Amazing Story: संघर्ष की आग में तपकर कुंदन बने देवेंद्र कुमार की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं उस 2 साल की कोमल उम्र में उनके माता-पिता ने उन्हें और उनकी 3 महीने की बहन को दिल्ली की एक बस्ती में लावारिस छोड़ दिया था. 8 साल की उम्र से मजदूरी कर बहन को पालने वाले देवेंद्र आज लाडली फाउंडेशन के जरिए हजारों बेसहारा बेटियों का घर बसा रहे हैं. अपनी पढ़ाई और बचपन कुर्बान करने वाले देवेंद्र ने 2012 में इस फाउंडेशन की नींव रखी. अब तक वे 2100 से अधिक बेटियों का सामूहिक विवाह संपन्न करा चुके हैं. शादी से पहले दूल्हे का क्रिमिनल बैकग्राउंड और वैवाहिक स्थिति की गहन जांच की जाती है. संस्था नकद दान के बजाय आईएएस, पीसीएस अधिकारियों और समाजसेवियों से सीधे कन्यादान और सामग्री का सहयोग लेती है. देवेंद्र न सिर्फ शादी कराते हैं, बल्कि बेटियों की एफडी (FD) और उनके कौशल विकास पर भी जोर देते हैं ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें.





