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Lucas Drone Like Meghanad Akashchari : ईरान युद्ध में अमेरिका बड़े पैमाने पर लुकास ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. लुकास ड्रोन आसमान में 6 घंटे तक लगातार उड़ सकता है और इसमें अदृश्य होने की भी शक्ति होती है. इतना ही नहीं यह उपर से अपने जीपीएस पर आधारित टारगेट को ध्वस्त करता है. हमारे पौराणिक कथाओं में इस तरह के कई अस्त्र हैं. मेघनाथ के पास भी आकाशचारी रथ था जो कमोबेश इसी लुकास ड्रोन की तरह था बल्कि कई मामलों में लुकास से भी ज्यादा आक्रामक था.
मेघनाद को ब्रह्मा जी से मिला था आकाशचारी रथ.
ईरान युद्ध जब से शुरू हुआ है तब से अमेरिका का लुकास ड्रोन गदर मचा रहा है. माना जा रहा है कि लुकास ड्रोन से ईरान में भयंकर तबाही हो रही है. खास बात यह है कि लुकास ड्रोन को बनाने में कम लागत लगती है और यह 6 घंटे तक आसमान में दुश्मन का टोह लेते हुए उसके ठिकानों को निशाना बना सकता है. इस तरह लुकास एक तरह से स्टील्थ कैपिसिटी का ड्रोन है. लेकिन अगर हम अपने पौराणिक कथाओं पर ध्यान दें तो हमारे देवी-देवताओं के पास इससे भी घातक अस्त्र-शस्त्र थे जो अदृश्य होकर आक्रामक प्रहार करने में माहिर थे. रावण का पुत्र मेघनाद के पास कमोवेश लुकास ड्रोन के तरह ही आकाशचारी रथ था जो आसमान में अदृश्य हो जाता था. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस रथ पर सवार होकर मेघनाद किसी से भी युद्ध नहीं हार सकता था.
मेघनाद के पास था आकाशचारी ड्रोन
लुकास ड्रोन पारंपरिक फाइटर जेट की तरह नहीं है. इसमें फ्लाइंग विंग डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है. यानी इसमें पूंछ नहीं होती, जिससे रडार की किरणें टकराकर वापस नहीं जातीं, बल्कि बिखर जाती हैं. इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि लुकास ड्रोन लो-ऑब्जर्वेबल या स्टील्थ तकनीक का है जिसे कोई मशीन पकड़ नहीं सकता है कि ड्रोन कहां है. एक तरह से यह अदृश्य की तरह होकर दुश्मन पर वार करते हैं. अब बात करते हैं मेघनाद के आकाशचारी रथ के बारे में. मेघनाद के पास जो आकाशचारी रथ था वह उस काल के सबसे उन्नत युद्धक यंत्रों में से एक था. आकाशचारी आज के लुकास ड्रोन की तरह ही था जो आकाश में अदृश्य होकर दुश्मन को चकमा देता था. इसके साथ ही यह यह अपने टारगेट को ढूंढकर उसे खत्म करती थी. जिस तरह लुकास ड्रोन आसमान में 6 घंटे तक उड़ सकता था उसी तरह आकाशचारी रथ एक ही जगह पर स्थिर रहकर नीचे मौजूद सेना पर सटीक हमला कर सकता था.
आकाशचारी से अग्नि, वायु और बिजली जैसा प्रहार
मेघनाद का यह आकाशचारी रथ आज के किसी सुपरसोनिक जेट या स्टील्थ ड्रोन से कम नहीं था. इस रथ की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि इस रथ पर बैठा मेघनाद बादलों की ओट में छुप जाता था. ऐसा मंत्रशक्ति से होती थी. वह आकाश में रहकर युद्ध करता था लेकिन नीचे खड़े दुश्मन को वह और उसका रथ दिखाई नहीं देते थे.जिस तरह लुकास ड्रोन रडार को चकमा देता है उसी तरह मेघनाद का रथ आसुरी माया से आंखों के सामने ओझल हो जाता था. आकाशचारी रथ की गति बहुत ज्यादा थी. ऐसा कहा जाता है यह आकाशचारी रथ मन की गति से चलता था और कभी भी दिशा बदल सकता था. रथ पर दिव्य अस्त्रों का भंडार था जो कभी खत्म नहीं होते थे. इसमें से अग्नि, वायु और बिजली जैसे प्रहार किए जा सकते थे. यह रथ एक ही जगह पर स्थिर रहकर नीचे मौजूद सेना पर सटीक हमला कर सकता था. मेघनाद को वरदान प्राप्त था कि इस रथ पर बैठकर जब वह युद्ध करेगा तो कोई उसे परास्त नहीं कर सकेगा.
मेघनाद को कैसे मिला था यह रथ
मेघनाद को यह दिव्य रथ और शक्तियां भगवान ब्रह्मा से वरदान में मिली थी. इसके लिए उन्होंने घनघोर तपस्या और यज्ञ किया था. मेघनाद ने अपनी कुलदेवी निकुंभला की घोर उपासना की थी. उसने सप्त ऋषियों से विधिवत दीक्षा ली और सात महान यज्ञ किए इसमें अश्वमेध, बहुसुवर्ण, राजसूय, गोमेध, वैष्णव, माहेश्वर और अग्निष्टोम यज्ञ किए.मेघनाद की कठिन तपस्या और यज्ञों से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे अजेय होने का वरदान दिया और उसे एक दिव्य रथ प्रदान किया और कहा कि इस रथ पर सवार होकर जब तुम युद्ध करोगे तो तुम्हें संसार में कोई नहीं हरा सकता. हालांकि ब्रह्मा जी ने इसके लिए एक शर्त भी रख दी. ब्रह्मा जी ने कहा इस रथ पर सवार होकर युद्ध करने से पहले तुम्हें निकुंभला यज्ञ करना होगा. अगर यह यज्ञ पूरा होकर तुम रथ पर सवार होगे तो संसार का कोई योद्धा तुम्हें पराजित नहीं कर सकेगा लेकिन अगर यह यज्ञ बिना पूरा हुए रथ पर सवार होगे तो मनवांछित इच्छाएं पूरी नहीं होगी. इसी शर्त का फायदा उठाकर लक्ष्मण ने मेघनाथ के निकुंभला यज्ञ पूर्ण नहीं होने दिया और इसके बाद मेघनाद का वध कर दिया.
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18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें





