बीच समंदर में क्रैश हुए पवन हंस हेलीकॉप्टर का स्विच OFF मिला, दो महीने बाद पता चली हादसे की वजह

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क्रैश हुए पवन हंस हेलीकॉप्टर का स्विच OFF, दो महीने बाद पता चली हादसे की वजह

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अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के मायाबंदर में 24 फरवरी 2026 को हुए पवन हंस हेलिकॉप्टर हादसे की एयरक्राफ्ट एक्सिडेंटल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी कर दी है. रिपोर्ट के अनुसार, लैंडिंग के वक्त हाई रेट ऑफ डिसेंट और विजिबिलिटी की कमी के कारण हेलिकॉप्टर समुद्र में जा गिरा. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आपातकालीन स्थिति में काम आने वाला फ्लोट सिस्टम ‘ऑफ’ था और यात्रियों ने सुरक्षा बेल्ट भी सही से नहीं पहनी थी.

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अंडमान निकोबार के समंदर में क्रैश हुआ था पवन हंस हैलिकॉप्टर.

Pawan Hans Helicopter Crash Report: एएआईबी ने अंडमान निकेबार के मायाबंदर हेलिपैड के पास हुए पवन हंस हेलिकॉप्टर हादसे की पहली आधिकारिक रिपोर्ट जारी कर दी है. यह रिपोर्ट उस खौफनाक मंजर की परतें खुलती गई है, जिसकी वजह से Airbus AS365N3 हेलिकॉप्टर 5 यात्रियों और 2 क्रू सदस्यों के साथ समुद्र में समा गया था.

हादसे वाले दिन हेलिकॉप्टर श्री विजय पुरम से रंगत होते हुए मायाबंदर जा रहा था. उड़ान के दौरान मौसम खराब था. धुंध के कारण दृश्यता काफी कम थी. रिपोर्ट के मुताबिक, जब हेलिकॉप्टर मायाबंदर हेलिपैड के करीब था, तब को-पायलट इसे उड़ा रहा था. फाइनल अप्रोच के दौरान हेलिकॉप्टर सामान्य से कहीं अधिक तेजी से नीचे उतरा और हेलिपैड से मात्र 1.6 किमी दूर समुद्र में क्रैश लैंड कर गया.

इमरजेंसी में काम आने वाला फ्लोट सिस्टम ‘ऑफ’ था

फ्लोट सिस्टम का ‘ऑफ’ होना बना काल

समुद्र के ऊपर उड़ने वाले हेलिकॉप्टरों के लिए फ्लोट सिस्टम (पानी पर तैरने में मदद करने वाला उपकरण) का ऑन होना अनिवार्य है. लेकिन मलबे की जांच में यह स्विच ‘OFF’ पाया गया. नतीजा यह हुआ कि गिरते ही हेलिकॉप्टर पानी पर तैरने के बजाय दाहिनी ओर पलट गया. गनीमत रही कि वहां पानी की गहराई सिर्फ 4-5 फीट थी, जिससे क्रू ने 5 यात्रियों (जिनमें एक शिशु भी शामिल था) को बाहर निकाल लिया. हालांकि, एक यात्री ने तीन दिन बाद दम तोड़ दिया.

सिक्योरिटी स्टैंडर्ड की उड़ीं धज्जियां

जांच में यह भी पाया गया कि यात्री केवल ‘लैप बेल्ट’ पहने हुए थे, जबकि ‘शोल्डर बेल्ट’ का उपयोग नहीं किया गया था, जो हादसे में उनकी जान लेने और गंभीर चोटों का बड़ा कारण बना. साथ ही, उड़ान से पहले पायलटों के पास मौसम का कोई पुख्ता डेटा नहीं था, उन्होंने केवल फोन पर ली गई जानकारी के आधार पर रिस्क लिया.

हेलिकॉप्टर श्री विजय पुरम से रंगत होते हुए मायाबंदर जा रहा था

तकनीकी स्थिति और जांच की दिशा

हैरानी की बात यह है कि हेलिकॉप्टर का मेंटेनेंस हादसे से दो दिन पहले 22 फरवरी को हुआ था और इसमें कोई तकनीकी खराबी लंबित नहीं थी. दोनों पायलट (58 और 59 वर्ष) बेहद अनुभवी थे, जिनका कुल उड़ान अनुभव 11,000 घंटों से अधिक था.

इसी जगह क्रैश हुआ था हेलिकॉप्टर.

सख्त एक्शन की सिफारिशें

एएआईबी ने DGCA को अंतरिम सुरक्षा सुझाव दिए हैं, जिसमें लाइफ जैकेट, सीट बेल्ट और फ्लोट सिस्टम के उपयोग पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने को कहा गया है. फिलहाल, फ्रांस की विशेषज्ञ एजेंसी BEA के साथ मिलकर ब्लैक बॉक्स (FDR/HUMS) की जांच की जा रही है ताकि हादसे की अंतिम वजह का पता लगाया जा सके.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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