कल किसने देखा! ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले ईरान, यूएई और कतर ने क्यों लगाया जयशंकर को फोन?

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ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने से पहले ईरान, कतर और यूएई ने जयशंकर से क्या बात की?

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भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष जल्द से जल्द समाप्त करने और होर्मुज स्ट्रेट से ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए पिछले कुछ हफ्तों में कूटनीतिक प्रयास किए हैं. भारत का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग की नाकेबंदी जारी रहती है तो भारत समेत कई देशों की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है.

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एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया के हालात पर ईरान, कतर और यूएई से चर्चा की. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल अचानक तेज हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तय डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर ने भारत से सीधा संपर्क साधा. तीनों देशों ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को फोन कर मौजूदा हालात पर बातचीत की. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनते जा रहे हैं और हर देश अपने-अपने रणनीतिक विकल्प तलाश रहा है.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से पश्चिम एशिया संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर को लेकर रविवार को चर्चा की. विदेश मंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर बातचीत की. वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी जयशंकर को फोन किया और वर्तमान संकट पर बात की.

कतर के प्रधानमंत्री और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री से जयशंकर की फोन पर बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई हालिया चेतावनी के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट को नौवहन के लिए फिर से नहीं खोला गया तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा.

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, “कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री अल थानी के साथ जारी संघर्ष को लेकर आज शाम टेलीफोन पर बातचीत हुई.” जयशंकर ने अल नाहयान से बातचीत के बाद अधिक जानकारी साझा किए बिना कहा कि उनसे पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा, “संयुक्त अरब अमीरात के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री अल नाहयान के साथ पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति पर चर्चा की.”

भारत बना ‘डिप्लोमैटिक पावर’
इस अचानक कूटनीतिक सक्रियता ने साफ कर दिया है कि भारत अब सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि संकट के बीच एक अहम ‘डिप्लोमैटिक पावर’ बनकर उभर रहा है. खासकर जब तेल और गैस सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है, तब खाड़ी देशों का भारत से संपर्क साधना बड़े संकेत देता है. जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ बातचीत नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में संभावित बड़े फैसलों की भूमिका है. सवाल यही है कि क्या भारत इस संकट में संतुलन बनाकर अपने हित सुरक्षित रख पाएगा, या फिर यह टकराव और गहराएगा?

होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से बढ़ा संकट
फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को ईरान द्वारा अवरुद्ध किए जाने के बाद तेल और गैस की कीमतों में वैश्विक स्तर पर तेजी आई है. पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है. ईरान ने भारत समेत अपने मित्र देशों के जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी है.

जंग जल्द खत्म करने की मांग
भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष जल्द से जल्द समाप्त करने और होर्मुज स्ट्रेट से ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए पिछले कुछ हफ्तों में कूटनीतिक प्रयास किए हैं. भारत का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग की नाकेबंदी जारी रहती है तो भारत समेत कई देशों की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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