दिल्‍ली से आया संदेश, फिर म्यांमार बॉर्डर पर असम राइफल का एक्‍शन, जीरो FIR से आतंक पर करारा प्रहार

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मणिपुर के तेंगनौपाल जिले में सुरक्षाबलों की ताजा कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि आतंक के खिलाफ जंग अब सीमाओं तक सीमित नहीं बल्कि खुफिया सूचनाओं के डिजिटल जाल पर टिकी है. इस पूरे ऑपरेशन की पटकथा राजधानी दिल्ली में लिखी गई जहां स्पेशल सेल को म्यांमार सीमा के पास एक बड़ी घुसपैठ का इनपुट मिला. जैसे ही यह संदेश इंफाल पहुंचा, 21 असम राइफल्स और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने यांगौबुंग गांव के घने इलाकों में अपनी बिसात बिछा दी. अंधेरे का फायदा उठाकर सीमा पार करने की कोशिश कर रहे प्रतिबंधित संगठन KYKL के दो खूंखार कैडरों को जब सुरक्षाबलों ने दबोचा, तो उनके पास भागने का कोई रास्ता नहीं था. कानूनी शिकंजे को और मजबूत करने के लिए खोंगजोम में दर्ज की गई जीरो FIR ने यह संदेश दे दिया है कि गुनाहगार कहीं भी पकड़ा जाए, इंसाफ की प्रक्रिया बिना किसी देरी के शुरू होगी. यह ऑपरेशन न केवल घुसपैठ को रोकने में सफल रहा बल्कि इसने म्यांमार बॉर्डर पर सक्रिय स्लीपर सेल्स के पूरे नेटवर्क को हिलाकर रख दिया है.

इंटेलिजेंस इनपुट पर एक्शन
यह पूरा ऑपरेशन दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से मिले एक पुख्ता इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर शुरू किया गया था. इनपुट मिलते ही 21 असम राइफल्स और तेंगनौपाल पुलिस की एक जॉइंट टीम ने म्यांमार सीमा के पास मोर्चा संभाल लिया. दोनों संदिग्ध म्यांमार सीमा से सटे यांगौबुंग गांव के इलाके में घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे. सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर दोनों को धर दबोचा. पकड़े गए आतंकियों की पहचान इस प्रकार हुई है:

1.      थोकचोम इंगोचा सिंह उर्फ केबी (31 साल)

2.      थोकचोम रघुनाथ मैतेई उर्फ बिरजीत (48 साल)

जीरो FIR से कानूनी शिकंजे तक की प्रक्रिया
गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा बल दोनों संदिग्धों को लेकर पहले खोंगजोम पुलिस स्टेशन पहुंचे. यहां तत्काल कानूनी प्रक्रिया शुरू करते हुए एक जीरो FIR दर्ज की गई. इसके बाद आगे की औपचारिक कार्रवाई के लिए मामला मोरेह थाने को स्थानांतरित कर दिया गया जहां नियमित केस दर्ज कर लिया गया है. वर्तमान में सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस की स्पेशल टीमें इन दोनों कैडरों से गहन पूछताछ कर रही हैं. इनके पास से सीमा पार के संपर्कों और मणिपुर में संभावित आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है.

पिछले सप्‍ताह पकड़े गए थे 4 संदिग्‍ध
यह गिरफ्तारी मणिपुर में उग्रवादी संगठनों के खिलाफ चलाए जा रहे एक व्यापक और सघन अभियान का हिस्सा है. पिछले कुछ दिनों में सुरक्षाबलों ने तेंगनौपाल और सीमावर्ती इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है, जिसके परिणामस्वरूप म्यांमार सीमा के पास से PLA, NRFM और KCP जैसे प्रतिबंधित संगठनों के चार अन्य खतरनाक विद्रोहियों को भी दबोचा गया है. ये कैडर व्यापारियों और सरकारी कर्मचारियों से रंगदारी और अपहरण जैसी गतिविधियों में शामिल थे. राज्य भर में बनाए गए 117 सुरक्षा नाकों और निरंतर जारी ‘एरिया डोमिनेशन ड्राइव’ ने उग्रवादियों के मूवमेंट को सीमित कर दिया है, जिससे अब सीमा पार से होने वाली घुसपैठ पर कड़ा प्रहार किया जा रहा है.

सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ी चौकसी
मणिपुर में जारी तनाव के बीच म्यांमार सीमा से इस प्रकार की घुसपैठ चिंता का विषय है. हालांकि, असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा एजेंसियां अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं. आने वाले दिनों में सीमावर्ती इलाकों में गश्त और सर्च ऑपरेशन को और तेज किया जा सकता है.

सुरक्षा एजेंसियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह गिरफ्तारी?
KYKL किस प्रकार का संगठन है और सुरक्षा के लिए यह क्यों चुनौती है?

KYKL मणिपुर का एक प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन है जो लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियों और सशस्त्र विद्रोह में शामिल रहा है. इसकी सक्रियता राज्य की शांति के लिए बड़ा खतरा मानी जाती है.

इस ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की क्या भूमिका रही?

स्पेशल सेल ने तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी जुटाई थी कि म्यांमार सीमा से घुसपैठ होने वाली है, जिसे असम राइफल्स के साथ साझा किया गया.

गिरफ्तार किए गए आतंकियों का मुख्य ठिकाना कहां था?

दोनों आतंकी म्यांमार सीमा के पास यांगौबुंग गांव इलाके में छिपे थे और वहां से मणिपुर के भीतर घुसपैठ कर बड़ी वारदातों को अंजाम देने की फिराक में थे.

जीरो FIR और मोरेह थाने में केस दर्ज करने का क्या महत्व है?

जीरो FIR से तत्काल कानूनी कार्यवाही शुरू करने में मदद मिली जबकि मोरेह थाना म्यांमार सीमा के करीब होने के कारण इस मामले की जांच के लिए भौगोलिक रूप से अधिक उपयुक्त है.

वर्तमान में जांच का मुख्य फोकस क्या है?

एजेंसियां अब इनके नेटवर्क, फंडिंग के स्रोतों और सीमा पार बैठे उनके आकाओं के बारे में जानकारी जुटा रही हैं, ताकि मणिपुर में सक्रिय स्लीपर सेल्स को खत्म किया जा सके.



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