Last Updated:
Future Group Insolvency : एनसीएलएटी ने लाइफस्टाइल फैशन ब्रांड के खिलाफ 3 महीने के भीतर दिवालिया प्रक्रिया को पूरा करने का आदेश दिया है. ट्रिब्यूनल ने कहा है कि फ्यूचर ग्रुप की इस कंपनी का दिवालिया समाधान जल्द निकाला जाए, लेकिन कंपनी के प्रमुख प्रोजेक्ट को समाधान पूरा होने तक उसके पास ही रहने दिया जाए.
लाइफस्टाइल फैशन ब्रांड के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
नई दिल्ली. राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने ‘फ्यूचर लाइफस्टाइल फैशन’ की दिवाला समाधान प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है. न्यायाधिकरण ने कर्जदाता बैंक की ओर से कंपनी की एक पट्टे वाली संपत्ति को खाली कराने की मांग वाली अपील को खारिज कर दिया. अपीलीय न्यायाधिकरण ने पाया कि समाधान पेशेवर (आरपी) का अब भी पट्टे पर ली गई इस संपत्ति पर कब्जा है और इसे मुक्त नहीं किया जा सकता है.
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना और अजय दास मेहरोत्रा की दो सदस्यीय पीठ ने समाधान पेशेवर और राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से अनुरोध किया कि वे इस पूरी कार्यवाही को जल्द से जल्द निपटाएं और संभव हो तो आज से तीन महीने के भीतर इसे पूरा कर लें. पीठ ने अपने 18 पन्नों के आदेश में नोट किया कि जिस संपत्ति को लेकर अपील दायर की गई थी, वह एकमात्र ऐसा परिसर है जहां कंपनी का संचालन उसके ‘सेंट्रल’ ब्रांड के तहत जारी है. कंपनी के कुल कारोबार का 80 फीसदी से अधिक हिस्सा इसी संपत्ति से आता है. अदालत ने कहा कि कंपनी को चालू रखने और दिवाला समाधान प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए इस संपत्ति का कंपनी के पास रहना बेहद जरूरी है.
कौन है इस ब्रांड का मालिक
किशोर बियाणी के नेतृत्व वाले फ्यूचर ग्रुप के खुदरा कारोबार के साम्राज्य में संकट आने से पहले ‘फ्यूचर लाइफस्टाइल’ देश भर में ‘सेंट्रल’ और ‘ब्रांड फैक्ट्री’ जैसे बड़े स्टोर चेन का संचालन करती थी. इसके पोर्टफोलियो में ली कूपर, चैंपियन और स्कलर्स जैसे दर्जनों कपड़ों के ब्रांड शामिल थे. बैंक ऑफ इंडिया की याचिका पर 4 मई, 2023 को एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने कंपनी के खिलाफ दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू की थी, जिसे अब तीन महीने में निपटाने का आदेश दिया गया है.
तेजी से बढ़ रहा कपड़े का बाजार
केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि कपड़ा बाजार का आकार साल 2024 में संचयी आधार पर सालाना 8.3 फीसदी की दर से बढ़कर 14.95 लाख करोड़ रुपये हो गया जो साल 2010 में 4.89 लाख करोड़ रुपये था. कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने बताया कि इसमें कृत्रिम रेशा और मिश्रित रेशा आधारित उत्पादों का योगदान 52.2 फीसदी, जबकि कपास आधारित उत्पादों का योगदान 41.2 फीसदी आता है. दूसरी ओर, रेशम और ऊनी रेशा आधारित उत्पादों का योगदान क्रमशः 5.2 फीसदी और 1.3 फीसदी है.
पुरुषों से ज्यादा कपड़े खरीदती हैं महिलाएं
कृत्रिम रेशा और मिश्रित वस्त्रों की मांग में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई. यह 8.28 फीसदी की सालाना वृद्धि के साथ 4.47 लाख करोड़ रुपये हो गई जो साल 2010 में 1.47 लाख करोड़ रुपये थी. वस्त्र मंत्रालय ने कहा कि कुल बाजार में परिवारों का योगदान बढ़कर साल 2024 में 8.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है जो साल 2010 में 4.18 लाख करोड़ रुपये था. इस क्षेत्र ने देश में वस्त्रों की घरेलू मांग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. प्रति व्यक्ति मांग संचयी सालाना 7.8 फीसदी की दर से बढ़कर साल 2024 में 6,066 रुपये हो गई, जो साल 2010 में 2,119 रुपये थी. महिला उपभोक्ता वस्त्र उत्पादों की प्रमुख खरीदार हैं. उनका वस्त्र खरीद में 55.5 फीसदी का योगदान है, जबकि पुरुषों का योगदान 44.5 फीसदी है.
About the Author
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें





