शादी के लिए छड़ी खाना जरूरी? धींगा गवर मेला में सदियों पुरानी परंपरा, जहां महिलाओं का चलता है राज!

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जोधपुर: पूरी दुनिया में महिलाओं के अनूठे त्योहार के रूप में प्रसिद्ध जोधपुर का धींगा गवर मेला, जिसे बेंतमार मेला भी कहते हैं, का आयोजन रविवार को होगा. रविवार की पूरी रात भीतरी शहर की सड़कों पर महिलाओं का ही राज होगा. इस मेले के लिए इन दिनों तिजणियों का पूजन अंतिम दौर में है. शनिवार को शहर के अलग-अलग मोहल्लों में पूजन हुआ रात शहर के सरोवरों पर तीजणियों की भीड़ उमड़ पड़ी। भीतरी शहर के पदमसर तालाब पर रात 8 बजे से गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंची महिलाओं ने गवर-ईसर के गीत गाते हुए नृत्य किया.

पारंपरिक वेशभूषा और सोने-चांदी के आभूषणों से सजी तीजणियां उत्सव के रंग में नजर आईं।लोटियां उत्सव के दौरान हल्दी-मेहंदी थीम पर सजे गवर-ईसर, मीराबाई बनी बुजुर्ग महिला, तलवारें लहराती सुहागिनें और शाक द्वीपीय समाज की ओर से पालकी में नन्ही दुल्हन की झांकी आकर्षण का केंद्र रही।

जलाशयों पर सजा ‘लोटियों का मेला’, गूंजे गणगौर के गीत
समापन की पूर्व संध्या पर शनिवार देर शाम को शहर के प्रमुख जलाशयों पर मेले सा माहौल रहा. अलग अलग समूहों में पहुंची तीजणियों ने चांदी, तांबा, पीतल और स्टील की लोटियों में जल भरकर गाजे-बाजे के साथ गवर पूजन स्थलों तक शोभायात्रा निकाली. मेले में ‘भंवर म्हाने खेलण द्यो गिणगौर जैसे पारंपरिक गीतों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा. विविध पौराणिक स्वांग रच कर पहुंची तीजणियों ने पदमसर सहित विभिन्न जलाशयों पर चंदन, दूब और पुष्प से लोटियों का पूजन कर पवित्र जल भरा और गवर माता को अर्पित किया. रघुनाथ मंदिर में पूजन करने वाली तीजणियां तलवार लहराते नृत्य करते हुए पदमसर जलाशय पहुंची.

क्या है जोधपुर का ‘बेंतमार मेला’?
जोधपुर में दुनिया के सबसे अनोखे मेले का आयोजन किया जाता है, जहां पर 16 दिन पूजा करने के बाद सुहागिन महिलाएं अलग-अलग स्वांग रचकर रात में सड़कों पर निकलती हैं, इसे बेंतमार के नाम से भी जाना जाता है. प्रचीन काल से चले आ रहे, इस मेले की खासियत यह है कि भाभी अपने देवर और अन्य कुंवारे युवकों को प्यार से छड़ी मार कर बताती हैं कि यह कुंवारा है. जिसके बाद कुंवारे लड़कों की शादी जल्द हो जाती है.

ब्रह्मपुरीः 56 साल से चल रही परंपरा
ब्रह्मपुरी में श्रीमाली ब्राह्मण समाज की ओर से गवर माता को स्वर्णाभूषणों से सजाकर विराजित किया जाएगा. समाज अध्यक्ष महेंद्र बोहरा व मंत्री नरेंद्र राज बोहरा के अनुसार क्षेत्र को रोशनी से सजाया है. यहां 56 वर्षों से गणगौर गीत गाने वाली सावित्री बोहरा और श्यामा बोहरा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया जाएगा. सरला ओझा के अनुसार तीजणियों के स्वांग ग्रुप मंच पर प्रस्तुति देंगे और उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा. माधव जोशी, रितेश दवे, तोष दवे, ओमप्रकाश बोहरा, राजकुमार बोहरा, प्रदीप कुमार बहुरा, रवि कुमार, सुरेंद्र दवे, नरेंद्र त्रिवेदी, कालीचरण ओझा, हेमंत त्रिवेदी, कृष्णा अवतार, भानु प्रताप बोहरा तैयारियों में जुटे हैं.

सुरक्षा के कड़े इंतजामः भीतरी शहर में पुलिस के नाके
डीसीपी (पूर्व) मनीष कुमार चौधरी ने बताया कि भीतरी शहर में 30 से ज्यादा नाके बनाए जाएंगे. विजिटर्स की आईडी की जांच, नाकों पर सीसीटीवी, वीडियो रिकॉर्डिंग और नाइट विजन ड्रोन तैनात किए जाएंगे. उत्सव के लिए मनचलों, नशा कर आने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. पुलिस के सहयोग से कालिका टीम मेले में महिलाओं को राजकॉप सिटीजन एप के बारे में जानकारी देगी। महिलाओं को एप डाउनलोड करने, इसके फीचर्स और इमरजेंसी में उपयोग की प्रक्रिया समझाई जाएगी.



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