे कि अचानक सागरपाली स्टेशन पर गिर गए, सूचना मिलते ही मुन्ना बहादुर पहुंचे और इन्हें जिला अस्पताल ले गए. रेफर के बाद BHU भी साथ गए और इस बाबा को जरूरत पड़ने पर मुन्ना बहादुर ने खून भी दिया. बाबा ने आगे कहा कि मुन्ना के ब्लड से ही आज वह जीवित हैं.
लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े हैं मुन्ना
सुनील कुमार सिंह ने कहा कि मुन्ना बहादुर के बारे में जो कुछ कहा जाए, वह कम है. केवल सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि हर सुख दुःख में मुन्ना बहादुर बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं. सड़क पर कोई दुर्घटना हो गई, तो सबसे पहले मुन्ना बहादुर पहुंचते हैं. ट्रेन दुर्घटना में ही डेड बॉडी को बटोरने में हिचकते नहीं हैं.




