18.5 C
Munich

राजा 28 सालों तक टालता रहा भारत में विलय, आखिरकार नाराज जनता ने ये काम करा दिया

Must read


26 अप्रैल1975 वो दिन था, जब सिक्किम की सारी जनता को एक बड़ी जीत मिली थी. जनमत संग्रह हुआ. भारी संख्या में सिक्किम की जनता ने भारत में विलय के लिए मतदान किया. इसके बाद वो भारत का 22वां राज्य बना. हालांकि वहां के राजा ने 28 सालों तक तमाम तिकड़मे भिड़ा अपने राज्य को भारत में मिलने से रोके रखा. कैसे सिक्किम भारत में मिला, इसकी भी एक कहानी है. ये भी कहना चाहिए कि चीन भी नजर भी भारत के इस राज्य पर लगी हुई थी.

सिक्किम के राजा को चोग्याल कहा जाता है. तो यहां के चोग्याल ने हर वो काम करने की कोशिश की कि सिक्किम का कंट्रोल उसके हाथों में ही बना रहे, भारत के पास जाए ही नहीं. चोग्याल की कारस्तानियों को जनता समझने लगी थी. मन से वह भारत में मिलना चाहती थी. आखिरकार वो दिन आया जब नाराज जनता ने जब सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया.

आजादी से पहले सिक्किम स्वायत्त राज्य था. यह स्टेटस उसे ब्रिटेन ने दे रखा था. सिक्किम में राजतंत्र था. ब्रिटेन से उसका ये समझौता था कि राज्य का आंतरिक प्रशासन को राजा के पास रहेगा लेकिन उसकी विदेश और रक्षा के कामों को ब्रिटिश भारत देखेगा. जब 1947 में भारत आजाद हुआ, तब सिक्किम के नेता भारत में मिलना चाहते थे लेकिन ऐसा हो नहीं सका.

चोग्यालों ने सिक्किम पर लंबा शासन किया, ये 1642 से 1975 तक चला यानि 200 सालों से कहीं ज्यादा. सभी चोग्याल नामग्याल राजवंश के थे. “चोग्याल” का अनुवाद “धर्मी राजा” होता है. सिक्किम के अंतिम चोग्याल पाल्डेन थोंडुप नामग्याल थे.

अंग्रेजों ने इसे संरक्षित राज्य बनाया

सिक्किम को 1861 में अंग्रेजों द्वारा एक संरक्षित राज्य बनाया था. राज्य के आंतरिक मामलों का प्रबंधन स्थानीय निकायों द्वारा किया जाता था. आजादी के बाद भारत ने भी वही जिम्मेदारियां निभानी शुरू कीं. सिक्किम को सभी घरेलू मामलों पर स्वायत्तता हासिल थी लेकिन रक्षा, संचार और विदेशी मामलों का प्रबंधन भारत द्वारा होता था.

1947 में भारत की आज़ादी के तीन साल बाद, सिक्किम भारत का संरक्षित राज्य बन गया. 1950 में तत्कालीन सिक्किम सम्राट ताशी नामग्याल और सिक्किम में भारत के तत्कालीन राजनीतिक अधिकारी हरिश्वर दयाल के बीच एक संधि पर हस्ताक्षर किए गए. चोग्याल वहां के शासक बने रहे, लेकिन एक काउंसिल भी बना दी गई, जिसे जनता द्वारा चुना जाता था, ये 1953 से 1973 तक काम करती रही. ये लोकतांत्रिक प्रक्रिया थी.

1962 में भारत और चीन का युद्ध हो गया. उसने भी सिक्किम के भारत में विलय को ना केवल देर की बल्कि ये भी कहा जाने लगा कि चीन की नजर इस राज्य पर है, इस पर वो अपना मालिकाना हक जताने लगा.

चीन ने शुरू कर दीं चालें

इस बीच सिक्किम का वो बूढ़ा चोग्याल ताशी नामग्याल 1963 में कैंसर से मर गया, जिसने भारत में विलय के बीच लगातार रुकावटें पैदा की थीं. अब उसका बेटा पाल्देन थोंदुप नामग्याल को चोग्याल बनाया गया, वो आखिरी चोग्याल साबित हुआ. जब वो गद्दी पर बैठा ही था कि चीन ने सिक्किम को मिलाने के लिए चालें चलनी शुरू कर दीं.

1967 में चीन ने अपने सैनिकों को सिक्किम पर दावा करने भेज दिया. लड़ाई हुई. भारत जमकर लड़ा. चीनियों को मात दी. इस लड़ाई को ‘चोला की घटना’ कहा जाता है. इसके बाद चीन ने सिक्किम पर अपना दावा कुछ वक्त के लिए छोड़ दिया. 1973 में चोग्याल के महल के सामने राजतंत्र विरोधी दंगे हुए, जिसके बाद ये समझ आने लगा कि जल्द ही हालात संभालने के लिए भारत सरकार को इसमें कूदना पड़ेगा.

राजतंत्र के खिलाफ गुस्सा बढ़ने लगा

दरअसल 1950 के दशक से ही सिक्किम में चोग्यालों के खिलाफ नाराजगी बढ़ने लगती थी, ये 1970 तक चरम पर पहुंच गई. दरअसल वहां असमानता तो बढ़ ही रही थी, साथ ही सामंती नियंत्रण भी लोगों में गुस्सा पैदा कर रहा था लेकिन चोग्याल हर तिकड़म से शासन से चिपके हुए थे.

भारत को भी अंदाज था कि अगर सिक्किम में अस्थिरता बढ़ी, तुरंत चीन अपनी टांग अड़ाएगा. चीन पहले से ही कहता रहा था कि सिक्किम तिब्बत का भाग था इसलिए उस पर चीन का दावा बनता है.

सरकार से चोग्याल की ठनी

भारत सरकार ने एमएस दास को चीफ एडमिनिस्ट्रेटर बनाकर वहां भेजा, असल में उनका काम था चोग्याल से शासन अपने हाथ ले लेना. वहीं चोग्याल के संबंध अपनी काउंसिल के प्रधानमंत्री काजी से भी तनावपूर्ण चल रहे थे. सारा सरकारी काम-काज ठप्प चल रहा था. काउसिंल ऑफ मिनिस्टर्स राजतंत्र के खात्मे पर एकमत थी.

4 अप्रैल, 1975 को चोग्याल पाल्डेन थोंडुप नामग्याल के जन्मदिन पर सिक्किम में राज्य प्रायोजित विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. हिंसा होने लगी. राजा भीड़ और दंगों को नियंत्रित करने में असमर्थ थे. तब भारत ने वहां सेना भेजी.

सेना ने महल पर कंट्रोल कर लिया

सेना ने चोग्याल के महल अपने कब्जे में ले लिया. इसके बाद इंडियन रिजर्व पुलिस फोर्स की टुकड़ी ने गंगटोक की गलियों पर नियंत्रण कर लिया. बॉर्डर बंद कर दिए गए. प्रधानमंत्री दोरजी ने 1975 में सिक्किम की स्थिति को बदलकर उसे भारत में शामिल करने की सिफारिश कर दी. 14 अप्रैल 1975 को एक जनमत संग्रह हुआ. 26 अप्रैल 1975 को आए जनमत के फैसले ने निश्चित कर दिया कि सिक्किम भारत का 22वां राज्य होगा.

16 मई 1975 को उसे आधिकारिक तौर पर भारत का राज्य घोषित किया गया. ल्हेंदुप दोरजी वहां के मुख्यमंत्री बने. सिक्किम में राजतंत्र का अंत हो गया. तो सिक्किम ऐसा राज्य था जहां जनता ने गुस्सा दिखाकर इसका विलय भारत में कराया.

सिक्किम में हिंदू बहुसंख्यक

2011 की जनगणना के अनुसार, सिक्किम में हिंदू धर्म सबसे अधिक प्रचलित धर्म है, उसके बाद बौद्ध धर्म है. हालांकि सिक्किम के परिदृश्य पर अधिकतर बौद्ध धर्म ही छाया हुआ है. राज्य में बौद्ध धर्म का वज्रयान स्कूल व्यापक रूप से प्रचलित है. बौद्ध धर्म के इस रूप को तांत्रिक बौद्ध धर्म के रूप में भी जाना जाता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसकी उत्पत्ति भारत-तिब्बत क्षेत्र में हुई थी. सिक्किम में ईसाई धर्म तीसरा सबसे लोकप्रिय धर्म है. 2001 और 2011 के बीच, ईसाई धर्म इस क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाला धर्म था.



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article