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Sugar Price : भारी बारिश और गन्ने के उत्पादन में आई गिरावट से देश में चीनी का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है. महाराष्ट्र और कर्नाटक में तो सभी चीनी मिलें अभी से ही बंद हो चुकी हैं, जिसका असर आने वाले समय में चीनी की कीमतों पर दिखेगा और इस साल दाम बढ़ सकते हैं.
देश में चीनी का उत्पादन लगातार दूसरे साल घटने की आशंका है.
नई दिल्ली. भारत में चीनी उत्पादन लगातार दूसरे साल खपत से कम रहने की संभावना है. इस साल भी गन्ने की कम पैदावार के चलते मिलें सामान्य रूप से पहले बंद हो रही हैं. मामले से जुड़े उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि कम उत्पादन और बढ़ते निर्यात के कारण घरेलू भंडार घट सकते हैं और इससे स्थानीय बाजार में चीनी की कीमतों में उछाल देखा जा सकता है. इसका सीधा मलतब है कि आने वाले समय में घरेलू बाजार में चीनी का भाव बढ़ सकता है.
मुंबई स्थित एक वैश्विक व्यापार कंपनी के भारत प्रमुख ने कहा कि इस सीजन में चीनी उत्पादन 2.8 करोड़ मीट्रिक टन से ज्यादा होने की संभावना नहीं है. अधिकतर चीनी मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं, केवल कुछ ही अभी चालू हैं, जो आने वाले हफ्तों में बंद हो जाएंगी. सीजन की शुरुआत में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) सहित उद्योग संगठनों ने 3.1 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया था, जबकि घरेलू मांग 2.9 करोड़ टन के बीच थी.
क्यों कम हो रही गन्ने की पैदावार
उद्योग जगत का कहना है कि अत्यधिक बारिश के कारण गन्ने की पैदावार कम रही और इस साल शुरू हुई 541 मिलों में से 467 मिलें मार्च के अंत तक बंद हो गईं. एनएफसीएसएफ के आंकड़ों के अनुसार. पिछले साल इसी समय तक 420 मिलें बंद हुई थीं. इस लिहाज से देखा जाए तो चालू वर्ष में अब तक बंद होने वाली मिलों की संख्या पिछले साल के मुकाबले कहीं ज्यादा है और इसका सीधा असर चीनी की पैदावार पर दिखेगा, जो बाद में उसकी कीमतें बढ़ने का कारण बन सकता है.
कितना रहा इस साल उत्पादन
एनएफसीएसएफ के आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय चीनी मिलों ने 2025/26 विपणन वर्ष की पहली छमाही में 2.71 करोड़ टन चीनी का उत्पादन किया, जो पिछले साल की तुलना में 9% ज्यादा है. नई दिल्ली स्थित एक वैश्विक व्यापार कंपनी के डीलर ने कहा कि देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र और तीसरे बड़े उत्पादक राज्य कर्नाटक में लगभग सभी मिलें अनुमान से पहले ही बंद हो गई हैं. सरकार ने बड़े सरप्लस की उम्मीद में निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन अब यह तय है कि उत्पादन घरेलू खपत को भी पूरा नहीं कर पाएगा.
बढ़ा दिया था निर्यात का कोटा
फरवरी में भारत ने चीनी निर्यात कोटा बढ़ाकर 20 लाख टन कर दिया था, जिसमें पहले से मंजूर 15 लाख टन में 5 लाख टन और जोड़े गए थे. पिछले साल उत्पादन में गिरावट के बाद उद्योग इस सीजन में भंडार बढ़ाने और सरप्लस निर्यात की उम्मीद कर रहा था, लेकिन कम उत्पादन के कारण अगले सीजन के लिए शुरुआती भंडार भी कम रहेंगे. मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि इस सीजन की शुरुआत 50 लाख टन के शुरुआती भंडार के साथ हुई थी, लेकिन अगला सीजन 40 लाख टन से भी कम भंडार के साथ शुरू होगा. इससे चीनी की कीमतों में निश्चित रूप से बढ़ोतरी देखी जा सकती है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें





