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Who is Fatima Tehlia in Kerala chunav: केरल विधानसभा चुनाव 2026 में राहुल गांधी की रैली के बाद हिजाब पहने लड़की चर्चा में हैं. पेरंब्रा सीट से IUML उम्मीदवार इस लड़की ने अपने भाषण और सक्रियता से खास पहचान बनाई है, यहां तक कि राहुल गांधी ने भी उनकी तारीफ की. आइए फातिमा तहलिया नाम की इस लड़की के बारे में जानते हैं. फातिमा का मुकाबला एलडीएफ के वरिष्ठ नेता टीपी रामकृष्णन से है, जिससे यह सीट हाई-प्रोफाइल बन गई है. पारंपरिक राजनीति के मुकाबले फातिमा सोशल मीडिया के जरिए युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं.
केरल विधानसभा चुनाव 2026 में एक हिजाब वाली लड़की सुर्खियो में हैं. खासकर जब से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केरल के पेरंब्रा में रैली की है तब से ये हिजाब वाली लड़की सोशल मीडिया पर छाई हुई है. लोग पूछ रहे हैं कि ये लड़की कौन है जिसे राहुल गांधी मंच इतना ज्यादा तवज्जो देते दिखे. वह लड़की राहुल गांधी की कान के पास जाकर उनसे काफी देर तक मंच पर ही बातें करती दिखी. जब उसने माइक संभाला तो अपने जोरदार भाषण से वहां मौजूद लोगों के साथ सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई.
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी इस हिजाब वाली लड़की के कायल नजर आए और मंच पर ही उसकी जमकर तारीफ की. कौन है यह लड़की, जिसने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के बीच अपनी अलग पहचान बना रही है. बता दें कि इस हिजाब वाली लड़की का नाम फातिमा तहलिया है. 32 वर्षीय फातिमा पेशे से वकील हैं. वह मूलरूप से केरल कोरीकोट की रहने वाली हैं.
केरल विधानसभा चुनाव में फातिमा तहलिया युवा उम्मीदवारों में से एक है. फातिमा को यूडीएफ के सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग आईययूएमएल ने पेरंबरा जैसे ग्रामीण क्षेत्र से मैदान में उतारा है. उनकी उम्मीदवारी इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि आईययूएमएल ने अपने इतिहास में पहली बार दो महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है. जिनमें से एक फातिमा हैं.
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पुरुष प्रधान मानी जाने वाली इस राजनीति में फातिमा एक दुर्लभ और मजबूत आवाज बनकर उभरी हैं. पेरंब्रा के रण में फातिमा के लिए यह डगर आसान नहीं है. यह क्षेत्र दशकों से वामपंत यानी एलडीएफ का अभेद किला रहा है. फातिमा का सीधा मुकाबला दिग्गज वामनेता नेता, एलडीएफ संयोजक और वर्तमान श्रम मंत्री टीपी रामकृष्णन से है.
पेरंब्रा का मुकाबला इतनी हाई प्रोफाइल सीट है कि यहां फातिमा के लिए खुद राहुल गांधी ने मोर्चा संभाला. वहीं मंत्री रामकृष्णन के पक्ष में बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने रैली कर वोट मांगे. यानी फातिमा की वजह से राहुल गांधी और तेजस्वी यादव केरल चुनाव में एक दूसरे के खिलाफ दिखे. प्रचार का तरीका पारंपरिक बनाम डिजिटल. एक तरफ माकपा का मजबूत कैडर और जमीनी नेटवर्क है तो दूसरी तरफ फातिमा तहलिया का आधुनिक अंदाज.
फातिमा रैलियों और नुक्कड़ सभाओं के साथ फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए जबरदस्त सक्रिय हैं. दिलचस्प बात यह है कि जहां उनके प्रतिद्वंदी रामकृष्ण डिजिटल दुनिया से थोड़े दूर हैं. फातिमा के रील और पोस्ट युवाओं के बीच तेजी से वायरल हो रहे हैं.
छात्र राजनीति से विधानसभा चुनाव तक फातिमा की ये मजबूती रातो-रात नहीं आई है. वह छात्र जीवन से ही राजनीति में संघर्ष कर रही हैं. वो मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन की महिला शाखा हरिता की संस्थापक नेता रही हैं. उन्होंने कैंपस और समाज में लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है.
फातिमा के भाषणों में अनुभव, शालीनता और स्पष्टता की लोग खूब तारीफ करते हैं. यही वजह है कि राहुल गांधी भी उससे प्रभावित नजर आते हैं. 32 साल की इस हिजाब वाली लड़की चुनाव जीतती है या हारती है यह तो जनता तय करेगी, लेकिन फिलहाल चुनाव प्रचार के दौरान वह सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोर रही हैं.



