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Bhagwant Mann Vs Raghav Chadha News: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राघव चड्ढा को लेकर दिए बयान में अपने लोकसभा अनुभव का हवाला दिया. उन्होंने बताया कि कैसे पहले धर्मवीर गांधी को नेता बनाया गया और बाद में उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई. मान ने कहा कि पार्टी के फैसलों और व्हिप का पालन करना हर नेता के लिए जरूरी है नहीं तो कार्रवाई हो सकती है.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राघव चड्ढा को लेकर दिए बयान में अपने लोकसभा अनुभव का हवाला दिया.
नई दिल्ली. पंजाब की राजनीति में इन दिनों आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर नेतृत्व और अनुशासन को लेकर चर्चा तेज है. इसी बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर दिए बयान में अपने पुराने संसदीय अनुभव का उदाहरण देते हुए पार्टी लाइन और अनुशासन का संदेश दिया है. भगवंत मान ने साफ कहा कि राघव चड्ढा ने जो बयान दिया है उसका जवाब भी वही दे सकते हैं लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी को सदन का नेता बनाना या हटाना पूरी तरह पार्टी का आंतरिक मामला होता है. इस दौरान मान ने अपने लोकसभा के दिनों को याद करते हुए एक अहम उदाहरण सामने रखा.
लोकसभा में भगवंत मान के साथ क्या हुआ था?
भगवंत मान ने बताया कि जब वह लोकसभा सदस्य थे तब शुरुआत में पार्टी की ओर से धर्मवीर गांधी को सदन में नेता बनाया गया था. लेकिन बाद में पार्टी ने नेतृत्व में बदलाव करते हुए धर्मवीर गांधी की जगह खुद भगवंत मान को यह जिम्मेदारी सौंप दी. यह बदलाव पार्टी के अंदरूनी फैसले के तहत हुआ था और इसे सभी सांसदों को मानना पड़ा. मान ने इसी उदाहरण के जरिए यह समझाने की कोशिश की कि राजनीति में ऐसे बदलाव सामान्य होते हैं और इन्हें व्यक्तिगत नहीं बल्कि संगठनात्मक फैसले के रूप में देखना चाहिए.
पार्टी लाइन और व्हिप का पालन क्यों जरूरी?
मुख्यमंत्री मान ने अपने बयान में यह भी कहा कि जब कोई पार्टी विपक्ष में होती है तो सदन में लिए गए फैसलों का सभी सदस्यों को पालन करना होता है. उन्होंने कहा कि अगर कोई पार्टी की लाइन से हटकर चलता है या व्हिप के खिलाफ जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना तय है. यह बयान सीधे तौर पर पार्टी अनुशासन की अहमियत को रेखांकित करता है. भारतीय संसदीय व्यवस्था में व्हिप का उल्लंघन करना गंभीर मामला माना जाता है जिससे सदस्यता तक पर असर पड़ सकता है.
राघव चड्ढा को क्या संदेश?
भगवंत मान का यह पूरा बयान राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार एक तरह से अप्रत्यक्ष संदेश है. उन्होंने बिना सीधे टकराव के यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी के फैसले सर्वोपरि होते हैं और हर नेता को संगठनात्मक अनुशासन का पालन करना चाहिए. हालांकि राघव चड्ढा पहले ही कई बार यह साफ कर चुके हैं कि वे आम आदमी पार्टी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और पार्टी छोड़ने का कोई इरादा नहीं रखते. उनके बयान यह संकेत देते हैं कि वे पार्टी नेतृत्व के साथ ही आगे बढ़ना चाहते हैं लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने चर्चाओं को जरूर जन्म दिया है.





