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S Jaishankar News: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत वैश्विक झटकों के बीच भी लचीला रहा है. वह आज टॉप फाइव अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. वह आत्मनिर्भरता और मजबूत क्षमताओं की ओर बढ़ रहा है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर की फाइल तस्वीर.
S Jaishankar News: ईरान जंग के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि हाल के वर्षों में दुनिया भर में आए कई बड़े वैश्विक झटकों की क्षमताओं की परीक्षा ली है. उन्होंने कहा कि भारत ने चुनौतियों को झेलने की अपनी इस क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि देश ने घरेलू और बाहरी दोनों मोर्चों पर इन चुनौतियों से मजबूती से मुकाबला किया. आईआईएम रायपुर के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और दुनिया में शक्ति संतुलन में स्पष्ट बदलाव दिखाई दे रहे हैं.
कुछ समाज इन बदलावों को स्वीकार करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, सैन्य क्षमताओं, कनेक्टिविटी और संसाधनों में नए विकास ने एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में जोखिम लेने को बढ़ावा दिया है. विदेश मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि आजकल लगभग हर चीज को लीवरेज किया जा रहा है, अगर नहीं तो हथियार बनाया जा रहा है. दुनिया अब खुद को शत्रुतापूर्ण और अनिश्चित वातावरण में सुरक्षित रखने की चुनौती का सामना कर रही है. जयशंकर ने भारत के सकारात्मक नजरिए पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारे समाज में एक आशावाद है जो दुनिया के कई अन्य हिस्सों में नहीं दिखता. आप पूछ सकते हैं कि ऐसा क्यों है? पिछले 10 साल काफी बेहतर रहे हैं, जिसने यह विश्वास पैदा किया है कि अगले 10 साल और उसके बाद के साल भी अच्छे होंगे.
भारत दुनिया की टॉप अर्थव्यवस्ता में शामिल
जयशंकर ने आगे कहा कि हम अब दुनिया की टॉप फाइव अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं. कोई इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि हाल के कई वैश्विक झटकों ने हमारी लचीलता की परीक्षा ली और भारत इनमें से ठोस तरीके से निकला है. हमने घरेलू और बाहरी दोनों चुनौतियों को काफी सफलतापूर्वक पार किया है.
विदेश मंत्री ने सरकार की प्राथमिकताओं पर भी जोर दिया. उन्होंने समावेशी विकास, प्रतिनिधित्वपूर्ण राजनीति, निर्णायक नेतृत्व और डिजिटल क्रांति को उत्साहपूर्वक अपनाने की बात कही. जयशंकर ने कहा कि वैश्विक रुझानों को देखते हुए राष्ट्रीय क्षमताओं का निर्माण करना बेहद जरूरी है. हमें अपनी नियंत्रण में जितनी ज्यादा क्षमताएं बनानी और सुरक्षित रखनी चाहिए, उसकी कोशिश करनी चाहिए. स्पष्ट है कि कुछ क्षेत्र दूसरों की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण होंगे. ऐसे मामलों में समाधान विश्वसनीय साझेदारियों और विविध स्रोतों में निहित है. लेकिन अंततः मजबूत राष्ट्रीय क्षमताओं का निर्माण किए बिना कोई रास्ता नहीं है.
जयशंकर के इन बयानों का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि वर्तमान समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के प्रभाव से जूझ रही है. इस संघर्ष ने तेल बाजार को अस्त-व्यस्त कर दिया है, अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रभावित हुई है और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है. ऐसे में भारत की स्थिरता और लचीलेपन की चर्चा ज्यादा प्रासंगिक हो जाती है. विदेश मंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे बदलते विश्व व्यवस्था को समझें और भारत को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें





