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India Defense Exports: पिछले कुछ सालों में भारत एक बड़े ग्लोबल डिफेंस सप्लायर के रूप में उभरा है. सरकार की नीतियों और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी ने भारत की सैन्य ताकत को व्यापारिक मजबूती दी है. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और पिनाक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर जैसे हथियारों ने इंटरनेशनल मार्केट में भारत की धाक जमा दी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारत की डिफेंस एक्सपोर्ट की सक्सेस स्टोरी बताया है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 38,424 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े पर पहुंच गया है. पिछले साल यह आंकड़ा 23,622 करोड़ रुपये था. यानी एक साल में इसमें 62.66 परसेंट का बड़ा उछाल आया है. यह दिखाता है कि दुनिया अब भारत की टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर भरोसा कर रही है.
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत अब 80 से ज्यादा देशों को सैन्य उपकरण एक्सपोर्ट कर रहा है. रजिस्टर्ड डिफेंस एक्सपोर्टर्स की संख्या भी 128 से बढ़कर 145 हो गई है. यह बदलाव साफ संकेत है कि भारत अब एक आत्मविश्वास से भरे निर्यातक के रूप में दुनिया के सामने खड़ा है. इसमें सरकारी कंपनियों का योगदान 54.84 परसेंट रहा है, जबकि प्राइवेट सेक्टर ने भी शानदार प्रदर्शन किया है. (इंफोग्राफिक : रक्षा मंत्रालय/X)

भारत और रूस के जॉइंट वेंचर से बनी ब्रह्मोस मिसाइल इस समय दुनिया की सबसे पसंदीदा मिसाइलों में से एक है. फिलीपींस ने इसके लिए भारत के साथ करीब 375 मिलियन डॉलर की बड़ी डील की है. वियतनाम के साथ भी 700 मिलियन डॉलर की डील अंतिम चरण में है. इसकी रफ्तार और सटीक निशाना इसे दुनिया की अन्य मिसाइलों से अलग बनाता है. मलेशिया, यूएई और सऊदी अरब जैसे 16 देश इसे अपनी सेना में शामिल करना चाहते हैं. (File Photo : PTI)

पिनाक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ने भी ग्लोबल मार्केट में तहलका मचा रखा है. फ्रांस जैसे विकसित देश भी पिनाक को खरीदने के लिए भारत से बातचीत कर रहे हैं. अगर यह डील होती है, तो यह पहली बार होगा जब फ्रांस भारत से कोई रॉकेट लॉन्चर खरीदेगा. आर्मेनिया और वियतनाम भी पिनाक की मारक क्षमता के कायल हैं. इसकी 90 किलोमीटर की रेंज और ऊंचाई वाले इलाकों में सटीकता इसे खास बनाती है. (File Photo : PTI)
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आकाश मिसाइल सिस्टम कम कीमत में बेहतरीन एयर डिफेंस की सुविधा देता है. आर्मेनिया ने पहले ही भारत के साथ 600 मिलियन डॉलर का करार किया है. फिलीपींस भी 200 मिलियन डॉलर में इसे खरीदने की तैयारी में है. पश्चिमी देशों के महंगे सिस्टम के मुकाबले आकाश एक किफायती और भरोसेमंद विकल्प है. ब्राजील और मिस्र जैसे देश भी भारत की इस स्वदेशी टेक्नोलॉजी में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. (File Photo : PTI)

मिसाइलों के अलावा भारत रडार और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है. आर्मेनिया भारत से ‘स्वाति’ वेपन लोकेटिंग रडार खरीद रहा है. मॉरीशस को भारत ने एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर और डॉर्नियर विमान दिए हैं. वहीं फ्रांस जैसा देश भारत से डिफेंस सेक्टर के लिए सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले रहा है. अमेरिका भी अपने एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर के पार्ट्स के लिए भारतीय कंपनियों पर निर्भर हो रहा है. (AI Photo)

विदेशी खरीदारों का भारत की तरफ झुकाव होने के पीछे कई बड़े कारण हैं. सबसे बड़ी वजह भारतीय हथियारों की कम कीमत और उच्च क्वालिटी है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में 155 एमएम के आर्टिलरी शेल की कीमत 3,000 डॉलर से ज्यादा है. वहीं भारत इसे मात्र 300 से 400 डॉलर में उपलब्ध करा रहा है. कीमत का यह बड़ा अंतर भारत को ग्लोबल मार्केट में एक मजबूत खिलाड़ी बनाता है. (File Photo : PTI)

भारतीय हथियारों का परीक्षण हिमालय की ठंड और रेगिस्तान की गर्मी जैसे कठिन हालातों में हुआ है. यह बात विदेशी सेनाओं को भरोसा दिलाती है कि ये हथियार हर मौसम में काम करेंगे. सरकार की आसान नीतियां और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ ने एक्सपोर्ट की राह आसान की है. भारत अब दुनिया के सामने रूस और पश्चिमी देशों के मुकाबले एक बेहतर और सस्ता विकल्प बनकर उभरा है. (AI Photo)





