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Kerala News: केरलम के इडुक्की जिले के कट्टाप्पना में एक व्यक्ति को 9 साल पुरानी अलमारी के गुप्त खाने में छिपा सोना मिला. करीब सात पवन गहने और नकदी मिलने के बाद भी उसने ईमानदारी दिखाते हुए यह सब असली मालिक को लौटा दिया. यह घटना इंसानियत और भरोसे की मिसाल बन गई है.
केरल में बाबू नाम के व्यक्ति को अलमारी में मिला सोना.
न्यूज मलयालम
Kerala News: कभी-कभी जिंदगी ऐसी कहानी लिख देती है, जो फिल्मों से भी ज्यादा सच्ची और दिल छू लेने वाली होती है. एक पुरानी अलमारी, सालों से घर के कोने में पड़ी हुई. किसी को अंदाजा नहीं कि उसके अंदर क्या छिपा है. और फिर एक दिन अचानक जब उसका गुप्त खाना खुलता है तो सिर्फ खजाना ही नहीं मिलता, बल्कि इंसानियत की मिसाल भी सामने आती है. केरलम के एक छोटे से इलाके से आई यह कहानी बताती है कि ईमानदारी आज भी जिंदा है. जब हर कोई आसान रास्ता चुनता है, तब कोई-कोई ऐसा भी होता है जो सही रास्ता चुनता है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों.
यह कहानी सिर्फ सोने के गहनों की नहीं है. यह भरोसे की कहानी है. रिश्तों की कहानी है. और सबसे बड़ी बात यह उस इंसान की कहानी है जिसने अपने कठिन हालात के बावजूद लालच को खुद पर हावी नहीं होने दिया. बाबू नाम के इस शख्स ने जो किया, उसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
अलमारी का गुप्त खाना खोलते ही सामने आया ‘खजाना’
- इडुक्की जिले के कट्टाप्पना के रहने वाले बाबू को यह अलमारी करीब 9 साल पहले उनके पड़ोसी जिजो ने दी थी. यह एक पुरानी स्टील अलमारी थी, जो जिजो की मां इस्तेमाल करती थीं. उनकी मां की मौत के बाद घर में रखे गहने कहीं खो गए थे. काफी तलाश के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिला. बाद में जब जिजो ने घर बदला तो उन्होंने यह अलमारी बाबू को दे दी.
- कई सालों तक यह अलमारी बाबू के घर में वैसे ही पड़ी रही. एक दिन बाबू ने सोचा कि अलमारी के अंदर बने एक बंद खाने को ठीक किया जाए जो लंबे समय से खुल नहीं रहा था. जब उन्होंने उसे खोलने की कोशिश की तो अचानक उनकी नजर पीछे की तरफ रखे कुछ चमकते हुए सामान पर पड़ी. करीब सात सोने के गहने हार, कंगन, झुमके और कुछ पुराने नोट वहां सुरक्षित रखे थे.
- इतना बड़ा खजाना मिलने के बाद कोई भी इंसान डगमगा सकता था, खासकर तब जब खुद की आर्थिक स्थिति अच्छी न हो. लेकिन बाबू ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने तुरंत जिजो को इसकी जानकारी दी. जिजो के लिए यह सिर्फ गहने नहीं थे बल्कि उनकी मां की यादें थीं जो सालों बाद उन्हें वापस मिल गईं.
बाबू को यह खजाना कैसे मिला?
बाबू को यह खजाना एक पुरानी अलमारी के गुप्त खाने में मिला, जिसे वह कई सालों से इस्तेमाल कर रहे थे. जब उन्होंने उस बंद हिस्से को खोलने की कोशिश की, तब उन्हें अंदर सोने के गहने और कुछ पैसे मिले.
बाबू ने गहनों का क्या किया?
बाबू ने पूरी ईमानदारी दिखाते हुए गहनों को अपने पास रखने के बजाय उनके असली मालिक जिजो को लौटा दिया. उन्होंने तुरंत जिजो को बुलाकर पूरी बात बताई और गहने सौंप दिए.
इस घटना की खास बात क्या है?
इस घटना की सबसे खास बात बाबू की ईमानदारी है. उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी फिर भी उन्होंने लालच नहीं किया. उन्होंने यह साबित किया कि इंसानियत और भरोसा आज भी जिंदा है.
ईमानदारी की मिसाल बनी यह कहानी
यह घटना समाज के लिए एक मजबूत संदेश छोड़ती है. जब बाबू खुद आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे तब भी उन्होंने सही रास्ता चुना. यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है बल्कि यह दिखाती है कि सच्चाई और ईमानदारी कभी पुरानी नहीं होती. आज के समय में जहां भरोसा टूटता नजर आता है वहां बाबू जैसे लोग उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें



