HH-60W Jolly Green: संकट में अपनो की आखिरी उम्मीद है ये हेलीकॉप्टर, ईरानी जमीन पर यूं ही नहीं उतरे

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संकट में अपनो की आखिरी उम्मीद है ये हेलीकॉप्टर, ईरानी जमीन पर यूं ही नहीं उतरे

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American HH-60W Jolly Green Helicopter: ईरान में गिरे एफ15ई के दो एयरमेन को बचाने के लिए अमेरिका ने एचएच60डब्ल्यू जॉली ग्रीन2 हेलीकॉप्टर से हाई रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और अपने दोनों एयरमेन सुरक्षित दुश्मन की जमीन से उठा ले गया. अमेरिका के इस ऑपरेशन की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है. इसमें अमेरिकी जॉली ग्रीन हेलीकॉप्टरों की भूमिका सबसे अहम हो रही.

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ईरान की धरती से अमेरिकी एयरमेन को निकालने में इस जॉली ग्रीन हेलीकॉप्टर की भूमिका बेहद अहम रही. फोटो- रायटर

American HH-60W Jolly Green Helicopter: ईरान की जमीन पर शुक्रवार को अमेरिकी वायुसेना के F-15E स्ट्राइक ईगल जेट गिरने और उसके बाद उसके दो एयरमेन को बचाने के लिए चलाए गए ऑपरेशन की चर्चा पूरी दुनिया में है. यह ऑपरेशन कुछ ऐसा था जैसे किसी शेर के जबड़े से उसके शिकार को खींच लेना. ईरान इस वक्त भूखे और घायल शेर की तरह व्यवहार कर रहा है. इस बीच अमेरिका ने अपने एयरमेन को बचाने के लिए उसकी धरती पर एक बेहद जोखिम भरा ऑपरेशन चलाया. इस ऑपरेशन में अमेरिका ने एक तरह से अपना सब कुछ झोंक दिया, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह ऑपरेशन अमेरिकी आन, बान और शान की कहानी था.

एचएच-60डब्ल्यू जॉली ग्रीन-II

एचएच-60डब्ल्यू जॉली ग्रीन-II अमेरिकी वायु सेना का नया कॉम्बैट रेस्क्यू हेलीकॉप्टर है. यह पुराने एचएच-60G पेव हॉक का स्थान ले रहा है. यह सिखोर्स्की यूएच-60M ब्लैक हॉक फैमिली पर आधारित है. इसकी सबसे बड़ी खासियत डबल्ड इंटरनल फ्यूल कैपेसिटी है. इसमें 644 गैलन (लगभग 2,928 लीटर) इंटरनल फ्यूल टैंक्स हैं, जबकि पुराने एचएच-60G में सिर्फ 360 गैलन थे. ये टैंक्स एयरफ्रेम स्ट्रक्चर में बने हैं, इसलिए केबिन में अतिरिक्त 18 इंच जगह बच जाती है. इससे रेंज बढ़ती है और जोखिम वाले इलाकों में बेहतर होता है. कॉकपिट पूरी तरह डिजिटल ग्लास का है. यह पहला हेलीकॉप्टर है जिसमें दो टैक्टिकल डेटालिंक्स- लिंक 16 और SADL हैं. इससे रीयल-टाइम थ्रेट अपडेट्स मिलते हैं.

इस हेलीकॉप्टर को संकट में फंसे लोगों की आखिरी उम्मीद माना जाता है. फोटो- रायटर

ईरान जैसे खतरनाक जगहों के लिए मुफीद

जॉली ग्रीन-2 को बेहद खतरनाक इलाकों में ऑपरेशन के लिए बनाया गया है, जहां दुश्मन बेहद करीब हो सकते हैं. इसमें डिजिटल रडार वार्निंग रिसीवर (RWR), लेजर वार्निंग, मिसाइल वार्निंग और होस्टाइल फायर इंडिकेटर लगे हैं. इसमें ऐसी कई चीजें हैं जो भारी गोलीबारी के इसमें सवाल को सुरक्षित उसके गंतव्य तक पहुंचाने की क्षमता है. इसके केबिन और कोकपिट एक बख्तरबंद गाड़ी की तरह है,

ईरान ऑपरेशन में जॉली ग्रीन की भूमिका

तीन अप्रैल की सुबह F-15E गिरने के कुछ घंटों बाद ही पहला रेस्क्यू शुरू हो गया. दिन की रोशनी में ही 21 विमानों के साथ इस हेलीकॉप्टर ने पायलट को निकाल लिया. इस दौरान हेलीकॉप्टर पर छोटे हथियारों से भारी गोलीबारी हुई. एक हेलीकॉप्टर में कई बुलेट्स लगे, एक क्रू मेंबर को मामूली चोट आई, लेकिन रेस्क्यू सफल रहा. दूसरा क्रू मेंबर बहुत दूर लैंड हुआ था. वे घायल थे, खून बह रहा था, लेकिन ट्रेनिंग के मुताबिक पहाड़ी इलाके में चढ़ाई करते रहे. लगभग 48 घंटे तक वे माउंटेन क्रेविस में छिपे रहे, खुद घावों का इलाज किया और अमेरिकी फोर्सेज से संपर्क बनाए रखा. उनको निकालने के लिए दूसरा मिशन चलाया गया. इसमें 155 विमान लगे थे. सीआईए ने अफवाहें फैलाई. ईरानियों को गुमराह किया गया. दूसरी तरफ करीब 25 मील दूर एक फर्जी ऑपरेशन चलाया गया. इस बीच रात के अंधेरे में जॉली ग्रीन II ने दूसरे एयरमेन को निकाला. एक बार फिर जॉली ग्रीन ने अपनी काबिलीयत साबित की.

क्या भारत के पास हैं ऐसे हेलीकॉप्टर?

भारत के पास अभी एचएच-60W जॉली ग्रीन-II नहीं है. यह अमेरिकी वायुसेना के लिए एक्सक्लूसिव है. लेकिन भारतीय नौसेना के पास सिखोर्स्की S-70 फैमिली के 24 MH-60R रोमियो सीहॉक हेलीकॉप्टर है. इसके आईएनएएस 334 सीहॉक्स कोच्चि और आईएनएएस 335 ओस्प्रेयस गोवा स्क्वाड्रन्स कमीशंड हो चुके हैं. रोमियो मुख्य रूप से एंटी-सबमरीन और एंटी-सर्फेस वारफेयर के लिए है. इसके ग्लास कॉकपिट, FLIR, मल्टी-मोड रडार और सेल्फ-डिफेंस सिस्टम जॉली ग्रीन- II से काफी मिलते-जुलते हैं. भारतीय वायुसेना लैंड-बेस्ड रेस्क्यू के लिए एचएएल ध्रुव, एलएचयू और एमआई-17 वी5 पर निर्भर है.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें



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