earthquake | earthquake reason | bhukamp in noida | delhi me bhukamp: अफगानिस्तान में आया भूकंप, तो दिल्ली-NCR में इतनी तेज क्यों हिली धरती?

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शुक्रवार रात एक बार फिर उत्तर भारत की धरती कांप उठी. अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा क्षेत्र में आए 5.9 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने न केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान, बल्कि दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर और पंजाब के कई हिस्सों को भी हिलाकर रख दिया. शाम करीब 9:42 बजे (IST) जब लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे, अचानक पंखे और झूमर हिलने लगे, जिससे दहशत फैल गई.

कश्मीर वेदर और जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.9 मापी गई. इसका इपीसेंटर यानी केंद्र अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा क्षेत्र में था. लेकिन सबसे बड़ी बात, इसकी गहराई 175 किलोमीटर नीचे थी.

अफगानिस्तान में भूकंप, तो दिल्ली क्यों हिली?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब भूकंप का केंद्र दिल्ली से सैकड़ों किलोमीटर दूर अफगानिस्तान के हिंदुकुश क्षेत्र में था, तो दिल्ली-एनसीआर में इतने तेज झटके क्यों महसूस हुए? इसके पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हैं.

1. हिंदुकुश की विशेष भौगोलिक स्थिति
अफगानिस्तान का हिंदुकुश क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है. यहां टेक्टोनिक प्लेट्स (भारतीय और यूरेशियन प्लेट) आपस में टकराती रहती हैं. जब यहाँ बड़ा भूकंप आता है, तो उसकी ऊर्जा तरंगें हिमालय के रास्ते उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक तेजी से फैलती हैं.

2. भूकंप की गहराई
इस भूकंप की गहराई जमीन के नीचे 175 किलोमीटर थी. विज्ञान के अनुसार, जो भूकंप जितनी अधिक गहराई पर होता है, उसके झटके उतने ही दूर तक महसूस किए जाते हैं. गहरा केंद्र होने के कारण तरंगें एक विशाल दायरे में फैल जाती हैं, यही वजह है कि काबुल से लेकर दिल्ली और श्रीनगर तक धरती हिल गई.

3. दिल्ली की मिट्टी का ‘सॉफ्ट’ होना
दिल्ली और एनसीआर का इलाका यमुना के मैदानी क्षेत्र में आता है, जहाँ की मिट्टी काफी नरम और जलोढ़ है. जब भूकंपीय तरंगें चट्टानी इलाकों से निकलकर दिल्ली की नरम मिट्टी में पहुंचती हैं, तो उनकी तीव्रता बढ़ जाती है, जिससे झटके ज्यादा तेज महसूस होते हैं.

जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा असर
चूंकि जम्मू-कश्मीर अफगानिस्तान के भौगोलिक रूप से करीब है, इसलिए वहां झटके दिल्ली के मुकाबले कहीं ज्यादा महसूस किए गए. श्रीनगर, पुंछ और जम्मू के कई इलाकों में लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए. फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन हाई अलर्ट पर है.

क्या यह किसी बड़े खतरे का संकेत है?
भूगर्भ वैज्ञानिकों का कहना है कि हिंदुकुश और हिमालयी बेल्ट में स्‍ट्रेट ब‍िल्‍ड‍िंग यानी एनर्जी को स्‍टोर कर रहा है. छोटे और मध्यम तीव्रता के ये भूकंप इस बात का संकेत हैं कि जमीन के अंदर प्लेट्स अपनी जगह बना रही हैं. हालांकि, दिल्ली-एनसीआर में इमारतों के निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर अब और अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है.



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