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Millet farming disappeared ground report: भागलपुर के शंकरपुर दियारा में बाढ़ ने मोटे अनाज की खेती को बर्बाद कर दिया है. पहले यहां गेहूं, मक्का, मटर, सरसों के बाद खेड़ी, चीना, माढो, कोदो जैसे मोटे अनाज उगाए जाते थे, लेकिन फरक्का बांध के कारण बाढ़ आ जाती है और फसल बर्बाद हो जाती है. किसान एक फसल लेकर छोड़ देते हैं, सरकार से मदद की गुहार है. सरकार को इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए.
भागलपुर. मोटा अनाज लोगों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. ऐसे में सरकार इसको उगाने के लिए किसानों को तरह-तरह का योजना भी दे रही है, ताकि मोटे अनाज की पैदावार बढ़े और किसानों की आमदनी दो गुनी हो जाए. लेकिन जहां पहले से मोटे अनाज की उपज हुआ करती थी आज वहां वो पूरी तरीके से बर्बाद हो गई और सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है. जहां किसानों की दो फसल उपज होती थी आज वहां एक फसल उपज होने लगी इसकी मुख्य वजह बाढ़ बताई जाती है.
लोकल 18 की टीम भागलपुर का शंकरपुर दियारा क्षेत्र पहुंची. यह करीब 10 हजार से अधिक की आबादी वाला क्षेत्र है. यहां कई किसानों से मुलाकात हुई तो उन्होंने बताया कि देखिए यहां पहले दो फसल हुआ करती थी अभी गेहूं मक्का मटर सरसों की उपज हो जाती थी इसके तुरंत बाद मोटा अनाज उपजा लेते थे. जिसमें खेड़ी, चीना, माढो, कोदो, समेत कई तरह की खेती कर लेते थे. उस समय किसानों को फसल की उपज कम भी होती तो कर्ज में नहीं डूबते थे लेकिन जब से फरक्का को बांध दिया गया है तब से गंगा भर जाती और हम लोगों के इलाके में तुरंत पानी प्रवेश कर जाता है. जिससे पूरी फसल बर्बाद हो जाती है. अब सब्जी लगाते हैं तो रिस्क लेकर ही कई बार बीज और खाद का दाम ऊपर होते-होते डूब जाता है. कई बार पहले भी डूब जाता है. कई किसान तो एक फसल लेकर छोड़ देते हैं. सरकार को हम लोगों पर ध्यान देना चाहिए ताकि यहां भी मोटे अनाज की खेती फिर से हो पाए.
हर साल डूबता है भागलपुर
आपको बता दें कि भागलपुर के कई इलाके हर साल बाढ़ के कारण डूब जाते हैं. जिससे सबसे अधिक नुकसान किसानों को होता है. वहां के किसानों ने बताया कि यहां पर मोटे अनाज की जब उपज होती तो उसके अच्छे दाम मिल जाते थे जिससे आमदनी दोगुनी हो जाती थी. इसी से साल भर सब कुछ हो जाता था. यहां तक उस समय शादी विवाह के लिए कर्ज नही लेना पड़ता था लेकिन आज स्थिति दैनिय हो गई है. फरक्का को खोल दिया जाए तो यहां का गाद अपने आप हट जाएगा जिससे बिहार कम डूबेगा और किसानों की क्षति कम होगी.
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