अलवर की ज्योति की वेस्ट मटेरियल आर्ट

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Alwar News: अलवर की बेटी ज्योति ने वेस्ट मटेरियल और लकड़ी के बुरादे से अनोखी कलाकृतियाँ बनाकर देशभर में अपनी पहचान बनाई है. वे अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए कीकर की लकड़ी, बुरादा और टेराकोटा के मिश्रण से राधा-कृष्ण, वर्ली आर्ट और रामायण के दृश्यों वाली पेंटिंग्स तैयार कर रही हैं. इन कलाकृतियों की मांग देशभर की प्रदर्शनियों में बढ़ रही है, जहाँ चंडीगढ़, अहमदाबाद और हैदराबाद जैसे शहरों में उन्हें शानदार रिस्पॉन्स मिला है. ज्योति का यह कार्य केवल कला तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जरूरतमंद महिलाओं को प्रशिक्षण और रोजगार देकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं.

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Alwar News: राजस्थान का अलवर जिला अपनी ऐतिहासिक विरासतों के लिए तो मशहूर है ही, लेकिन अब यहाँ की बेटियाँ अपनी मेहनत और हुनर से हस्तशिल्प (Handicraft) के क्षेत्र में भी जिले का नाम रोशन कर रही हैं. अलवर शहर की निवासी ज्योति ने अपने पिता द्वारा संजोई गई कला को न केवल जीवित रखा है, बल्कि उसे आधुनिक बाजार के हिसाब से नए आयाम प्रदान किए हैं. ज्योति आज लकड़ी के बेकार बुरादे और अन्य वेस्ट मटेरियल का उपयोग कर ऐसी खूबसूरत कलाकृतियाँ तैयार कर रही हैं, जिनकी मांग चंडीगढ़ से लेकर हैदराबाद और दिल्ली तक के बड़े शोरूम्स में बनी हुई है.

ज्योति की इस कला की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘ईको-फ्रेंडली’ होना है. वे लकड़ी के बुरादे और कारखानों से निकलने वाले फालतू सामान को टेराकोटा के विशेष मिश्रण के साथ जोड़कर आकर्षक कलाकृतियाँ बनाती हैं. वर्तमान में वे कीकर की लकड़ी की शाखाओं का उपयोग कर ‘वर्ली आर्ट’ और ग्रामीण आंचल की खूबसूरत पेंटिंग्स तैयार कर रही हैं. इन कलाकृतियों में भारतीय संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है, जिसमें विशेष रूप से राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंग और रामायण के महत्वपूर्ण दृश्यों को बड़ी बारीकी से उकेरा गया है. ये पेंटिंग्स घरों और कार्यालयों को एक शाही और सांस्कृतिक लुक प्रदान करती हैं.

पिता का सपना और महिला सशक्तिकरण का मिशन
ज्योति ने बताया कि इस आर्ट की शुरुआत उनके पिता ने की थी, जिनका सपना था कि इस कला के जरिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिलाओं को भी रोजगार मिले. पिता के उसी सपने को आगे बढ़ाते हुए ज्योति आज अपने साथ कई गरीब महिलाओं को जोड़ चुकी हैं. वे इन महिलाओं को न केवल कला का प्रशिक्षण देती हैं, बल्कि उन्हें नियमित काम देकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही हैं. ज्योति के अनुसार, कुछ छोटी कलाकृतियाँ जहाँ 2 घंटे में तैयार हो जाती हैं, वहीं कुछ जटिल डिजाइनों को पूरा करने में महीनों का समय और कड़ी मेहनत लगती है.

देशभर की प्रदर्शनियों में मिल रही है सराहना
ज्योति अपनी इन कलाकृतियों के साथ सरकार द्वारा आयोजित होने वाली विभिन्न राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेती हैं. हाल ही में अहमदाबाद, अमृतसर, हैदराबाद और दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनी में अलवर की इस कला को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है. इन कलाकृतियों की कीमत मात्र 350 रुपये से शुरू होकर हजारों रुपये तक जाती है, जो हर वर्ग के खरीदार की पसंद के अनुकूल है. ज्योति का यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण (Waste Management) की दिशा में एक बड़ा संदेश है, बल्कि यह साबित करता है कि अगर हुनर हो तो बेकार चीजें भी बेशकीमती बनाई जा सकती हैं.

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें



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