मालदा हिंसा के पहले न्यायिक अधिकारियों ने डीएम को लिखा था पत्र, फिर भी नहीं दी गई सुरक्षा, क्या नपेंगे डीएम-एसपी?

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West Bengal Chunav Security Breach: पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले मालदा के कालियाचक ब्लॉक में न्यायिक अधिकारियों के घेराव ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है. खुलासा हुआ है कि घटना से कई दिन पहले ही चार अधिकारियों ने जिला मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर सुरक्षा खतरे और कार्यालय स्थानांतरण की मांग की थी, लेकिन उनकी चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया गया. इस खुलासे के बाद जिले के डीएम और एसपी पर गाज गिरने का डर सताने लगा है.

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मालदा घटना पर आ गया बड़ा अपडेट.

मालदा. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वोटिंग से पहले मालदा की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं. मालदा के कालियाचक-2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) के कार्यालय में तीन दिन पहले हुई घटना को लेकर अब एक बड़ा खुलासा हुआ है. इलेक्टोरल रोल के निपटारे में लगे न्यायिक अधिकारियों को जिस तरह भीड़ ने घेरा, वह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना से कई दिन पहले ही 7 में से 4 न्यायिक अधिकारियों ने जिला मजिस्ट्रेट राजनवीर सिंह कपूर को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएं जताई थीं. अधिकारियों ने 23 मार्च को जिला जज के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट को एक आधिकारिक पत्र भेजा था. इस पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि जैसे-जैसे पूरक मतदाता सूची (Supplementary Voters List) के प्रकाशन की तारीख नजदीक आ रही है, बीडीओ कार्यालय का वातावरण तेजी से संवेदनशील होता जा रहा है. इसके बावजूद जिलाधिकारी ने कोई एक्शन नहीं लिया.

अधिकारियों ने मोथाबाड़ी निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता सूचियों के निपटान के दौरान बढ़ती भीड़ और उत्तेजित माहौल को देखते हुए अपने कार्यालय को किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की गुहार लगाई थी. न्यायिक अधिकारियों ने अपने पत्र में साफ तौर पर सुरक्षा भंग होने की संभावना जताई थी. बावजूद इसके, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, जिसका नतीजा यह हुआ कि कुछ ही दिनों बाद अधिकारियों को हिंसक भीड़ के घेराव का सामना करना पड़ा. अधिकारियों का तर्क था कि बीडीओ कार्यालय जैसे सार्वजनिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय स्थान पर न्यायिक प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संचालित करना मुश्किल हो रहा है.

पूरा विवाद मोथाबाड़ी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सुधार और नामों को जोड़ने या हटाने को लेकर शुरू हुआ था. न्यायिक अधिकारियों को इन दावों और आपत्तियों को सुनने की जिम्मेदारी दी गई थी. जैसे-जैसे प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची, विभिन्न राजनीतिक गुटों और स्थानीय लोगों का दबाव बढ़ने लगा. पत्र में दी गई चेतावनी के अनुसार, सुरक्षा की कमी ने अधिकारियों को भीड़ के सीधे संपर्क में छोड़ दिया, जिससे उनकी शारीरिक सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा था.

विवाद मोथाबाड़ी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सुधार और नामों को जोड़ने या हटाने को लेकर शुरू हुआ था.

विपक्ष ने कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल

इस खुलासे के बाद राज्य की कानून व्यवस्था और चुनाव आयोग की सुरक्षा तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं. जब अधिकारियों ने पहले ही लिखित रूप में Security Breach की चेतावनी दे दी थी, तो उन्हें वहां से हटाया क्यों नहीं गया या अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती क्यों नहीं की गई? यह घटना अब बंगाल चुनाव की संवेदनशीलता को और बढ़ा रही है, जहां चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की सुरक्षा खुद दांव पर लगी नजर आ रही है. स्थानीय प्रशासन फिलहाल इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन न्यायिक हलकों में इस घटना को लेकर भारी रोष देखा जा रहा है.

पश्चिम बंगाल के मालदा में कालियाचक क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य के दौरान 3 महिला सहित 7 न्यायिक अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों ने 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा था. सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे राज्य सरकार की विफलता करार दिया है, साथ ही सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का निर्देश दिया है. मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन किया और अधिकारियों को बीडीओ दफ्तर में घेर लिया. चीफ जस्टिस ने कहा कि डीएम और एसएसपी मौके पर समय पर नहीं पहुंचे, इसे ‘प्रशासनिक विफलता’ माना. रात में रेस्क्यू के दौरान अधिकारियों के वाहनों पर पत्थर और लाठियों से हमला किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम और एसएसपी को 6 अप्रैल तक स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है. चुनाव आयोग ने मामले की जांच एनआईए को सौंपी है.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें



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