ISRO News । Gaganyaan Mission । लेह में स्पेस जैसा खतरनाक माहौल, गगनयान के लिए तैयार हो रहे भारत के शूरवीर, 3500 मीटर ऊंचाई पर इसरो का टेस्ट

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लेह में स्पेस जैसा खतरनाक माहौल, गगनयान के लिए तैयार हो रहे भारत के शूरवीर

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इसरो का यह एनालॉग मिशन बहुत ही ज्यादा खास है. लेह की ऊंचाई 3500 मीटर के करीब है. वहां ऑक्सीजन बहुत कम होती है और पारा माइनस में रहता है. यह बिल्कुल स्पेस के माहौल जैसा होता है. इसी हालात में इसरो ने अपने क्रू का कड़ा टेस्ट लिया है.

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स्पेस मिशन की सेफ्टी के लिए लेह में इसरो ने ‘मिशन MITRA’ चलाया. (फाइल फोटो)

बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को बताया कि उसने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह में 2 से 9 अप्रैल तक ‘मिशन MITRA’ चलाया है. यह अपनी तरह का पहला टीम व्यवहार अध्ययन है, जिसका मकसद गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों को फ़ायदा पहुंचाना है. इस मिशन का उद्घाटन ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने किया था. इसका मुख्य उद्देश्य क्रू की सुरक्षा और उनके प्रदर्शन को सुनिश्चित करना था.

ISRO ने एक बयान में कहा, “मिशन MITRA अपनी तरह का पहला टीम व्यवहार अध्ययन है. इसे ISRO और IAF-इंस्टीट्यूट ऑफ़ एयरोस्पेस मेडिसिन ने मिलकर डिज़ाइन किया है. इसका मकसद ऊंचाई वाले माहौल में काम करने वाले क्रू और ज़मीनी टीमों की शारीरिक, मानसिक और ऑपरेशनल गतिविधियों का अध्ययन करना है.”

अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि इस अध्ययन का लक्ष्य क्रू (गगनयात्री) और ज़मीनी कंट्रोल टीमों के बीच आपसी तालमेल को बेहतर ढंग से समझना है. साथ ही, यह भी देखना है कि मुश्किल पर्यावरणीय और ऑपरेशनल हालात में वे कितनी असरदार तरीके से फ़ैसले ले पाते हैं.

ISRO ने इस बात पर ज़ोर दिया कि क्रू की सुरक्षा और उनका प्रदर्शन ही सभी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के सबसे अहम पहलू होते हैं. एजेंसी ने कहा कि क्रू की आपस में ठीक से बातचीत करने की क्षमता, तनाव के हिसाब से खुद को ढालने की क्षमता, मानसिक रूप से मज़बूत बने रहने की क्षमता और एक-दूसरे का साथ देने की क्षमता ही किसी भी मिशन की सफलता और सुरक्षा तय करती है.

एजेंसी ने आगे कहा कि नियंत्रित, लेकिन असल जैसे हालात में किए जाने वाले ‘एनालॉग मिशन’ का इस्तेमाल यह समझने के लिए किया जाता है कि मुश्किल परिस्थितियों में क्रू कैसा प्रदर्शन करते हैं. अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि लेह की लगभग 3,500 मीटर की ऊँचाई पर मौजूद पर्यावरणीय हालात – जैसे कि ऑक्सीजन की कमी (हाइपोक्सिया), कम तापमान और बाहरी दुनिया से कटाव – अंतरिक्ष उड़ान ऑपरेशन के लिए एक प्राकृतिक ‘एनालॉग’ (यानी, अंतरिक्ष जैसा ही माहौल) का काम करते हैं.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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